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2021: स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को हेल्थ इन्फ्लुएंशर बनने की भी जरूरत, महामारी में मिली सीख के साथ इन पर होना चाहिए फोकस

नया साल 2021 शुरू हो चुका है. नए साल में एक नए सिरे और नए लक्ष्यों को लेकर शुरुआत के लिए हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री भी तैयार है.

January 2, 2021 11:58 AM
what health insurance companies needs to do in 2021, Insurance companies have to be health influencers in addition to financial protectorsकोविड19 ने लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस का महत्व समझाया.. Representative Image

नया साल 2021 शुरू हो चुका है. नए साल में एक नए सिरे और नए लक्ष्यों को लेकर शुरुआत के लिए हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री भी तैयार है. गुजरा साल 2020 बाकी सालों से अलग रहा. कोविड19 महामारी की वजह से इसे हमेशा याद रखा जाएगा. महामारी के दौर में स्वस्थ रहने पर लोगों का फोकस बढ़ा, जिसके चलते हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को मॉनेटरी और नॉन मॉनेटरी ग्रोथ अवसर देखने को मिले. कोविड19 ने लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस का महत्व समझाया.

2021 में इंडस्ट्री का फोकस लोगों के बीच हेल्थ इंश्योरेंस की पैठ बढ़ाने पर और लोग पर्याप्त रूप से इंश्योर हों, यह सुनिश्चित करने पर होना चाहिए. इंडस्ट्री को लोगों में हेल्थ कवर के फायदों को लेकर और ज्यादा जागरुकता पैदा करनी चाहिए, जो मौजूदा हालात के आधार पर उन्हें जरूरी और पर्याप्त स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराए. कंपनियों को सेगमेंट स्पेसिफिक प्रॉडक्ट्स, छोटे साइज के प्रॉडक्ट्स आदि की जरूरत को तलाशना चाहिए. 2021 में व्यक्ति और परिवार के लिए स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए दीर्घकालिक ​व्यावसायिक उद्देश्यों की जरूरत को भी तय करने की जरूरत है.

यह कहने की जरूरत नहीं है कि कस्टमाइजेशन बेनिफिट्स और ‘स्वास्थ्य पहले’ की अप्रोच के साथ टेक्नोलॉजिकल और डिजिटल एडवांसमेंट्स 2021 में भी अहम भूमिका निभाएंगे. 2020 में हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री ने अपने कामकाज के तरीकों में बदलाव को अपनाया और इस कदम ने इंडस्ट्री की ‘ग्राहक पहले’ की सोच को दर्शाया. यह आगे भी जारी रहेगी.

किन चीजों की अभी भी जरूरत

2020 ने हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को सीखने के पर्याप्त मौके दिए. ग्राहकों ने अपने हेल्थ इंश्योरेंस कवर के जरिए आश्वासन और संतुष्टि की मांग की. इस स्थिति ने इंडस्ट्री को महामारी के दौरान सीख लेने और खुद को बेहतर बनाने का मौका दिया. इंडस्ट्री के समक्ष जो सीख सामने आईं, वे इस तरह हैं…

  • हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को ‘इंश्योरेंस’ से पहले ‘स्वास्थ्य’ को महत्व देना चाहिए, इसकी जरूरत सामने आई. इंश्योरेंस कंपनियों को ग्राहकों के​ लिए फाइनेंशियल प्रोटेक्टर बनने के साथ-साथ हेल्थ इन्फ्लुएंशर बनने की भी जरूरत है.
  • आंतरिक प्रक्रियाओं को टेक्नोलॉजी इनेबल्ड होना चाहिए ताकि ग्राहकों को परेशानी रहित और लगातार जारी रहने वाली सर्विस उपलब्ध कराई जा सके.
  • पॉलिसी धारकों के लिए सर्विसेज के डिजिटाइजेशन और कस्टमाइजेशन की जरूरत है.
  • इंश्योरेंस और टेक्नोलॉजी (Insurtech) के बीच साझेदारी बेहद जरूरी है. Insurtech ने टेक्नोलॉजी की मदद से इंडस्ट्री की मदद की और विभिन्न पहलुओं पर सुविधा उपलब्ध कराई, जैसे कि डिस्ट्रीब्यूशन, दावों का निपटान, सर्विसिंग, एनालिटिक्स आदि. Insurtech वेंचर्स के बढ़ने से हेल्थ इंश्यारेंस इंडस्ट्री को बोट फैसिलिटी, वॉइस बोट्स और वॉट्सऐप पर हेल्थ इंश्योरेंस आदि सुविधाओं की पेशकश करने में मदद मिली.
  • रिमोट वर्किंग ने लागत में बचत के साथ-साथ कई फायदे कराए. हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री महिला कर्मचारियों, आउटस्टेशन इंप्लॉइज, शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहे इंप्लॉइज आदि जैसे वर्कफोर्स तक पहुंच बनाने में सक्षम बना.

क्या नए नॉर्म जरूरी

डिजिटाइजेशन और कस्टमाइजेशन नए नॉर्म बन चुके हैं और इन्हें हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री की लगभग कंपनियों ने अपना लिया है. यह चलन आगे भी जारी रहेगा. ई-फार्मेसी और टेलिमेडिसिन जैसी सर्विस पेशकशों के जरिए और बेहतर अवसर मौजूद हैं, जिन्हें 2021 में तलाशा जाएगा. डिजिटलाइजेशन और कस्टमाइजेशन के अलावा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को कस्टमर के साथ और ज्यादा जुड़ाव पैदा करना होगा. उदाहरण के तौर पर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के जरिए ओपीडी कवरेज को नया नॉर्म बनाया जाना चाहिए.

इन उपायों से हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट में विश्वास और मजबूत करने में मदद मिलेगी और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां हेल्थ इन्फ्लुएंशर्स के तौर पर काम कर ग्राहकों को उनकी स्थिति को मैनेज करने में मदद कर सकेंगी. यह ग्राहकों को और कंपनियों दोनों के लिए फायदेमंद होगा. इसके अलावा फ्रॉड को पहचानने में मदद करने वाले और दावों का बेहतर प्रबंधन करने वाले सिस्टम स्थापित करने को भी नया नॉर्म बनाना चाहिए.

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गुजरे साल के नए ट्रेंड और शिफ्ट

2020 इनोवेशन का साल रहा. हेल्थ इंश्यारेंस इंडस्ट्री ने गुजरे साल में डिजिटल रिमॉडलिंग, कॉन्टैक्टलेस सेल्स और ग्राहकों को संतुष्टि देने वाली सर्विस पर अधिक ध्यान दिया. आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस बेस्ड वॉइस असिस्टेंट्स, फोन ऐप्स और चैटबोट जैसे डिजिटल टेक्नोलॉजी एडवांसमेंट चलन में आए. कई कंपनियां इन नई टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रही हैं. ग्राहकों के साथ बातचीत करने के मौजूदा मॉडल की जगह नया बेहतर तरीका ले रहा है, जहां इंश्योरेंस एजेंट्स महामारी के चलते लागू प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए ग्राहकों से बातचीत कर सकें और उन्हें उत्पाद बेच सकें. इस अपग्रेड ने हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को प्रॉडक्ट डिस्ट्रीब्यूशन और नए प्रॉडक्ट्स की लॉन्चिंग के लिए संभावित नए ट्रेंड्स तलाशने की इजाजत दी.

पहले हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट 30 से 50 साल के आयु वर्ग में सीमित था. 2020 में इसके दायरे में ज्यादा युवा लोग भी आए. यह शिफ्ट आंशिक तौर पर महामारी से संबंधित चिंता के कारण हो सकता है. लेकिन जागरुकता, ज्ञान और जरूरतों की स्पष्ट समझ जरूरी है जो कि अधिक युवा ग्राहकों द्वारा दर्शाई गई. हेल्थ इंश्योरेंस को अब केवल संकट के समय के लिए प्रॉडक्ट के तौर पर नहीं देखा जाता है बल्कि यह जरूरत बन गया है.

सामने आईं नई चुनौतियां

2020 से पहले लोग रोजमर्रा की जिंदगी जैसे जी रहे थे, कोविड19 महामारी ने उस पर एक बड़ा डर पैदा कर दिया. इस स्थिति ने मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहने को लेकर चुनौतियां पैदा कीं. घर पर या एक कमरे में रहकर काम करने के नए सामान्य में केबिन फीवर एक बड़ी चिंता बनकर उभरी. इसे देखते हुए हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री ने कई पहलें कीं, जो ग्राहकों को घर पर रहकर ही उनके स्वास्थ्य लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करें. मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई और पॉलिसीधारकों को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में सहयोग करने वाली सर्विसेज उपलब्ध कराई गईं.

Article By: मयंक अग्रवाल, CEO, आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस

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