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Income Tax: इन 5 ऑप्शन पर नए ​टैक्स सिस्टम में नहीं मिलेगी छूट, फिर भी इनमें निवेश क्यों है फायदेमंद

नई टैक्स व्यवस्था में भले ही इन पर टैक्स बेनेफिट नहीं मिल रहा, लेकिन इनमें निवेश करने पर बड़ा फायदा मिलता है.

Updated: Feb 16, 2020 9:08 AM
these five investment options are not included in new tax regime but are important public provident fund national pension scheme sukanya samridhi yojana health insurance ELSSनई टैक्स व्यवस्था में भले ही इन पर टैक्स बेनेफिट नहीं मिल रहा, लेकिन इनमें निवेश करने पर बड़ा फायदा मिलता है.

Best Investment Options in New Tax System: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट में आयकरदाता को इनकम टैक्स के मोर्चे पर राहत दी. बजट में नई टैक्स व्यवस्था का एलान किया गया. नई टैक्स व्यवस्था में 5 से 7.5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर इनकम टैक्स रेट को घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है. 7.5 लाख से 10 लाख रुपये तक की सालाना इनकम वालों के लिए आयकर की दर को 15 फीसदी कर दिया गया है. इसके अलावा 10-12.5 लाख रुपये तक की आय वालों पर अब 20 फीसदी और 12.5 लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक की आय वालों पर 25 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा. 15 लाख से ज्यादा की आय पर टैक्स रेट 30 फीसदी रहेगी.

लेकिन इस नए टैक्स स्लैब के साथ सरकार ने एक शर्त भी रखी है. शर्त यह है कि नया टैक्स स्ट्रक्चर आयकरदाताओं के लिए वैकल्पिक होगा. नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने वाले आयकरदाता आयकर कानून के चैप्टर VI-A के तहत मिलने वाले टैक्स डिडक्शन और एग्जेंप्शन का फायदा नहीं ले पाएंगे. यानी नए टैक्स स्ट्रक्चर को चुनने वाले स्टैंडर्ड डिडक्शन, होम लोन, एलआईसी, हेल्थ इंश्योरेंस आदि निवेश विकल्पों में निवेश नहीं कर सकेंगे. ऐसे में माना जा रहा है कि लोगों का स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश घटेगा. लेकिन ऐसी कुछ स्कीम्स हैं जिनमें निवेश लोगों के लिए महत्वपूर्ण है. नई टैक्स व्यवस्था में भले ही इन पर टैक्स बेनेफिट नहीं मिल रहा, लेकिन इनमें निवेश करने पर बड़ा फायदा मिलता है.

1. इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS)

ELSS को मार्केट में बेस्ट इन्वेस्टमेंट इन्स्ट्रूमेंट में से एक माना जाता है. इसकी वजह है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न देने की संभावना होती है. ELSS के तहत आपके द्वारा इन्वेस्ट किए पैसे को म्यूचुअल फंड कंपनियां शेयर मार्केट में लगाती हैं, जो विभिन्न सेक्टर्स के होते हैं. आम तौर पर फंड का मिनिमम 80 फीसदी इक्विटी और उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है.

हालांकि कोई भी इक्विटी रिटर्न गांरटीड नहीं है, लेकिन पिछले 5 साल में इक्विटी म्यूचुअल फंड सेग्मेंट में इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम (ELSS) के रिटर्न देखें तो निवेशकों को अलग अलग फंड में 14.71 फीसदी सीएजीआर के हिसाब से रिटर्न मिला है. टॉप रिटर्न देने वाले फंड की बात करें तो यहां 5 साल में ही 1 लाख के रुपये के 2 लाख रुपये बन गए. यानी 5 साल में निवेशकों का पैसा डबल हो गया.

2. नेशनल पेंशन स्कीम (NPS)

रिटायरमेंट के बाद भी आपको नियमित आय होती रहे, इसके लिए रिटायरमेंट प्लानिंग बहुत जरूरी है. अलग-अलग जगह निवेश कर आप आज से ही अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं. रिटायरमेंट प्लानिंग के लिहाज से निवेश का एक अच्छा विकल्प नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) है. नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) को जनवरी 2004 में सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू किया गया था. इसे 2009 में सभी कैटगरी के लोगों के लिए खोल दिया गया.

कोई भी व्यक्ति अपने कामकाजी जीवन के दौरान पेंशन खाते में नियमित रूप से योगदान दे सकता है. इकठ्ठा हुई धन राशि के एक हिस्से को वह एक बार में निकाल भी सकता है और बची हुई राशि का इस्तेमाल रिटायरमेंट के बाद नियमित आय प्राप्त करने के लिए कर सकता है. व्यक्ति के निवेश और उस पर मिलने वाले रिटर्न से NPS खाता बढ़ता है. इस स्कीम में केंद्रीय सरकार के कर्मचारी, राज्य सरकार के कर्मचारी, निजी क्षेत्र के कर्मचारी और आम नागरिक निवेश कर सकते हैं.

3. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)

अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लोग पब्लिक प्रोविडेंट फंड में निवेश करते हैं. भविष्य के लिए तय किए गए अपने लक्ष्य को हासिल करने या रिटायरमेंट के लिए पीपीएफ में निवेश कर किया जा सकता है. कोई भी व्यक्ति पोस्ट ऑफिस यानी डाक घर या बैंक में यह अकाउंट खुलवा सकता है. अभी पीपीएफ स्कीम पर 7.9 फीसदी सालाना ब्याज दर लागू है.पीपीएफ अकाउंट 15 साल में मैच्योर हो जाता है.

खाता धारकअगले पांच साल के अकाउंट को आगे बढ़ा सकता है और इसमें डिपॉजिट जारी रख सकता है. इसका एक फायदा यह भी है कि इसमें जरूरत के वक्त लोन ​लेने की उपलब्धता भी है. आप पीपीएफ अकाउंट पर लोन भी ले सकते हैं. इसके एवज में आपको कुछ गिरवीं नहीं देना होता और ब्याज दर भी कम रहती है. इसके अलावा लोन को चुकाना भी आसान रहता है.

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4. सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)

अगर आप अपनी बेटी के भविष्य के लिए निवेश प्लान तलाश रहे हैं तो सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) एक अच्छा विकल्प हो सकता है. बेटी की पढ़ाई या शादी के लिए पैसे इकट्ठा करने के लिए इसमें निवेश कर सकते हैं. बैंक और पोस्ट ऑफिस में जाकर कोई भी व्यक्ति या कानूनी अभिभावक 10 साल से कम उम्र की बेटियों के लिए यह अकाउंट खुलवा सकता है.

एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये का निवेश किया जा सकता है. इसमें लड़की के कानूनी अभिभावक या माता-पिता अकाउंट खोल सकते हैं. इस अकाउंट को जन्म की तिथि से 10 साल तक खोला जा सकता है. अकाउंट को 21 साल पूरे होने के बाद बंद कर सकते हैं. अकाउंट होल्डर के 18 साल की उम्र होने के बाद आंशिक रुप से अधिकतम बैलेंस की 50 फीसदी राशि निकाली जा सकती है.

5. हेल्थ इंश्योरेंस

किसी अप्रत्याशित परिस्थिति जैसे किसी मेडिकल इमरजेंसी या विकलांगता के दौरान आर्थिक सहायता प्रदान करना है. यदि आपने कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं लिया है तो अचानक कोई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या उत्पन्न हो जाने पर आपका सारा पैसा खर्च हो सकता है. ऐसे में सभी लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस कवर लेना जरूरी है.

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