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‘देशी ट्विटर’ Koo ने जुटाए 30 करोड़, ‘आत्मनिर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेंज’ के विनर ने बनाया यह ऐप

करीब 10 महीने पुराने 'स्वदेशी ट्वविटर' ने 41 लाख डॉलर (29.84 करोड़ रुपये) का फंड जुटा लिया है.

Updated: Feb 07, 2021 9:08 AM
Twitter desi alternative Koo gets 30 crore from 3one4 Capital Accel Kalaari Blume Ventures othersकू देश के सभी लोगों को अपनी भाषा में अपने विचार या राय को व्यक्त करने की आजादी देता है.

करीब 10 महीने पुराने माइक्रोब्लॉगिगं स्टार्टअप Koo ने 41 लाख डॉलर (29.84 करोड़ रुपये) का फंड जुटा लिया है. स्वदेशी माइक्रोब्लॉगिंग स्टार्टअप कू इस कैपिटल का इस्तेमाल अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए करेगा. कंपनी द्वारा जारी बयान के मुताबिक वह भारतीय माहौल में सामने आने वाली चुनौतियों और अपने ऐप के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए मार्केटिंग के लिए इस फंड का इस्तेमाल करेगा. कू Made in India ऐप है जो ट्विटर के विकल्प के तौर पर अपनी भाषा में लोगों को अपने विचार व्यक्त करने की आजादी देता है. कू ने 2984 करोड़ का यह फंड अर्ली स्टेड वेंचर कैपिटल फर्म 3one4 Capital के अलावा Accel Partners, Kalaari Capital, Blume Ventures और Dream Incubator जैसे निवेशकों से जुटाए हैं.

स्वदेशी ऐप कू की शुरुआत अप्रमेय राधाकृष्णा ने किया था जो कैब-हेलिंग कंपनी टैक्सीफॉरश्योर के को-फाउंडर भी हैं. राधाकृष्णा पिछले साल 2020 में आत्मनिर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेज के 24 विजेताओं में से एक हैं. राधाकृष्णा ने जिस टैक्सी ऐप TaxiForSure की शुरुआत की थी, उसे उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ने करीब 5 साल पहले अधिग्रहित कर लिया था.

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Koo पर भारतीय भाषाओं में अपने विचार प्रकट करने की आजादी

राधाकृष्णा के मुताबिक वर्तमान में जो माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म हैं, उनमें अंग्रेजी भाषाई लोगों से बाहर के लोगों के बीच बढ़ने की संभावना नहीं है. कू देश के सभी लोगों को अपनी भाषा में अपने विचार या राय को व्यक्त करने की आजादी देता है. राधाकृष्णा का मानना है कि कू भारतीयों की आवाज को भारतीय प्लेटफॉर्म पर और मजबूत करेगा. थ्रीवनफोर कैपिटल के प्रिंसिपल अनुराग रामदासन के मुताबिक भारतीय संदर्भ में कू बहुत वैल्यूबल और पॉवरफुल प्लेटफॉर्म है. रामदासन का कहना है कि देश में सोशल प्लेटफॉर्म को भाषा से परे रखना चाहिए यानी कि इस विविधिता भरे देश में हर प्रकार के लोगों को अपनी राय व्यक्त करने में समर्थ हो, ऐसा सोशल प्लेटफॉर्म होना चाहिए. थ्रीवनफोर कैपिटल के निवेशकों में इंफोसिस के पूर्व सीनियर एग्जेक्यूटिव मोहनदास पई भी एक हैं.

तेजी से बढ़ रही सोशल नेटवर्क यूजर्स की संख्या

भारत में कई भाषाएं बोली जाती हैं. ऐसे में फेसबुक, ट्विटर और वाट्सऐप के विकल्प के तौर पर कई ऐसे ऐप के यूजर्स तेजी से बढ़ रहे हैं जो क्षेत्रीय भाषाओं में लोगों को अपनी राय रखने की आजादी दे रहे हैं, जैसे कि- कू, टूटर, एलीमेंट्स, नमस्ते भारत, इंडियन मैसेंजर. बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद ने भी करीब तीन साल पहले 2018 में किम्भो ऐप के जरि सोशल नेटवर्किंग सेग्मेंट में प्रवेश किया था लेकिन प्राईवेसी से जुड़ी चिंताओं के कारण योजना सफल नहीं हो सकी. स्टैटिस्टा के मुताबिक भारत में सोशल नेटवर्क यूजर्स 2015 में 14.2 करोड़ थी जो 2018 में बढ़कर 32.6 करोड़ हो गई और अनुमान है कि 2023 तक यह बढ़कर 44.7 करोड़ हो जाएगा. वेब ट्रैफिक एनालिसिस वेबसाइट स्टैटकाउंटर के मुताबिक जनवरी 2021 में फेसबुक की सोशल मीडिया मार्केट में हिस्सेदारी 82.53 फीसदी थी जबकि ट्विटर की महज 2.52 फीसदी.

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