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तीन इंजीनियर दोस्तों ने खड़ा किया हेल्थकेयर स्टार्टअप Medcords; एक क्लिक पर मंगाइए दवाएं, डॉक्टर से मिलेगी सलाह

राजस्थान के कोटा से मई 2017 में मेडकॉर्ड्स की शुरुआत हुई.

Updated: Mar 04, 2021 5:11 PM
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इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद तीन दोस्तों (श्रेयांस मेहता, निखिल बहेती और सईदा धनावत) को भारत के कमजोर हेल्थकेयर सिस्टम और छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की दिक्कतों ने एक नई प्रेरणा दी. इसकी बदौलत इन्होंने एक डिजिटल हेल्थकेयर स्टार्टअप मेडकॉर्ड्स (Medcords) शुरू किया. यह स्टार्टअप दो तरह से हेल्थकेयर सिस्टम की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है. पहला, यह ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को कम कीमत पर डॉक्टर्स के एक व्यापक नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन परामर्श उपलब्ध करा रहा है. दूसरा, लोकल फार्मेसी को डिजिटल बनाकर उनके व्यापार को बड़ा करने में मदद कर रहा है. इससे रोजगार के अवसर भी बन रहे हैं. 2017 में शुरू हुए मेडकॉर्ड्स ने तकरीबन तीन साल में 40 लाख डॉलर का फंड भी जुटा लिया है. मेडकॉर्ड्स को शुरू करने के पीछे की कहानी, उसके सामने आई चुनौतियां, सफलताएं और भविष्य की योजनाओं जैसे तमाम मुद्दों पर फाइनेंशियल एक्सप्रेस हिंदी डिजिटल ने कंपनी के सीईओ एवं संस्थापक श्रेयांस मेहता के साथ विस्तार से बातचीत की. आइए उनकी जुबानी जानते हैं आखिर इंजीनियर दोस्तों ने क्यों और कैसे बनाया मेडकॉर्ड्स…

सवाल: इंजीनियर होने के बावजूद हेल्थकेयर स्टार्टअप शुरू करने का आइडिया कैसे आया?

जवाब: हां, हम तीनों इंजीनियरिंग ग्रैजुएट हैं, लेकिन मैं डॉक्टरों के परिवार से हूं. मेरे परिवार में कुल मिलाकर 35 से 40 डॉक्टर हैं. मैं और निखिल बचपन से दोस्त हैं. मैं डॉक्टरों के परिवार से था, जबकि निखिल का घर शहर के सबसे बड़े अस्पताल से जुड़ा हुआ है. हम हर दिन मरीजों की तकलीफ और परेशानी देखा करते थे. निखिल ने उनके साथ कार्यरत दोस्त सईदा के साथ इन समस्याओं पर चर्चा की. हमारी तिकड़ी ने 2016 में हाथ मिलाया और मेडकार्ड्स को बनाया और इस विचार को आगे बढ़ाना कर दिया और इस सफर में बढ़ते रहे. मई 2017 में हमने राजस्थान के कोटा से काम शुरू किया.

स्वास्थ्य प्रणाली की कमियों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए हमने बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान में 800 से ज्यादा जगह की यात्रा की. इसके बाद हम आगे बढ़े. हम आज विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक डिजिटल नेटवर्क बनाने के साथ लोकल फॉर्मेसी को भी डिजिटल करने का काम कर रहे हैं. हमारे दो ऐप हैं. ‘आयु’ ऐप मरीजों की सुविधा के लिए है. वहीं, ‘सेहत साथी’ ऐप मेडिकल स्टोर्स को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ रहा है. अभी तक आयु ऐप 13 से ज्यादा राज्यों और 30 लाख से ज्यादा परिवारों तक पहुंच गया है. वहीं, सेहत साथी ऐप से 25,000 से ज्यादा मेडिकल स्टोर जुड़ चुके हैं और 5,000 से ज्यादा स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का एक डिजिटल नेटवर्क बनाया है ताकि भारत के अंतिम छोर पर भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके.

सवाल: मेडकार्ड्स शुरू करने में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

जवाब: मेरे निजी अनुभव से मेडकॉर्ड्स का जन्म हुआ. 2014 में मेरे पिता जी डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करते थे. उन्होंने मुझे बताया कि उनसे अपनी बीमारी का इलाज कराने वाले ज्यादातर मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आते थे, जिन्हें उनके पास पहुंचने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ता था. इसी को देखते हुए हमने यह स्टार्टअप शुरू किया. हमने मरीजों के रेकॉर्ड के डिजिटाइजेशन शुरू किया और देश के ग्रामीण अंचलों में हमने डॉक्टर टेली कंसलटेशन सुविधाएं मुहैया कराई. लोकल फॉर्मेसी का डिजिटाइजेशन करने में मिनटों का समय लगता है. हमारे सामने मुख्य चुनौती यह थी कि छोटे शहरों में मरीजों के पास स्मार्टफोन और अच्छे नेटवर्क की सुविधा नहीं थी. बाद में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लोगों की तादाद बढ़ती गई और नेटवर्क भी बेहतर हो गया. हमने वेब वर्जन के एप्लिकेशन के लिए आयु ऐप लॉन्च किया, जिससे अगर किसी को ऐप को डाउनलोड करने में कोई समस्या हो तो वह इस सर्विसेज का वेब वर्जन इस्तेमाल कर सकें.

सवाल: स्टार्टअप के लिए फंड कैसे जुटाया. अगले दो-तीन साल में क्या लक्ष्य लेकर चल रहे हैं? यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि आपका टारगेट खासतौर से ग्रामीण भारत है?

जवाब: हमारा स्टार्टअप वॉटरब्रिज, इंफोएज, असटार्क, राजस्थान वेंचर कैपिटल फंड से करीब 4 मिलियन डॉलर जुटा चुका है. अगले तीन सालों में पांच करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए और इसका संचालन शुरू करने के लिए हम फंड एकत्र करने का अगला दौर शुरू करने की योजना बना रहे हैं. हम इसे भारत का सबसे भरोसेमंद हेल्थ केयर प्लेटफॉर्म बनना चाहते हैं. बीते दो साल में हमने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के गांवों में 75 हजार किमी से ज्यादा की यात्रा की. हम 35,000 से ज्यादा लोगों से मिले और इन राज्यों में इकोनॉमिक विलेज का दौरा किया. मेडकॉडर्स की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जितनी तेजी से 40 मिनट में आयु एवं सेहत साथी के जरिए प्रमुख सर्विसेज मरीजों तक पहुंच सकती हैं, उतनी तेजी से किसी अन्य कंपनी की सेवाएं मरीजों तक नहीं पहुंच सकती. यही बात हमें दूसरों से अलग रखती है. हम अपने प्लेटफॉर्म पर रोजाना 5,000 नए लोगों को जोड़ रहे हैं.

सवाल: आपने मेडकार्ड्स के दो मॉडल बनाए हैं. पहला मरीजों और दूसरा मेडिकल स्टोर्स के लिए है. इन दोनों प्लेटफॉर्म पर क्या-क्या सुविधाएं या सेवाएं उपलब्ध हैं.

जवाब: हमने परिवार के स्वास्थ्य के लिए आयु ऐप, डॉक्टरों के लिए डॉक्टर्स पोर्टल और मेडिकल स्टोर्स के लिए ‘सेहत साथी’ ऐप बनाए हैं, जिससे लोगों को सबसे तेज, भरोसेमंद ढंग से स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, जो सभी मरीजों की पहुंच में होंगी. इस ऐप की मदद से लोग केवल एक क्लिक कर दवाइयां मंगवा सकते हैं. सेहत साथी ऐप के माध्यम से लोकल मेडिकल स्टोर अपने को रजिस्टर्ड करवा सकते हैं और ऑनलाइन ऑर्डर भेजना शुरू कर सकते हैं. वह उन लोगों की मदद कर सकते हैं, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है. वे टेलीमेडिसिन के जरिए डॉक्टरों से परामर्श करने के लिए मरीजों की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं. इससे मरीज पूरे भारत में टेलीमेडिसिन से डॉक्टरों से परामर्श कर सकते हैं. सेहत साथी ऐप को स्थानीय तौर पर मेडिकल स्टोर्स से जोड़ा गया है, जिससे वो डिजिटल होकर अपना बिजनेस भी बढ़ा सके और जिन लोगों के पास स्मार्टफोन है, वे उन सेवाओं से लोकल फार्मेसी का पूरा लाभ उठा सकते हैं.

सवाल: ‘आयु’ ऐप से उपभोक्ताओं को कैसे फायदा हो रहा है? यह कितना किफायती है और क्या अतिरिक्त फायदे हैं?

जवाब: हम भारत के लिए सबसे भरोसेमंद हेल्थ केयर प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं. हमें अपने स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे का डिजिटलिजेशन करना है. आयु ऐप एंड्रॉइड यूजर्स के लिए मुफ्त उपलब्ध हैं. डॉक्टरों के परामर्श के लिए शुल्क बहुत कम हैं क्योंकि एक हफ्ते के परामर्श के लिए इसकी शुरुआती फीस 99 रुपये से 120 रुपये तक है. आयु ऐप में मरीजों को सलाह देकर, मांग और उपलब्धता के आधार पर डॉक्टर भी इनकम कर सकते हैं. मरीज केवल एक क्लिक में डॉक्टर तक पहुंच पाएंगे. मेडकॉर्ड्स ने एक आयु कार्ड भी लॉन्च किया है, जिसमें कम फीस पर दूर-दराज के क्षेत्र में बैठे मरीजों को वार्षिक रूप से सदस्यता देने की योजना है. यह गांवों और कस्बों के रोगियों के लिए ऑनलाइन चिकित्सा परामर्श और मेडिकल रेकॉर्ड के डिजिटल बनाता है. आयु ऐप यूजर्स को स्वास्थ्य प्रबंधन, स्वास्थ्य बीमा, संबंधित ब्लॉग और वीडियो की सुविधा भी मिलती है.

सवाल: मेडकार्ड्स का ‘सेहत साथी’ ऐप मेडिकल स्टोर्स संचालकों के लिए किस तरह लाभकारी है. इस ऐप से जुड़ने की क्या प्रक्रिया है?

जवाब: सेहत साथी ऐप में फार्मेसीज खुद को रजिस्टर कर सकती हैं और अपना बिजनेस ऑनलाइन शुरू कर सकती हैं. इससे डिलिवरी एजेंटों को रोजगार भी देता है. यह ऐप मेडिकल स्टोर रोगियों को टेलीमेडिसिन के जरिए अपने स्टोर से बेहतर हेल्थ केयर प्राप्त करने में मदद कर सकता है. वह बदले में 25 से 30 फीसदी अधिक कमाते हैं क्योंकि स्टार्टअप के पास उनके साथ रेवेन्यू शेयर करने का मॉडल है. अब तक 8,6,8000 लोगों ने सेहत साथी ऐप को डाउनलोड किया है. स्टार्टअप का उद्देश्य गांवों और कस्बों में रहने वाले हर नागरिक की स्वास्थ्य संबंधी जरूरत पूरा करना है.

सवाल: मेडकॉर्ड्स का बिजनेस मॉडल क्या है?

जवाब: मेडकॉर्ड्स स्टार्टअप के रूप में काम करता है. यह उन रोगियों पर ध्यान केंद्रित करता है जो मेडिकल सर्विसेज के बदले मामूली राशि का भुगतान करने में सक्षम हैं. सेहत साथी या मेडिकल स्टोर रोगियों को टेलीमेडिसिन के जरिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं हासिल करने में मदद करते हैं. इस क्रम में मेडिकल स्टोर 25 से 30 फीसदी अधिक कमाते हैं क्योंकि स्टार्टअप के पास उनके साथ राजस्व साझा करने का मॉडल है. आयु कार्ड सदस्यता और कंसल्टेशन फीस से भी हम रेवेन्यू जेनरेट करते हैं.

सवाल: ऐप बेस्ड हेल्थकेयर सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा कितनी है?

जवाब: आयु और सेहत साथी एप्लिकेशन से मेडकॉडर्स कोरोना महामारी से भी निपटने में मदद कर रहा है. राजस्थान सरकार ने डॉक्टरों और मरीजों की सुविधा और 68 मिलियन से अधिक आबादी की सहायता के लिए मेडकॉर्ड के आयु और सेहत साथी एप्स के साथ विशेष रूप से भागीदारी की है. राजस्थान सरकार के सफल भीलवाड़ा मॉडल के अलावा, जहां MedCords ने कोरोना को फैलने से रोका था, अधिकारी भी आयु ऐप की मदद से नियमित और पुरानी बीमारी के रोगियों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं. फार्मको, तत्वन ई-क्लिनिक, वोनड्रैक्स, पोर्टिया मेडिकल, लाइब्रेट, डॉक्सऐप और मेडकॉर्ड्स जैसे स्टार्टअप हेल्थकेयर इस क्षेत्र में कमी को पूरा कर कर रहे हैं.

 

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