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Investment Tips :बैंक एफडी के कम ब्याज से परेशान हैं तो सीनियर सिटिजन्स यहां लगाएं पैसा, सुरक्षा की पूरी गारंटी और महंगाई को भी मिलेगी मात

अपने रिटायर्ड फंड या पेंशन पर निर्भर बुजुर्गों के लिए अभी भी कुछ ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स हैं, जो उन्हें बेहतर रिटर्न दे सकते हैं. ये इंस्ट्रूमेंट्स उन्हें बढ़ती महंगाई से सुरक्षा दे सकते हैं.

August 7, 2021 1:58 PM
सीनियर सिटिजन्स के लिए बेहतर रिटर्न के कई विकल्प मौजूद हैं.

Senior citizen savings Schemes :  अपनी रिटायरमेंट इनकम पर निर्भर सीनियर सिटिजन (Senior citizen ) के लिए बैंक एफडी (Bank FD)   की कम ब्याज दरें और महंगाई दोहरी मार की तरह है. महंगाई दर ( Inflation Rate) बैंक एफडी और ऐसे ही फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स पर मिलने वाले इंटरेस्ट को बेअसर कर देती है. आजकल बैंक एफडी पर 6 से 7 फीसदी का ब्याज मिल रहा है. जबकि महंगाई दर छह फीसदी है. लिहाजा रिटर्न कभी-कभी निगेटिव हो जाता है. ऐसे में सीनियर सिटिजन्स क्या करें? अपने रिटायर्ड फंड या पेंशन पर निर्भर बुजुर्गों के लिए अभी भी कुछ ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स हैं, जो उन्हें बेहतर रिटर्न दे सकते हैं. आइए देखते हैं ऐसे कौन से इंस्ट्रूमेंट्स हैं जो बैंक एफडी से ज्यादा ब्याज दे रहे हैं और जिनमें निवश से रिटायर्ड निवेशकों की अच्छी कमाई हो सकती है.

फ्लोटिंग  रेट आरबीआई बॉन्ड

ये बॉन्ड्स आरबीआई जारी करता है और इनकी ब्याज दर नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) पर मिलने वाले इंटरेस्ट रेट से लिंक होती है. बॉन्ड पर इंटरेस्ट दो बार, यानी साल में 1 जनवरी और 1 जुलाई को मिलता है. वर्ष 2021 की पहली छमाही के दौैरान ब्याज दर 7.15 फीसदी तय की  गई है. अगली छमाही के लिए अभी दर तय नहीं हुई है. हर छमाही पर ब्याज दर तय की जाती है. इन बॉन्ड्स की अवधि सात साल की होती है. लेकिन इन पर मिलने वाले ब्याज पर इनकम टैक्स लगता है.

सीनियर सिटिजन्स सेविंग्स स्कीम ( SCSS)

लगभग सभी बैंक सीनियर  सिटिजन सेविंग्स स्कीम ( Senior citizen savings Schemes) के तहत ज्यादा ब्याज देते हैं. इन स्कीम्स के तहत एफडी पर 7.4 फीसदी तक का सालाना ब्याज मिल सकता है. हर डिपोजिटर इसमें अधिकतर डेढ़ लाख रुपये तक  जमा कर सकता है. ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है और इस पर पूरी तरह टैक्स लगता है. अगर साल में ब्याज आय 50 हजार रुपये से अधिक है तो टीडीएस कटेगा.

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 क्रेडिट रिस्क फंड्स

कुछ ऐसे म्यूचुअल फंड्स होते हैं, जिन्हें क्रेडिट रिस्क फंड्स कहा जाता है.  ये फंड्स अमूमन ऐसे डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं, जिनकी रेटिंग  बहुत ज्यादा नहीं होती. लेकिन इनमें रिटर्न ज्यादा होता है. लेकिन ऐसे फंड्स में निवेश करने से पहले यह ध्यान रखना होता है कि इसका क्रेडिट रिस्क क्या है. कई बार ये फंड्स जिन कंपनियों में पैसा लगाते हैं वे उनका मूलधन या ब्याज नहीं लौटा पाते हैं. ऐसे में इन फंड्स का पैसा वहां फंस जाता है. इन फंड्स के साथ इस तरह की समस्या आती है. इसलिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये किन कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं और वहां कितना जोखिम हो सकता है. पिछले एक साल में ऐसे क्रेडिट रिस्क फंड्स ने 8.12 फीसदी का रिटर्न दिया है. इसमें निवेश के जरिये मिला रिटर्न तीन साल के बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स माना जाता है और इसमें इंडेक्सेशन के बाद 20 फीसदी टैक्स लगता है. इससे काफी हद तक टैक्स देनदारी कम हो जाती है.

 

 

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