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अब भारत की लोकल भाषाओं में भी बन सकेगी वेबसाइट, जून तक तैयार हो जाएंगे इंटरनेट सर्वर

Indian Language : अब बंगाली , देवनागरी , गुजराती , गुरुमुखी , कन्नड़ , मलयालम , उड़िया , तमिल और तेलुगु आदि लिपियों में वेबसाइट के नाम बुक किए जा सकते हैं.

April 1, 2019 7:14 PM
soon websites will be registered in indian local languagesअभी अंग्रेजी , अरबी , रूसी , देवनागरी आदि लिपियों में वेबसाइट के नाम बुक किए जा सकते हैं (Representational Image)

Indian Language : अब जल्द ही आप अपनी वेबसाइट का पूरा नाम नौ भारतीय लिपियों में रजिस्टर करा सकेंगे. इसके लिए इंटरनेट सर्वरों के जून तक तैयार होने की उम्मीद है. फिलहाल अंग्रेजी के अलावा  मैंडरिन, अरबी, रूसी, देवनागरी आदि लिपियों में वेबसाइट के नाम बुक किए जा सकते हैं. हालांकि , टॉप लेवल डोमेन (टीएलडी) रूट सर्वर द्वारा दिए गए कुछ खास करेक्टरों में ही बुक किए जा सकेंगे. उदाहरण के लिए , कॉम, जोओवी, इन आदि. अभी वेबसाइट के नाम केवल देवनागरी लिपि में ही बुक किया जा सकता है और एक्सटेंशन के रूप में सिर्फ ” डॉट भारत ” ही उपलब्ध है.

इन क्षेत्रीय भाषाओं में कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन

शुरुआत में जिन भारतीय लिपियों को इंटरनेट कॉरपोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स एंड नंबर्स (ICNN) के रूट सर्वरों में फीड किया जाएगा उनमें बंगाली , देवनागरी , गुजराती , गुरुमुखी , कन्नड़ , मलयालम , उड़िया , तमिल और तेलुगु शामिल हैं.

यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस स्टींरिंग ग्रुप (UASG) के चेयरमैन अजय डेटा ने बताया , ” भारत में इस्तेमाल होने वाली नौ भाषायी लिपियों के लिए लेबल जेनरेशन रूल्स (LGR) के तिमाही के भीतर अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है और जून तक इसे ICANN के रूट सर्वरों में फीड कर दिया जाएगा. ”

उन्होंने कहा , ” जिससे रूट सर्वर में मौजूद एलजीआर भारतीय लिपि में लिखे वर्णों की पहचान कर सकेगा. इससे लोग अपनी पसंद के अनुसार वेबसाइट का पूरा नाम चुन सकेंगे. ” उन्होंने कहा कि एक अरब से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए नई लिपियों की जरूरत है. यह लोग सिर्फ अपनी स्थानीय भाषा को समझ , पढ़ और लिख सकते हैं.

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