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How To Fill a Cheque: चेक से लेन-देन में छोटी गलती पड़ेगी भारी, ये 7 Tips आएंगे आपके काम

चेक से लेन देन जितना आसान है, उतना ही सुरक्षित, लेकिन इसमें कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है.

December 5, 2018 9:48 PM
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How To Fill a Cheque: डिजिटल पेमेंट के इस दौर में कैश के अलावा पेमेंट के दूसरे विकल्प मसलन नेट बैंकिंग, कार्ड पेमेंट, चेक, ड्राफ्ट आदि का इस्तेमाल बढ़ा है. चेक से लेन देन जितना आसान है, उतना ही सुरक्षित, लेकिन इसमें कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. अगर चेक से लेन-देन करना हो तो जल्‍दबाजी में चेक के साथ की गई लापरवाही नुकसान की वजह बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि सावधानी से काम लिया जाए. जानते हैं कि चेक से ट्रान्‍जैक्‍शन करते वक्‍त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

Account Payee/Bearer

अगर आप किसी के बैंक अकाउंट में सीधे पेमेंट करना चाहते हैं तो चेक पर अकाउंट पेई डालना न भूलें. इसके लिए चेक के लेफ्ट (बायीं) ओर टॉप कॉर्नर पर डबल क्रॉस लाइन के बीच A/C Payee लिखा जाता है. यह चेक को सुरक्षित बनाता है और बेनेफिशियरी को ही इसका भुगतान होता है. इसे तुरंत भुनाया नहीं जा सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि चेक खोने की स्थिति में कोई जालसाज खुद को टार्गेट पर्सन बताकर उसके बदले कैश नहीं ले सकता है. अकाउंट पेई करते वक्‍त चेक पर राइट (सीधी) साइड में लिखे बीयरर को काट दें. वहीं अगर चेक कैश करने के लिए दे रहे हैं तो लेफ्ट टॉप कॉर्नर पर अकाउंट पेई साइन न बनाएं.

बेनेफिशियरी का नाम

चेक पर बेनेफिशियरी का नाम लिखते समय यह ध्यान देना जरूरी है कि नाम की स्पेलिंग सही लिखी हो. स्पेलिंग वही होनी चाहिए, जो उसके बैंक अकाउंट में है. इसमें गड़बडी होने पर परेशानी हो सकती है.

Cheque Date

चेक पर डाली गई डेट यानी तारीख एक महत्वपूर्ण फैक्ट है. Negotiable Instruments Act के अनुसार किसी भी चेक की मियाद उस पर डाली गई डेट के अनुसार तय होती है. वर्तमान में प्रावधान है कि चेक पर डाली गई तारीख के बाद से 3 महीने तक वह चेक वैलिड माना जाता है. यानी इसी अवधि में डिपॉजिट या विदड्रॉ करना होता है. इस अवधि के बाद ऐसा करने पर चेक आपके काम नहीं आएगा और आपको नुकसान झेलना पड़ेगा. चेक पर तारीख डालने में अगर कोई गलती हो जाए तो उसे ओवरराइट करने की बजाय दूसरे चेक इस्‍तेमाल करना बेहतर रहेगा.

चेक राशि के लिए शब्दों और अंकों का प्रयोग

जब भी किसी को चेक से पेमेंट किया जाता है तो राशि को 2 बार यानी एक बार शब्दों में और एक बार अंकों में लिखा जाता है. ध्यान रहे कि शब्दों और डिजिट के बीच ज्यादा न हो. ज्‍यादा स्‍पेस होने से अमांउट में छेड़छाड़ होने की गुंजाइश होती है. चेक कर लें कि जो अमाउंट शब्‍दों में भरा है, वहीं अमाउंट फिगर्स यानी अंकों में भी हो. बैंक चेक को तभी स्‍वीकार करेंगे जब दोनों तरह से अमाउंट मैच होगा. राशि अंकित करने के बाद /- ,oo का इस्तेमाल करें.

चेक पर हस्ताक्षर

जब भी चेक साइन करें तो याद रखें कि आपको वैसे ही साइन करने हैं, जैसे संबंधित बैंक ब्रांच रिकॉर्ड में हैं. कई लोग अलग-अलग बैंकों के लिए अलग-अलग साइन रखते हैं. अगर आपने भी ऐसा किया हुआ है तो साइन करते वक्‍त सावधानी जरूर बरतें वर्ना चेक रिजेक्‍ट हो जाएगा.

नीचे सफेद पट्टी पर कुछ न लिखें

नीचे की ओर सफेद पट्टी पर कुछ न लिखें, क्योंकि उस पर बैंक का IMCR कोड और चेक नंबर लिखा होता है, जो उस चेक की पहचान है.

अपना बैलेंस चेक कर लें

चेक पर अमाउंट भरते समय पहले अकाउंट में बैलेंस देख लें. बैलेंस से ज्यादा अमाउंट भरने पर चेक बाउंस हो जाता है, जिस पर पेनल्टी लगती है.

(नोट: इसके लेखक राजेश अरोड़ा चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं.)

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