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डिविडेंड इनकम पर TDS: अगर आपके पास टैक्सेबल इनकम नहीं है, तो कैसे मिलेगी राहत ?

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) के हटने के बाद, निवेशकों के पास मौजूद डिविडेंड इनकम टैक्सेबल हो गई है.

April 13, 2021 7:45 PM
TDS if you do not have taxable income how to get reliefडिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) के हटने के बाद, निवेशकों के पास मौजूद डिविडेंड इनकम टैक्सेबल हो गई है.

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) के हटने के बाद, निवेशकों के पास मौजूद डिविडेंड इनकम टैक्सेबल हो गई है. इसकी वजह से इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 194 के तहत डिविडेंड पेआउट पर टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) लागू होता है. उसी के मुताबिक, एक वित्त वर्ष में पांच हजार से ज्यादा की डिविडेंड इनकम पर 10 फीसदी TDS लागू होगा, अगर निवेशक का पैन उपलब्ध है. अगर पैन उपलब्ध नहीं है, तो TDS दर 20 फीसदी होगी.

TDS की डिटेल्स अब फॉर्म 26AS पर उपलब्ध

डिविडेंड इनकम और TDS की डिटेल्स अब फॉर्म 26AS के नए फॉर्मेट पर उपलब्ध होंगी, जिससे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना आसान होगा और आय को दबाना मुश्किल हो जाएगा. हालांकि, अगर व्यक्ति के पास केवल 2.5 लाख रुपये की डिविडेंड इनकम है या कुल इनकम, जिसमें डिविडेंड इनकम शामिल है, टैक्सेबल नहीं है, तो इनकम का रिटर्न फाइल करना जरूरी बन जाएगा. इसकी वजह टैक्स डिडक्शन और डिविडेंड इनकम पर चार्ज TDS को टैक्स रिफंड के तौर पर वापस क्लेम करना है.

अच्छी खबर यह है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तरह, आप अब फॉर्म 15G (60 साल तक की उम्र वाले व्यक्ति) या फॉर्म 15H (वरिष्ठ नागरिकों के लिए) भी जमा कर सकते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि आपकी डिविडेंड इनकम पर कोई TDS चार्ज नहीं हो, अगर वित्त वर्ष में कुल आय 2.5 लाख के आंकड़े के पार नहीं है.

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शेयरों पर डिविडेंड के लिए, कोई व्यक्ति फॉर्म 15G या फॉर्म 15H, जो उपयुक्त हो, उसे सीधे कंपनी में जमा कर सकता है. म्यूचुअल फंड स्कीम्स पर डिविडेंड पेआउट ऑप्शन के मामले में, उपयुक्त फॉर्म को सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) या उनके रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) जैसे CAMS और KFintech (कार्वी की ब्रांच) के पास सब्मिट किया जा सकता है.

उपयुक्त फॉर्म 15G या फॉर्म 15H को कंपनियों, AMCs या RTAs की साइट पर जाकर ऑनलाइन सब्मिट किया जा सकता है. अपने RTAs के जरिए MF स्कीम्स के लिए अप्लाई करने की स्थिति में, जो डिटेल्स डालनी होंगी, वे हैं- पैन, फंड हाउस (AMC) का नाम, फोलियो नंबर आदि.

अगर आपकी कुल इनकम टैक्सेबल नहीं है और IDCW इसका हिस्सा है, आपको जल्दी फॉर्म 15G/H को सब्मिट करना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर, एक बार आपको उस पर TDS अप्लाई होने के बाद, डिविडेंड मिलने पर अपना आईटीआर फाइल करना होगा.

(Story: Amitava Chakrabarty)

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