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1 करोड़ से ज्यादा की कैश निकासी पर 2% TDS, बदल गए टैक्स से जुड़े 5 नियम

वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पेश किए गए पूर्णकालिक बजट में कई एलान हुए. इनमें से कुछ एलान अमल में आ चुके हैं.

September 1, 2019 1:35 PM
tax rules changes that will come into effect from 1 september 2019Image: Reuters

वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पेश किए गए पूर्णकालिक बजट में कई एलान हुए. इनमें से कुछ एलान अमल में आ चुके हैं. वहीं कुछ का अमल में आना अभी बाकी है. इनमें टैक्स से जुड़े कुछ नए नियम भी शामिल हैं, जो 1 सितंबर 2019 से लागू हो रहे हैं. आइए जानते हैं इन बदलावों और इनके आम लोगों पर पड़ने वाले असर के बारे में…

प्रॉपर्टी खरीद के मामले में

1 सितंबर से अचल संपत्ति की खरीद के लिए किए गए भुगतान से TDS काटने के लिए कुछ अन्य चार्जों को भी कंसीडरेशन में लेना होगा. इनमें संपत्ति की खरीद के साथ क्लब की सदस्यता, कार पार्किंग शुल्क, बिजली या जलापूर्ति सेवाओं का भुगतान, रख—रखाव शुल्क समेत अन्य तरह के शुल्क शामिल हैं.

1 करोड़ से ज्यादा की कैश निकासी पर TDS

1 सितंबर से एक साल के अंदर बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक या पोस्ट ऑफिस में से एक खाते या कई खातों से कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये से ज्यादा कैश निकालने पर 2 फीसदी टीडीएस वसूला जाएगा. यह टैक्सपेयर की कुल टैक्स देनदारी में समायोजित किया जाएगा.

कॉन्ट्रैक्टर और पेशेवरों को भुगतान पर TDS

सरकार ने कर दायरा बढ़ाने के लिए ठेकेदारों या पेशेवरों को एक साल में 50 लाख रुपये सालाना से अधिक का भुगतान करने वाले व्यक्ति/HUF के लिए 5 प्रतिशत की दर से स्रोत पर कर कटौती (TDS) अनिवार्य कर दी है. यह नियम 1 सितंबर 2019 से लागू हो रहा है. इसके तहत TDS की राशि को व्यक्ति अपने स्थायी खाता संख्या (PAN) के माध्यम से सरकारी खजाने में जमा करा सकेगा. मौजूदा समय में जिस व्यक्ति या हिंदू संयुक्त परिवार (HUF) का कारोबार या पेशा ऑडिट के दायरे में नहीं आता है, उसे निजी उपभोग के लिए किसी स्थायी ठेकेदार या पेशेवर की सेवा का भुगतान करने पर TDS नहीं काटना होता है.

लाइफ इंश्योरेंस के टैक्सेबल हिस्से पर TDS

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10 (10D) के तहत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्योरिटी पूरी होने के बाद मिलने वाली रकम टैक्स फ्री होती है. हालांकि यह फायदा उन पॉलिसीज पर लागू नहीं होता, जिनमें सालाना प्रीमियम सम एश्योर्ड के 10 फीसदी (अप्रैल 2012 से पहले बेची गई पॉलिसी के मामले में 20 फीसदी) से ज्यादा होता है.

1 सितंबर से लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने पर मिली रकम अगर टैक्स के दायरे में आती है तो कुल इनकम वाले हिस्से पर 5 फीसदी की दर से TDS काटा जाएगा. कुल इनकम वाले हिस्से को कैलकुलेट करने के लिए कुल प्राप्त हुई रकम में से दिए गए इंश्योरेंस प्रीमियम को घटाया जाता है.

PAN के बजाय आधार का इस्तेमाल

बजट 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए पैन और आधार को इंटरचेंजेबल बनाने का प्रस्ताव रखा था. साथ ही आईटीआर फाइल करने के लिए पैन की बजाय आधार इस्तेमाल करने का भी प्रस्ताव दिया गया. यह भी कहा गया कि अब जहां भी पैन का उल्लेख करने की जरूरत है, वहां आधार नंबर के जरिए काम चलाया जा सकता है. यह नया नियम भी 1 सितंबर 2019 से प्रभावी होने वाला है. हालांकि यह कुछ ट्रांजेक्शंस तक सीमित रह सकता है.

इसके अलावा अब 30 सितंबर 2019 तक पैन के आधार से लिंक न होने की स्थिति में पैन को ‘इनवैलिड’ के बजाय ‘इनऑपरेटिव’ करार दिया जाएगा.

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