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ऑटो सेक्टर में मंदी! डीलरशिप के लिए SBI ऑटो लोन लेना हुआ मुश्किल, बैंक ने सख्त की शर्तें

हुंडई मोटर कंपनी इंडिया की गाडियां बेच रहे डीलर्स के इंटरनल मेमो में SBI ने कहा कि कारमेकर के पॉर्टफोलियो में 'बढ़ते स्ट्रेस' के चलते SBI अपने लेंडिंग टर्म्स रिवाइज कर रहा है.

July 30, 2019 2:20 PM
State bank of india tightens lending terms for hyundai and other car dealers a result of auto sector slowdownSBI ने डीलर्स के लिए उधार देने का समय भी 90 दिनों के कम कर 60 दिन कर दिया है. (Image: SBI)

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ऑटो डीलरशिप्स के लिए लोन देने की शर्तों को सख्त कर दिया. ऐसा करके SBI ऑटो सेक्टर में चल रही मंदी के रिस्क से खुद को बचाना चाहता है. साल 2018 के बीच में सामने आया बैंकिंग संकट इस साल और भी खराब स्थिति में पहुंच चुका है. नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों में लिक्विडिटी की कमी, महंगी इंश्योरेंस कॉस्ट और बढ़ते टैक्स ने कार सेक्टर पर दवाब बनाया है. इसका नतीजा यह हुआ कि अप्रैल से ऑटो सेल्स में 17 से 20 फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है. जून में घटी पैसेंजर व्हीकल की मंथली सेल्स का मार्जिन पिछले 18 वर्षों में सबसे ज्यादा रहा.

लोन लेने के लिए कुछ गिरवी रखना जरूरी

हुंडई मोटर इंडिया की कारें बेच रहे डीलर्स के इंटरनल मेमो में SBI ने कहा कि कारमेकर के पॉर्टफोलियो में ‘बढ़ते स्ट्रेस’ के चलते SBI अपने लेंडिंग टर्म्स रिवाइज कर रहा है. SBI के सीनियर अधिकारी ने कहा कि इसी तरह के मेमो अन्य ब्रांड्स के डीलर को भी भेजे गए हैं. हालांकि रॉयटर्स ने अन्य कारमेकर्स को भेजे गए मेमो की कॉपी नहीं देखी है.

रिवाइज की गई शर्तों के मुताबिक, SBI ने अपने मेमो में कहा है कि जब तक हुंडई मोटर डीलर लोन के 25 फीसदी के बराबर कुछ गिरवी नहीं रखेगा, तब तक SBI उन्हें लोन नहीं देगा.

हुंडई डीलर्स जिन्हें पहले ही लोन मिल चुका है उन्हें भी लोन की रकम का 25 से 50 फीसदी सिक्योरिटी के तौर पर पेश करना होगा. हालांकि हुंडई ने इस मुद्दे पर भेजे गए मेल का जवाब नहीं दिया है. हुंडई देश की दूसरी की सबसे बड़ी कार मैन्युफैक्चरर है. 31 मार्च तक 33 लाख पैसेंजर व्हीकल के साथ हुंडई के पास भारतीय बाजार का 16 फीसदी हिस्सा था.

मारुति सुजुकी के पास भारतीय बाजार का 50 फीसदी हिस्सा है. जबकि टोयोटा, फॉक्सवैगन, फोर्ड और निसान जैसी कंपनियां भी देश में कार बेचती हैं. SBI के एक अधिकारी ने कहा कि ऑटोमोबाइल्स कइ बिक्री में मंदी चल रही है और हमारे पास ऑटो के लिए पर्याप्त जोखिम है. हमें इस रिस्क से खुद को बचाना है.

रिस्क एक्सपोजर कम करना है मकसद

रेगुलेटर्स के मुताबिक, मार्च के आखिर में ऑटो रिटेल बाजार में SBI का लोन रिस्क 718.8 अरब रुपये ($ 10.5 बिलियन) था. ऑटो सेक्टर में चल रही मंदी की वजह से बैंक लगातार अपने रिस्क एक्सपोजर की समीक्षा कर रहे हैं.

SBI ने रॉयटर्स को बताया कि वह स्थिति का आकलन कर रहा है और डीलर्स के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि सेक्टर को किसी तरह का तनाव न हो.

लोन के 50% के बराबर देनी होगी गारंटी

अन्य लेंडर्स भी अलग-अलग बैंकों से क्रेडिट लाइन्स वाले डीलरों को उधार देने से अधिक सावधान हो गए हैं. कोटक महिंद्रा बैंक के जॉइन्ट मैनेजर का कहना है कि कुछ डीलर्स एक बैंक की क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल कर दूसरे बैंक का कर्ज उतार रहे हैं. बैंक इस तरह की हरकतों पर कड़ा रुख अपना रहा है.

SBI ने अपने मेमो में कहा कि अगर कोई SBI के अलावा अन्य दो बैंकों से भी लोन लेता है तो उन्हें लोन की रकम का कम से कम 50 फीसदी के बराबर कुछ गिरवी रखना होगा. SBI ने डीलर्स के लिए उधार देने का समय भी 90 दिनों के कम कर 60 दिन कर दिया है.

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