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STP vs SIP: सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान क्या है? जानिए एसआईपी और एसटीपी में कौन आपके लिए बेहतर विकल्प

एसटीपी उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है जिनके हाथ में एकमुश्त रकम है और जो लागत औसत और उतार-चढ़ाव का लाभ उठाना चाहते हैं.

Updated: Sep 14, 2021 2:04 PM
systematic-transfer-plan-know-when-stp-is-a-better-investment-strategyएसटीपी उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है जिनके हाथ में एकमुश्त रकम है और जो लागत औसत और उतार-चढ़ाव का लाभ उठाना चाहते हैं.

STP vs SIP: सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान जिसे आमतौर पर SIP के रूप में भी जाना जाता हैनिवेशकों के बीच एक लोकप्रिय निवेश विकल्प है. इसके तहत निवेशक हर महीने एक निर्धारित रकम को एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स और म्यूचुअल फंड स्कीम्स में लंबे समय के लिए निवेश कर सकते हैं. इसमें निवेश बाजार में उतार-चढ़ाव की वजह से होने वाले जोखिमों से बचने का भी एक अच्छा तरीका माना जाता है. एसआईपी की तरह सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) में भी निवेशक फिक्स्ड डेट पर निश्चित राशि म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं. एसटीपी एक ऐसी एसआईपी है जो एक म्यूचुअल फंड से दूसरे म्यूचुअल फंड में की जाती है.

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एसटीपी के क्या हैं फायदे

  • STP एसआईपी का ही एक प्रकार है जो निवेशकों को एक ही एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एक स्कीम से दूसरे स्कीम में नियमित अंतराल पर एक निश्चित रकम ट्रांसफर करने की सुविधा देता है.
  • यह सुविधा निवेशकों को अलग-अलग एसेट वर्गों के बीच बिना किसी रुकावट के स्विच करते हुए अपने इंवेस्टमेंट पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने में मदद करती है. इससे उतार-चढ़ाव कम होता है और फाइनेंशियल गोल्स को हासिल करने में मदद मिलती है.
    उदाहरण के लिए, मान लीजिए कोई निवेशक अपनी किसी प्रॉपर्टी को बेचकर 20 लाख रुपए की एकमुश्त कमाई करता है. वह अपनी पूरी रकम को मनी मार्केट या लिक्विड फंड में निवेश कर सकता है और फिर फंड हाउस को अगले 20 महीनों की अवधि में हर महीने एक लाख रुपये इक्विटी म्यूचुअल फंड में ट्रांसफर करने के लिए कह सकता है. इससे बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने और अधिग्रहण की लागत को कम करने में मदद मिलेगी.
  • यह एक ऐसा प्लान है जो निवेशकों को यह सुविधा देता है कि म्यूचुअल फंड समय-समय पर एक स्कीम से राशि या यूनिट्स को उसी म्यूचुअल फंड हॉउस के किसी दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर सके. इस तरह नियमित रूप से आपकी राशि एक स्कीम से आपकी पसंद की दूसरी स्कीम में ट्रांसफर की जा सकती है.

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कितने तरह के होते हैं एसटीपी

कई तरह के एसटीपी होते हैं, जिनमें से आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक को चुन सकते हैं. उदाहरण के लिएफिक्स्ड एसटीपी के तहतनिवेशक एक फंड से दूसरे फंड में एक निश्चित रकम ट्रांसफर करते हैं. कैपिटल एप्रिसिएशन एसटीपी मेंनिवेशक एक निवेश से होने वाले लाभ को दूसरे इंवेस्टमेंट फंड में निवेश करते हैं. इसी तरह, फ्लेक्सी एसटीपी मेंनिवेशक के पास एक परिवर्तनीय राशि चुनने का विकल्प होता है. फिक्स्ड राशि एक न्यूनतम राशि होती है और परिवर्तनीय राशि बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है.

एसटीपी और एसआईपी में कौन है बेहतर?

जैसा कि ऊपर बताया गया हैएसटीपी असल में एक एसआईपी की तरह ही काम करता है जहां एक निश्चित राशि किसी विशेष फंड में निवेश की जाती है. हालांकिअगर आपके पास निवेश करने के लिए एकमुश्त राशि है तो इसे एसटीपी के जरिए निवेश करना बेहतर है. इसलिएकम जोखिम वाले डेट फंड में एकमुश्त निवेश करना और फिर अपनी पसंद के इक्विटी फंड में एसटीपी शेड्यूल करना बेहतर होगा. हालांकिअगर पैसा कुछ निश्चित अंतराल से पहले निकाला जाता है (आमतौर पर इक्विटी फंड के लिए एक सालतो निवेशकों को म्यूचुअल फंड हाउस द्वारा लगाए गए एग्जिट लोड चार्ज की जांच करनी चाहिए. हालांकिलिक्विड फंड पर कोई एग्जिट लोड नहीं होता है और ज्यादातर एसटीपी बिना किसी एग्जिट लोड के लिक्विड फंड से इक्विटी फंड में पैसा ट्रांसफर करते हैं.

कुल-मिलाकर यह कहा जा सकता है कि एसटीपी और एसआईपी निवेश के दो अलग-अलग तरीके हैं. दोनों के ही अपने फायदे और नुकसान हैं. एसटीपी उन निवेशकों के लिए बेहतर है जिनके हाथ में एकमुश्त रकम है और जो लागत औसत और उतार-चढ़ाव का लाभ उठाना चाहते हैं.

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