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दीवारों के भी होंगे कान! ‘स्मार्ट होम्स’ बिना कहे भी सुन लेंगे आपके मन की बात, जल्द आ रही है टेक्नोलॉजी

अमेरिका में वैज्ञानिक ऐसे सिस्टम को विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जो घर को 'स्मार्ट होम' में तब्दील कर सके. ताकि ये स्मार्ट होम आपकी एक्टिविटी के हिसाब से एडजस्ट हो सकें.

November 20, 2018 12:21 PM
Future 'smart' homes could 'listen' to you, IEEE Sensors, case western reserve university, internet of ears, technologyफ्यूचर स्मार्ट होम्स के लिए सिस्टम विकसित करने वाली टीम केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी के रिसर्चर हैं. इनमें एक भारतीय मूल का वैज्ञानिक भी है. (Representational Image)

Future Smart Homes : कहते हैं दीवारों के भी कान होते हैं, यानी वे आपकी बात सुन सकतीं हैं. अभी यह बात भले ही मुहावरे के रूप में कही जाती है लेकिन भविष्य में यह मुमकिन हो जाएगा. अमेरिका में वैज्ञानिक ऐसे सिस्टम को विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जो घर को ‘स्मार्ट होम’ में तब्दील कर सके. ताकि ये स्मार्ट होम आपकी एक्टिविटी के हिसाब से एडजस्ट हो सकें. ऐसा घर की दीवारों और फ्लोर में लगे हिडन (छिपे हुए) सेंसर से हो सकेगा.

फ्यूचर स्मार्ट होम्स के लिए सिस्टम विकसित करने वाली टीम केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी के रिसर्चर हैं. इनमें एक भारतीय मूल का वैज्ञानिक भी है. ये लोग ऐसे सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जो किसी बिल्डिंग में रहने वाले लोगों और जानवरों के वाइब्रेशन, साउंड से लेकर विशेष हरकतों या अन्य मूवमेंट्स को रीड कर सके. नई दिल्ली में IEEE सेंसर्स कॉन्फ्रेंस में पेश की गई रिसर्च के मुताबिक, यह भी योजना है कि यह सिस्टम मौजूदा इलेक्ट्रिकल फील्ड में होने वाले किसी भी बदलाव को डिटेक्ट कर सके.

10 साल या इससे ज्यादा का लग सकता है वक्त

हालांकि अभी स्मार्ट होम्स विकसित होने में 10 साल या उससे ज्यादा वक्त भी लग सकता है. रिसर्चर्स का कहना है कि फ्यूचर स्मार्ट होम्स में कैमरों की जरूरत नहीं होगी. इनकी दीवारों और फ्लोर में कुछ छोटे हिडन सेंसर होंगे, जिनसे घर आपकी एक्टिविटी के हिसाब से अपने आप एडजस्ट हो जाएंगे.

Future 'smart' homes could 'listen' to you, IEEE Sensors, case western reserve university, internet of ears, technologyRepresentational Image

‘इंटरनेट आॅफ ईयर्स’ दिया गया है नाम

केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर मिंग चुन हुआंग ने कहा कि हम ऐसे घर या बिल्डिंग बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनके बिना कहे उन्हें सुन सकें. हम चाहते हैं कि फ्यूचर स्मार्ट होम्स हर वाइब्रेशन और विशिष्ट गतिविधियों को पहचान सकें. ये बिल्कुल इंसान के कान के सिद्धातों के समान है. इसलिए हमने इसे इंटरनेट आॅफ ईयर्स नाम दिया है.

हो चुकी है टैस्टिंग

रिसर्चर्स ने इस टेक्नोलॉजी को ओहियो लिविंग ब्रेकेनरिज विलेज की स्मार्ट लिविंग लैब में टैस्ट किया है. केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी के अन्य असिस्टेंट प्रोफेसर सौम्यजीत मंडल ने कहा कि उनकी टीम ने स्मार्ट होम्स के लिए एक कमरे की दीवारों और फ्लोर में 4 सेंसर्स का इस्तेमाल किया है. मंडल ने यह भी कहा कि हालांकि सिस्टम किसी भी व्यक्ति को पहचान नहीं सकता लेकिन यह लोगों की अलग—अलग चाल—ढाल के हिसाब से उन्हें पहचान की जांच कर सकता है.

ये होंगे फायदे

रिसर्चर्स का मानना है कि यह नया सिस्टम काफी मायनों में लाभदायक रहेगा. हुआंग ने कहा कि इसका पहला फायदा बिल्डिंग्स के लिए एनर्जी इफिशिएंसी का होगा, विशेष तौर पर लाइटिंग और हीटिंग को लेकर. इसकी वजह है कि सिस्टम इंसानों के एक कमरे से दूसरे कमरे में जाने के हिसाब से एडजस्ट होगा, ऐसे में एनर्जी बच सकेगी.

एक अन्य लाभ यह हो सकता है कि यह बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी और सेफ्टी को ट्रैक​ कर सकेगा. ये चीजें भूकंप या तूफान के मामले में काफी मायने रखती हैं.

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