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ITR Filing: आज ही फाइल कर लें आईटीआर, 31 दिसंबर का न करें इंतजार, नहीं तो जेब पर पड़ जाएगा भारी

राणा कहते हैं कि भले ही करदाताओं को ITR दाखिल करने में राहत मिली हो, लेकिन फिर भी उन्हें सेक्शन 234A और 234B के तहत लगने वाले ब्याज से बचने के लिए जितनी जल्दी हो सके रिटर्न दाखिल कर देना चाहिए.

Updated: Sep 30, 2021 11:18 AM
Why you shouldn’t wait for the extended due date to file ITRITR फाइल करने के लिए बढ़ी हुई लास्ट डेट का इंतजार नहीं करना चाहिए.

Income Tax Return: पिछले आकलन वर्ष (AY 2020-21) की तरह, इस आकलन वर्ष (AY 2021-22) में भी आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख को बढ़ा दिया गया है. पहले ITR फाइल करने की लास्ट डेट 30 सितंबर, 2021 थी, जिसे बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2021 किया गया है. जानकारों का कहना है कि जितनी जल्दी हो सके, अपना आईटीआर फाइल कर लेना चाहिए. इसके अलावा, पेंडिंग टैक्स मामलों के निपटारे का आज आखिरी मौका है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कुछ दिनों पहले आदेश जारी कर टैक्स अधिकारियों से आज 30 सितंबर तक पेंडिंग टैक्स सेटलमेंट एप्लीकेशन को स्वीकार करने का निर्देश दिया है.

HostBooks Ltd. के फाउंडर और चेयरमैन कपिल राणा कहते हैं, “कोविड-19 महामारी के बीच टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है. इसके अलावा आयकर पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों जैसे रिटर्न दाखिल करने और वेरिफाई करने में आ रही दिक्कतों के चलते केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा को आगे बढ़ाया है.”

राणा ने आगे कहा, “भले ही करदाताओं को ITR दाखिल करने में राहत मिली हो, लेकिन फिर भी उन्हें सेक्शन 234A और 234B के तहत ब्याज से बचने के लिए जितनी जल्दी हो सके रिटर्न दाखिल कर देना चाहिए. इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 234A और 234B के तहत रिटर्न देर से दाखिल करने के जुर्माने पर कोई राहत नहीं है. रिटर्न दाखिल करने और टैक्स के पेमेंट में देरी के लिए टैक्सपेयर्स को ब्याज का भुगतान करना पड़ता है. ITR फाइल करने में देरी पर सेक्शन 234A के तहत ब्याज लगता है. अगर करदाता ने एडवांस टैक्स का भुगतान नहीं किया है या कर देयता के 90 प्रतिशत से कम का भुगतान किया है, तो उसे सेक्शन 234B के तहत हर महीने एक प्रतिशत की दर से या अप्रैल से पेमेंट करने की तारीख तक के ब्याज का भुगतान करना होगा.”

टैक्स की देनदारी पर लगने वाला ब्याज

टैक्स पर लगने वाले ब्याज पर बात करते हुए, राणा ने कहा, “सेक्शन 208 के तहत, एक शख्स को एडवांस टैक्स का भुगतान तब करना होगा, अगर उसकी एक साल की टैक्स लायबिलिटी 10 हजार या उससे ज्यादा है. इसलिए, अगर आपको ITR दाखिल करने में देर हो गई है, फिर भी बेहतर यही होगा कि आप जितनी जल्दी हो सके, एडवांस टैक्स का भुगतान कर दें. जहां तक एडवांस टैक्स पेमेंट की बात आती है, ऐसा शख्स जो भारत का रहने वाला है, जिसकी आयु 60 वर्ष या उससे ज्यादा है और जिसकी व्यवसाय और पेशे से आय के अलावा अन्य आय है, उसे एडवांस टैक्स का भुगतान करने की जरूरत नहीं है. इसलिए ऐसे शख्स को धारा 234B प्रभावित नहीं करेगी.

उन्होंने आगे कहा, “ऐसे मामले, जहां एडवांस टैक्स अमाउंट, TDS/TCS, सेक्शन 89, 90, 90A & 91 के तहत मिलने वाली टैक्स से राहत और अल्टरनेट मिनिमम टैक्स क्रेडिट को हटाने के बाद टोटल इनकम पर बनने वाला टैक्स एक लाख रुपये से ज्यादा होता है, वहां ब्याज की दर सेक्शन 234A के तहत लागू होती है. क्योंकि जब टैक्स पेमेंट की बात आती है तो टैक्सपेयर्स को किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है और वेबसाइट भी ठीक चल रही होती है.”

लेट फीस

टैक्स की देनदारी पर ब्याज के अलावा, अगर टैक्स के भुगतान में देरी होती है, तो सेक्शन 234F के तहत लेट फीस देनी पड़ती है. राणा ने बताया कि अगर रिटर्न अंतिम तारीख के बाद फाइल किया जाता है तो 5000 रुपये की लेट फीस देनी होती है. अगर टोटल इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है, तो ऐसे में लेट फीस 1,000 रुपये होगी. हालांकि, असेसमेंट ईयर के 31 दिसंबर तक ड्यू डेट मिस करने पर 5,000 रुपये की लेट फीस लगती है और अन्य मामलों में फीस 10,000 रुपये हो जाती है. इसलिए, एक्सटेंडेड ड्यू डेट 31 दिसंबर, 2021 तक टैक्स का भुगतान नहीं करने वालों को दोगुना यानी दस हजार का जुर्माना भरना पड़ेगा.

(Article: Amitava Chakrabarty)

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