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Tax Saving: अभी से शुरू करें प्लानिंग, नौकरीपेशा इन 9 तरीकों से बचा सकते हैं टैक्स

Tax Saving Options For Salaried People: हर वित्त वर्ष के आखिरी महीने में कई लोग टैक्स बचाने के लिए विकल्प देखते हैं लेकिन आखिरी मौके पर जल्दबाजी में कई बार गलतियां हो जाती है.

April 28, 2021 12:52 PM
Tax Saving Options for Salaried Know all about how salaried individuals can save tax maximallyसैलरीड लोगों के पास टैक्स बचाने के कई तरीके हैं.

Tax Saving Options For Salaried People: नया वित्त वर्ष का पहला महीना खत्म होने वाला है. हर वित्त वर्ष के आखिरी महीने में कई लोग टैक्स बचाने के लिए विकल्प देखते हैं लेकिन आखिरी मौके पर जल्दबाजी में कई बार गलतियां हो जाती है. इन गलतियों के चलते कभी-कभी निवेश पर कम रिटर्न मिलता है और कई बार तो वित्तीय बोझ बढ़ जाता है. ऐसे में अभी से ही टैक्स प्लानिंग करनी जरूरी है. वेतनभोगी लोगों की बात करें तो उनके पास टैक्स बचाने के लिए कई विकल्प हैं जिसमें एनपीएस, पीपीएफ, ईएलएसएस. एचआरए और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे विकल्प प्रमुख हैं. सैलरीड पर्सन आयकर अधिनियम 1961 के किए गए प्रावधानों के तहत आयकर बचा सकते हैं.

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टैक्स बचाने के लिए बेहतरीन विकल्प

  • Employees’ Provident Fund (EPF) : सैलरीड पर्सन के बीच टैक्स बचाने के लिए ईपीएफ बहुत प्रचलित तरीका है. इस स्कीम के तहत एंप्लाई और एंप्लॉयर्स दोनों एंप्लाई की सैलरी का 12 फीसदी एंप्लाई प्रोविडेंट फंड में कांट्रिब्यूट करते हैं. इस पर एंप्लाई को एक विशेष दर पर ब्याज मिलता है जिसे केंद्र सरकार निर्धारित करती है. सेक्शन 80 सी के तहत ईपीएफ में जितनी राशि ( अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये) कांट्रिब्यूट की जाती है, उस पर टैक्स डिडक्शन का लाभ मिलता है. इसके अलावा 2.5 लाख रुपये तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा और फंड कॉर्पस पर भी कोई टैक्स नहीं चुकाना होता है.
  • Public Provident Fund (PPF): सैलरीड पर्सन के लिए पीपीएफ बहुत बेहतरीन विकल्प है. इसके जरिए रिटायरमेंट के लिए कॉर्प्स और गारंटेड रिटर्न सुनिश्चित किया जा सकता है. पीपीएफ में किए गए योगदान पर टैक्स डिडक्शन का लाभ मिलता है और ब्याज के साथ अक्यूम्यलैटिड अमाउंट पर भी टैक्स नहीं चुकाना होता है यानी पीपीएफ निवेशकों को तिहरा फायदा देता है.
  • Equity Linked Savings Scheme (ELSS): सैलरीड इंडिविजुअल्स के लिए ईएलएसएस बेहतरीन टैक्स सेविंग विकल्पों में एक है. इस स्कीम के तहत किए गए निवेश पर आयकर अधिनियम के सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन (अधिकतम 1.5 लाख रुपये) का लाभ मिलता है. इस पर तुलनात्मक रूप से अधिक रिटर्न मिलता है क्योंकि यह इक्विटी से लिंक्ड सेविंग्स स्कीम है. यह ऐसा म्यूचुअल फंड है जिस पर टैक्स बेनेफिट्स मिलता है.
  • National Pension Scheme (NPS): लांग टर्म सेविंग ऑप्शंस की बात करें तो सैलरीड लोगों के बीच एनपीएस बहुत प्रचलित है. जो लोग जल्द रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं और उनकी रिस्क लेने की क्षमता कम है, अधिकतर एनपीएस को प्रमुखता देते हैं. पीपीएफ और फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में एनपीएस पर अधिक रिटर्न मिलता है लेकिन इसमें टैक्स का अधिक फायदा नहीं मिलता है. सैलरीड इंडिविजुअल्स सेक्शन 80 सीसीडी (1) के तहत बेसिक सैलरी के 10 फीसदी के बराबर कांट्रिब्यूशन पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं. हालांकि इसके तहत डिडक्शन की सीमा सेक्शन 80 सीसीई के तहत 1.5 लाख रुपये निर्धारित है यानि कि सालाना बेसिक सैलरी के 10 फीसदी के बराबर कांट्रिब्यूशन पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं लेकिन यह राशि सालाना 1.5 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती है.
  • Tax Saving FD: सैलरीड लोगों के बीच टैक्स सेविंग एफडी भी पॉपुलर है. यह एफडी का ऐसा विकल्प है जिसके तहत टैक्स भी बचाया जा सकता है. इसमें किए गए 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं. इसमें 5 साल का लॉक इन पीरियज होता है जिसके चलते सैलरीड एंप्लाईज के लिए यह सुरक्षित विकल्प है. इसमें निवेश पर मिलने वाला रिटर्न सुरक्षित तो है लेकिन टैक्सेबल है. इसे आईटीआर में अन्य स्रोत से हुई आय के तौर पर दिखाना होता है और एप्लीकेबल दरों पर टैक्स चुकाना होता है.
  • Life Insurance: अनिश्चितता भरे माहौल में अपने परिजनों को वित्तीय सुरक्षा देकर भी टैक्स बचत की जा सकती है. जीवन बीमा खरीदकर न सिर्फ परिवार की वित्तीय जरूरतों को सुरक्षित किया जा सकता है बल्कि टैक्स बेनेफिट्स भी हासिल किया जा सकता है. सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक के प्रीमियम पर सालाना टैक्स बचा सकते हैं. इसके अलावा डेथ बेनेफिट्स या सर्वाइवल बेनेफिट्स भी सेक्शन 10(10डी) के तहत टैक्स एग्जेंप्टेड है.
  • Health Insurance Premium: दिनोदिन स्वास्थ्य सेवाएं महंगी होती जा रही हैं. ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस जरूर लेना चाहिए. हेल्थ इंश्योरेंस के जरिए न सिर्फ आकस्मिक रूप से आने वाले खर्चों की भरपाई हो सकती है बल्कि टैक्स बेनेफिट्स भी हासिल कर सकते हैं. हेल्थ इंश्योरेंस के लिए चुकाए गए प्रीमियम पर सेक्शन 80डी के तहत टैक्स डिडक्शन का फायदा ले सकते हैं. इस प्रावधान के तहत अपने जीवनसाथी, निर्भर बच्चे और माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर भी टैक्स बेनेफिट्स ले सकते हैं. सेक्शन 80डी के तहत अधिकतम 1 लाख रुपये का डिडक्शन ले सकते सकते हैं.
  • House Rent Allowance (HRA): एंप्लाई के सैलरी स्ट्रक्चर में एक हिस्सा हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) का होता है. जो लोग किराए के मकान में रह रहे हैं, वे टैक्स बेनेफिट्स ले सकते हैं. आयकर अधिनियम के तहत अगर कोई सैलरीड एंप्लाई किराए के मकान में रह रहा है तो सेक्शन 10 (13ए) के तहत टैक्स बेनेफिट्स लिया जा सकता है. टैक्सेबल इनकम को टोटल इनकम में से एचआरए घटाकर कैलकुलेट किया जाता है. हालांकि अगर आप आपने खुद के घर में रह रहे हैं और कोई किराया नहीं चुका रहे हैं तो एचआरए पर टैक्स चुकाना पड़ेगा.
  • Retirement Benefits (Gratuity): टैक्स बचाने के लिए ग्रेच्यूटी भी एक विकल्प है. यह कर्मियों के सेवानिवृत्ति, इस्तीफा, मृत्यु या विकलांगता के समय दी जाने वाली राशि है. यह राशि तभी मिलती है, जब कर्मी किसी एक कंपनी में कम से कम 5 साल नौकरी कर चुका है. ग्रेच्यूटी के रूप में मिली 20 लाख रुपये तक की राशि पर सेक्शन 10(10) के तहत टैक्स एग्जेंप्शन मिलता है.

(सोर्स: मैक्स लाइफ इंश्योरेंस)

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