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क्या है बैंक ओवरड्राफ्ट? RBI ने दी है इलेक्ट्रॉनिक कार्ड की सुविधा, लोन से कैसे अलग

इससे पहले बैंक बचत खाते/चालू खाते वाले ग्राहकों को तो डेबिट कार्ड जारी कर सकते थे. लेकिन नकदी क्रेडिट/ऋण खाता धारकों के लिए कार्ड जैसी कोई सुविधा नहीं थी.

April 28, 2020 6:05 PM
What is bank overdraft facility, difference between bank overdraft account and loan account, RBI permits banks to issue electronic cards to overdraft account holdersImage: Reuters

रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में बैंकों को ओवरड्राफ्ट (OD) खाते रखने वाले लोगों को इलेक्ट्रॉनिक कार्ड जारी करने की मंजूरी दी है. इससे पहले बैंक बचत खाते/चालू खाते वाले ग्राहकों को तो डेबिट कार्ड जारी कर सकते थे. लेकिन नकदी क्रेडिट/ऋण खाता धारकों के लिए कार्ड जैसी कोई सुविधा नहीं थी. लेकिन अब RBI के नए फैसले से बैंक ऐसे ओवरड्राफ्ट खाते रखने वाले लोगों को भी इलेक्ट्रॉनिक कार्ड जारी कर सकेंगे, जो एक तरह से पर्सनल लोन की तरह हैं और उस पर किसी विशिष्ट अंतिम उपयोग को लेकर कोई पाबंदी नहीं है.

RBI के सर्कुलर के मुताबिक, इस इलेक्ट्रॉनिक कार्ड का इस्तेमाल केवल ऑनलाइन सुविधाओं/कैशलेस लेनदेन तक ही सीमित रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नियंत्रण और जांच प्रक्रिया होगी. हालांकि नकद लेनदेन पर यह प्रतिबंध प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के साथ प्रदान की गई ओवरड्राफ्ट सुविधा पर लागू नहीं होगा.

क्या है बैंक ओवरड्राफ्ट और लोन से कैसे अलग?

पर्सनल लोन में बैंक एक निश्चित धनराशि एक निश्चित अवधि के लिए एक तय ब्याज दर पर ग्राहक को देते हैं. ग्राहक की लोन EMI तय होती है और जब तक लोन अवधि पूरी नहीं हो जाती, तब तक ग्राहक EMI का भुगतान करता रहता है.

पर्सनल लोन की प्रकृति वाले ओवरड्राफ्ट खाते को क्रेडिट लाइन लोन भी कहते हैं. इसमें भी बैंकों की ओर से ग्राहक के लिए एक निश्चित धनराशि लोन के तौर पर मंजूर होती है, लेकिन ग्राहक इस मंजूर धन​राशि में से अपनी जरूरत के बराबर का पैसा निकाल सकता है और उसे केवल उसी अमाउंट पर ब्याज का भुगतान करना होता है, जितना उसने इस्तेमाल किया है.

इसे एक उदाहरण से समझें. मान लीजिए किसी ने बैंक से 2 लाख रुपये का ओवरड्राफ्ट मंजूर कराया है. लेकिन उसने इसमें से केवल 25000 रुपये ही इस्तेमाल किए हैं. ऐसे में उसे केवल 25000 रुपये पर ही ब्याज का भुगतान करना होगा, न कि पूरे 2 लाख रुपये पर. ब्याज की कैलकुलेशन डेली बेसिस पर होगी और इसका भुगतान हर माह करना होगा.

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देनी होती है प्रोसेसिंग फीस

ओवड्राफ्ट में अंतिम उपयोग को लेकर कोई पाबंदी नहीं होती है. न ही इसे मंजूर कराते वक्त ट्रांजेक्शन की प्रकृति की पुष्टि करने की जरूरत होती है. हालांकि ओवरड्राफ्ट लोन्स पर भी प्रोसेसिंग फीस रहती है. ब्याज दर पर्सनल लोन के जैसी या उससे थोड़ी ज्यादा रह सकती है. पर्सनल लोन की प्रकृति वाले ओवरड्राफ्ट लोन बैंकों द्वारा सैलरी ओवरड्राफ्ट, होम लोन ओवरड्राफ्ट या रेगुलर ओवरड्राफ्ट के तौर पर जारी किए जाते हैं.

केवल देश के अंदर ही इस्तेमाल होगा इलेक्ट्रॉनिक कार्ड

केंद्रीय बैंक के सर्कुलर में कहा गया है कि कार्ड ग्राहक को दी गई सुविधा की वैधता से अधिक की अवधि के लिए जारी नहीं किया जाएगा. यह ऋणदाता के रूप में बैंकों के सामान्य अधिकारों के अधीन होगा. पर्सनल लोन की प्रकृति वाले ओवरड्राफ्ट खातों के लिए इस इलेक्ट्रॉनिक कार्ड का इस्तेमाल केवल देश के अंदर लेनदेन के लिए ही किया जा सकेगा.

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