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Gold Investment: आगे भी जारी रहेगी गोल्ड की चमक! निवेश के लिए ये है बेहतर स्ट्रैटेजी

गोल्ड एक सुरक्षित निवेश माना जाता है जिसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है लेकिन कभी शून्य नहीं हो सकता है.

December 10, 2020 8:07 AM
WHAT IS THE BEST TIME TO INVEST IN Gold market uncertainties AND WHERE TO PHYSICAL GOLD OR GOLD ETFभारत में फिजिकल गोल्ड के प्रति लोगों का आकर्षण अधिक है लेकिन पोर्टफोलियो के उद्देश्य से गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड फंड या सोवरेन गोल्ड बांड्स अधिक बेहतर विकल्प है.

इस साल की शुरुआत से ही गोल्ड में चमक आनी शुरू हुई और दुनिया भर में फैली हुई महामारी के कारण इसके भाव ने ऊंचाइयों के रिकॉर्ड बनाए. कोरोना महामारी के कारण इकोनॉमिक अनिश्चितता ने इसके चढ़ते भाव को सहारा दिया. इस अनिश्चितता के कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने लिक्विडिटी मानकों में ढील दी और सरकारों ने राहत पैकेज दिया ताकि किसी भी आर्थिक क्षति से निपटा जा सके.
हालांकि भारत में गोल्ड के भाव में तेजी पिछले साल से ही चली आ रही है, क्योंकि इकोनॉमिक स्लोडाउन के संकेत दिख रहे थे और डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट आ रही थी. रुपये में गिरावट के कारण गोल्ड के भाव में और तेजी रही क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकतम सोना आयात करता है.

इक्विटी के गिरने पर गोल्ड में तेजी

सैद्धांतिक तौर पर गोल्ड के भाव और इक्विटीज में विपरीत संबंध है. इसका मतलब यह हुआ कि सामान्यतया जब इक्विटी मार्केट वोलेटाइल रहता है या अनिश्चितता का माहौल बना रहता है तो निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की तरफ आकर्षित होते हैं. गोल्ड एक सुरक्षित निवेश माना जाता है जिसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है लेकिन कभी शून्य नहीं हो सकता है.

इन अवसरों पर इक्विटी फर्श पर और गोल्ड अर्श पर

उदाहरण के तौर पर देखें तो डॉटकॉम बबल, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमला या 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के समय गोल्ड के भाव में जबरदस्त तेजी रही और यह तेजी तब तक बनी रही जब तक बाजार में स्थायित्व नहीं आ गया. 2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में विकसित देशों में गोल्ड के भाव में तेजी रही. 2001 में औसतन गोल्ड भाव 4300 रुपये पर था जो 2003 में बढ़कर 5700 रुपये (15 फीसदी सीएजीआर) पर पहुंच गया. 2008 की वैश्विक मंदी के समय गोल्ड के भाव में तेजी रही. एसएंडपी बीएसआई इंडेक्स जनवरी 2008 और फरवरी 2009 के बीच 50 फीसदी तक गिर गया था और सोने के भाव इसी अवधि में 10,800 रुपये से 30 फीसदी बढ़कर 14500 रुपये तक पहुंच गया. वर्तमान स्थिति की बात करें तो स्टॉक मार्केट लगभग 40 फीसदी तक गिर चुका है और सोना 30 फीसदी तक चढ़ चुका है.

इस साल गोल्ड में 30 फीसदी तक की बढ़त

2007 से 2012 के बीच गोल्ड के भाव 22 फीसदी सीएजीआर से बढ़े जबकि अगले पांच साल में इसकी चमक काफी कम हो गई और निवेशकों के लिए यह आकर्षक नहीं रह गया. 2020 की बात करें तो वैश्विक स्तर पर गोल्ड के भाव में 1900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए जो भाव इसके पहले 2011 में था. भारत की बात करें तो अगस्त महीने में सोने ने 56,191 रुपये प्रति दस ग्राम का शिखर छुआ था. हालांकि इस समय गोल्ड के भाव 50 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के भाव पर चल रहे हैं लेकिन इस साल इसके भाव में 30 फीसदी तक बढ़त आई. इस प्रकार यह बेहतरीन परफॉर्मिंग एसेट क्लास में बना हुआ है.

महामारी के कारण आगे भी गोल्ड में तेजी

जब तक महामारी के कारण अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, गोल्ड की चमक बनी रहेगी. हालांकि यह अनुमान लगाना कठिन है कि गोल्ड के भाव में वैसी तेजी देखने को मिल सकती है जैसी इस साल अब तक रही है. इसके बावजूद ब्याज दरों के साथ विपरीत संबंध और महंगाई व अनिश्चितता के अगेन्स्ट हेज के तौर पर इसकी बड़ी भूमिका के कारण आगे भी इसके भाव में तेजी देखने को मिल सकती है. एक अनुमान के मुताबिक केंद्रीय बैंक अपनी वर्तमान मौद्रिक नीतियों को बरकरार रखेंगे और सरकार जरूरत पड़ने पर राहत पैकेज जारी रखेगी, इस वजह से भी गोल्ड के भाव को सहारा मिलेगा.

10-15 फीसदी गोल्ड में निवेश

निवेशक की निगाह से देखें तो गोल्ड को पोर्टफोलियो में फाइनेंसियल एसेट के अगेंस्ट हेज के तौर पर एसेट एलोकेशन के प्वाइंट ऑफ व्यू से देखा जाना चाहिए. इस मामले में सैद्धांतिक तौर पर बात करें तो पोर्टफोलियो में 10-15 गोल्ड में निवेश होना चाहिए. हालांकि इस बारे में अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर राय ले लेना चाहिए.

फिजिकल गोल्ड से बेहतर ईटीएफ

भारत में फिजिकल गोल्ड के प्रति लोगों का आकर्षण अधिक है लेकिन पोर्टफोलियो के उद्देश्य से गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड फंड या सोवरेन गोल्ड बांड्स अधिक बेहतर विकल्प है. इन तीनों में से सबसे अधिक फ्लेक्सिबल (लचीला) गोल्ड ईटीएफ है. फिजिकल गोल्ड से तुलना करें तो गोल्ड ईटीएफ से कई फायदे हैं, जैसे कि इसे रखने या चोरी की चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसे डीमैट फॉर्म में रखा जाता है. इस रखने पर बहुत कम चार्ज लगता है. अगर कोई निवेशक भविष्य में गोल्ड की किसी जरूरत के लिए निवेश करना चाह रहा है तो वह महज 1 हजार रुपये के एसआईपी के जरिए भी भविष्य में गोल्ड की यूनिट्स जुटा सकता है.
(Article: Chintan Haria, Head- Product Development & Strategy, ICICI Prudential AMC)

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