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Cost Inflation Index क्या है? इस इंडेक्स के सही इस्तेमाल से आप कैसे बचा सकते हैं टैक्स?

Cost Inflation Index: गोल्ड-प्रॉपर्टी बेचकर हुए लांग टर्म मुनाफे पर टैक्स बचाने में कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स बहुत काम आता है.

what is Cost Inflation Index and how it helps to save tax read here in details
महंगाई के चलते चीजों के दाम बढ़ रहे हैं. बढ़ती महंगाई के चलते किसी चीज के भाव में कितना फर्क आया, इसे मापने के लिए कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स का प्रयोग किया जाता है.

Cost Inflation Index: महंगाई के चलते चीजों के दाम बढ़ रहे हैं. बढ़ती महंगाई के चलते किसी चीज के भाव में कितना फर्क आया, इसे मापने के लिए कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स का प्रयोग किया जाता है. इसे आसान शब्दों में समझें तो किसी प्रॉपर्टी का भाव अगर 10 साल पहले 50 लाख रुपये था और अगर आज यह 1 करोड़ रुपये का हो गया है तो इसका यह मतलब नहीं हुआ कि इसे बेचने पर आपको 50 लाख का सीधा मुनाफा हुआ. ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले 10 साल में इंफ्लेशन भी बढ़ा है यानी कि 10 साल पहले रुपये की जो वैल्यू थी, वह आज घट गई है.

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एक उदाहरण से समझें इंडेक्स और कैसे यह बचाता है टैक्स

  • ऊपर के उदाहरण में आपने 10 साल पहले 2011-2012 में कोई प्रॉपर्टी 50 लाख में खरीदी थी जिसके भाव 2021-22 में एक करोड़ रुपये रुपये हो गए हैं. इस पर आपको 50 लाख रुपये का मुनाफा हुआ, जो लांग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)है और इस पर टैक्स चुकाना होगा. हालांकि अगर 50 लाख रुपये पर टैक्स कैलकुलेट करें तो आपको अधिक टैक्स चुकाना पड़ जाएगा. वहीं अगर कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स को देखें तो 2011-12 में यह 184 था और 2022-23 के लिए यह 331 है.
  • अब 2011-12 में इस प्रॉपर्टी की इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन निकालने के लिए (खरीद मूल्य*बिक्री वर्ष का इंडेक्स/खरीद वर्ष का इंडेक्स) फॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं. इस केस में इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन 89,94,565 रुपये (50,00,000* 331/184) होगा.
  • इस प्रकार कॉस्ट ऑफ इंडेक्सेशन के जरिए आपको 50 लाख रुपये की बजाय 10,05,435 रुपये (1 करोड़-89,94,565) पर टैक्स चुकाना होगा.

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हर साल जारी होता है कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स

महंगाई के चलते लोगों के खरीदने की क्षमता (पर्चेंजिग पॉवर) घट रही है. पर्चेजिंग पॉवर का मतलब है कि अगर आज 100 रुपये में किसी चीज के दो यूनिट्स खरीद पा रहे हैं तो आने वाले समय में सिर्फ एक ही चीज खरीद सकें यानी कि महंगाई के चलते पर्चेजिंग पॉवर घट हो रही है. इसी को मापने के लिए कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स (CII) का प्रयोग किया जाता है. पिछले वित्त वर्ष 2021-22 के लिए सीआईआई 317 है और इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) जारी करता है. हर साल के लिए इस वैल्यू को इनकम टैक्स की वेबसाइट पर देख सकते हैं.

वित्त वर्ष कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स
2001 – 02100
2002 – 03105
2003 – 04109
2004 – 05 113
2005 – 06117
2006 – 07122
2007 – 08 129
2008 – 09 137
2009 – 10 148
2010 – 11 167
2011 – 12184
2012 – 13 200
2013 – 14 220
2014 – 15 240
2015 – 16 254
2016 – 17 264
2017 – 18 272
2018 – 19280
2019 – 20 289
2020 – 21 301
2021 – 22 317
2022-23 331

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