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अब किसानों का ‘ओला-उबर’! खेती के लिए दरवाजे पर मिलेंगे आधुनिक उपकरण

किसानों को किफायती कीमतों पर उनके दरवाजे पर उन्नत तकनीक उपलब्ध हो सकेगी.

September 11, 2019 5:12 PM
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ऐप बेस्‍ड टैक्‍सी सर्विस ओला-उबर के तर्ज पर अब किसानों को कृषि कार्य के लिए मशीन उपलब्ध कराई जाएगी. किसानों को कृषि कार्य के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) के जरिए मशीन मिलेंगी. खास बात यह है कि यह सुविधा किसानों को उनके दरवाजे पर मिलेगी. एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.

एक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि मंत्रालय ने किसानों के लिए एक फॉर्म इक्विपमेंट रेंटल ऐप डेवलप किया है. इसके जरिए किसान ट्रैक्टर, रोटावेटर और अन्य कृषि उकपरण सुविधानुसार किराये पर ले सकते हैं. यह ऐप एक तरह से ओला, उबर की तरह है और यह किसानों के लिए भी इसी तरह सुविधाजनक होगा.

बता दें, किसानों की आय दोगुना करने की दिशा में मोदी सरकार की तरफ से कई कदम उठाए जा रहे हैं. पीएम किसान स्कीम के तहत सालाना 6000 रुपये के एलान के बाद अब मोदी सरकार किसानों के लिए पेंशन की सुविधा देने जा रही है.

द हिंदू के अनुसार, कृषि मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने बताया, ”हम चाहते हैं कि किसानों को किफायती कीमतों पर उनके दरवाजे पर उन्नत तकनीक उपलब्ध हो सके.” रिपोर्ट के अनुसार, 38 हजार कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) देशभर में बनाए जा चुके हैं, जिनकी क्षमता 2.5 लाख कृषि उपकरण सालाना किराये पर देने की है.

पराली नहीं जलाने का लिया संकल्प

हर साल उत्तर भारत में पराली जलाने और उससे बढ़ने वाले प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली में किसानों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया. इस सम्मेलन में देशभर के किसानों ने पराली ना जलाने और हैप्पी सीडर तकनीक को अपनाने का संकल्प लिया.  उत्तर भारत में खेतों में पराली यानी फसलों के अवशेष जलाना एक गंभीर समस्या बन चुकी है, खासकर सर्दियों के मौसम में होने वाली इस प्रक्रिया का असर दूर-दूर तक होता है. धुएं से प्रदूषित हवा और कोहरा जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है. सेहत पर गंभीर असर डालने वाले इस स्मॉग को जड़ से उखाड़ने के प्रयास लगातार होते रहे हैं.

हैप्पी सीडर तकनीक का उपयोग अब पंजाब और हरियाणा के किसान कर रहे हैं. “हैप्पी सीडर” जैसे नाम से ही साफ होता है कि तंदुरुस्ती और खुशहाली के लिए तैयार की गई एक ऐसी तकनीक जिसमें फसल के अवशेषों को जलाने की आवश्यकता नहीं होती है.

कैसे काम करती है ये तकनीक

ट्रैक्टर के जरिए इस्तेमाल किए जाने वाला ये उपकरण खेत में पड़े धान के अवशेषों को काट कर इकट्ठा करता है और साथ साथ गेंहू की बुवाई भी करता जाता है और फिर उन्ही अवशेषों को बुवाई वाली जगह पर बिछा देता है. इस तरह किसान को एक बार में कई फायदे होते हैं, पराली हटानी नहीं पड़ती, बुवाई हो जाती है और कटी हुई पराली खेत में नमी बचाए रखने के साथ साथ जैविक खाद की तरह काम आ जाती है.

हैप्पी सीडर के इस्तेमाल से जहां एक ओर किसानों के मुनाफे में बढ़ोत्तरी होगी. वहीं, वायु प्रदूषण भी कम होगा. सम्मेलन में पहुंचे किसानों ने पराली नहीं जलाने और हैप्पी सीडर के जरिए अपने फसलों की कटाई और बुआई करने का शपथ लिया. केंद्र सरकार की कोशिश है कि ये तकनीक हर किसान को मिलें और उसके आय में वृद्धि हो.

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