नौकरी के साथ ही इन 5 तरीके से शुरू करें मनी मैनेजमेंट, उम्र भर नहीं होगी पैसे की किल्लत

गैजेट्स, फैशन और वेकेशन पर खर्च कर देना आसान है. ऐसे में आपको यह याद रखना चाहिए कि आय का एक ही है स्रोत है, इसलिए आपको आर्थिक आज़ादी के लिए योजना बनाने की जरुरत है.

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गैजेट्स, फैशन और वेकेशन पर खर्च कर देना आसान है. ऐसे में आपको यह याद रखना चाहिए कि आय का एक ही है स्रोत है, इसलिए आपको आर्थिक आज़ादी के लिए योजना बनाने की जरुरत है.

यदि आपने नौकरी करना शुरू कर दिया है तो मासिक सैलरी आपको आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने का अहसास कराती है. विशेष रूप से जब कोई अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां आपके पास नहीं हो तो पैसा आपके लिए निश्चित रूप से उपलब्ध होता है.

गैजेट्स, फैशन और वेकेशन पर खर्च कर देना आसान है. ऐसे में आपको यह याद रखना चाहिए कि आय का एक ही स्रोत है, इसलिए आपको आर्थिक आज़ादी के लिए योजना बनाने की जरूरत है.

बचत और निवेश की शुरूआत की जा सकती है. ध्यान दें कि जितना पहले आप शुरू करते हैं उतना अधिक आप अपने पैसे पर ब्याज का फायदा उठा सकते हैं. आइए उन फाइनेंशियल स्टेप्स को देखते हैं जो आपको अपने करियर में जल्दी से लेने के लिए जरूरी हैं:

Student Loan को पहले निपटाएं

यदि आपको नौकरी मिल गई है तो स्टूडेंट लोन को रोके रखना सही नहीं है. कोर्स पूरा करने और नौकरी पाने के बीच एक गैप होने पर उधारकर्ता को राहत देने के लिए एजुकेशन लोन पर मोरेटोरियम अवधि मिलती है. हालांकि, इस अवधि के दौरान ऋण राशि पर ब्याज बढ़ता जाता है. इसलिए जितनी जल्दी हो सके आप कर्ज चुकाना शुरू कर दें, इससे ब्याज का बोझ कम होता है. प्रीपेमेंट पर विचार करें यदि आप इसे अपनी मासिक आय के साथ कर सकते हैं या कर्ज चुकाने के लिए सालाना बोनस या प्रदर्शन बोनस के रूप में मिले पैसों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

बजट बनाएं और बचत करना शुरू करें

एक बजट हमेशा आपको यह जानने में मदद करता है कि आपके पास कितना पैसा है, आपके खर्च क्या हैं और बचत के लिए आपका दायरा क्या है. 70:30 के अनुपात में खर्च और बचत के अनुसार अपनी मासिक आय को बांटने की कोशिश करनी चाहिए. और आपके खर्चों के बाद जो कुछ बचा है उसे अंत तक देखने के प्रतीक्षा करने के बजाए महीने की शुरुआत में ही बचत वाले हिस्से को अलग कर दें. इससे तरीके से आपको बचत करने की आदत बनाने में मदद मिलेगी. बजट आपके बचत पर समझौता किए बिना आपके खर्च को नियंत्रण में रखता है.

लक्ष्य बनाएं और सही जगह निवेश करना शुरू करें

किसी भी लक्ष्य के लिए सिर्फ अंधाधुंध पैसे बचाने से सही समय पर प्रभावी रिटर्न नहीं मिल सकता है. इसलिए, यह जरुरी है कि आप लक्ष्यों को निर्धारित करें और इन लक्ष्यों में से हरेक तक पहुंचने के लिए वक्त का ध्यान रखें. निवेश के वक्त को देखते हुए, आपकी जोखिम और लिक्विडिटी की जरुरत निर्धारित की जाती है. और वह आपका निवेश विकल्प बन सकता है. मानो, 10 साल में आप एक घर खरीदना चाहते हैं. आपके पास एक निवेश है जो मीडियम से हाई रिस्क वाली संपत्तियों में निवेश करने के लिए पर्याप्त है जो बेहतर रिटर्न देगा. इक्विटी म्यूचुअल फंड या ELSS आपके लिए जाना-पहचाना हो सकता है. शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए जैसे कि बाइक खरीदने या छुट्टी पर जाने के लिए या कोई भी लक्ष्य जो आपको एक से दो साल के निवेश की अनुमति देता है, इसमें आपको अपेक्षाकृत कम जोखिम है तो आपको कैपिटल प्रिजर्वेशन या लिक्विडिटी की तलाश होनी चाहिए.

SIP में निवेश करें

करियर शुरू करते वक्त आपके दिमाग में रिटायरमेंट या रिटायरमेंट के बाद पैसों की जरुरत का ख्याल जरुर आता है. आप जितना जल्दी निवेश करना शुरू करेंगे उतनी ही जल्दी आपको आपका निवेश बड़ा, और बड़ा होगा. आप अपने मासिक आय का बहुत छोटा सा हिस्सा अलग करके SIP म्यूच्यूअल फंड में निवेश कर सकते हैं. यह रकम 500 रुपये का भी हो सकता है. और जब आपका वेतन बढ़े या आप निवेश के रकम को बढ़ाना चाहते हैं तो आप हमेशा समय के साथ योगदान की मात्रा बढ़ा सकते हैं. बेहतर रिटर्न पाने के लिए जल्दी निवेश शुरू करना जरुरी है. उदाहरण के लिए यदि आप एक SIP फंड में 5,000 रुपये प्रति माह निवेश करते हैं और आपको 12 फीसदी की सालाना दर से ब्याज मिलता है तो आपके पास 30 साल में 1.8 करोड़ रुपये का एक फंड होगा. दूसरी ओर, यदि आप अपने वेतन में बढ़ोतरी के लिए 10 साल का इंतजार करते हैं और 10,000 रुपये प्रति माह की SIP से शुरू करते हैं, तो आपका निवेश कार्यकाल 20 साल तक घट जाएगा. ऐसे में यदि आप अपने निवेश को दोगुना भी करते हैं तो 12 फीसदी के दर से आपको 99.9 लाख का फंड ही मिल सकेगा.

Emergency के लिए तैयार रहें

हो सकता है कि आप कड़ी मेहनत करते हों और खूब बचत भी. लेकिन यह किसी भी एक इमरजेंसी में आपकी सारी जमा-पूंजी समाप्त हो सकती है, यह इमरजेंसी स्वास्थ्य को लेकर, एक्सिडेंट होने पर, नौकरी खोने पर, प्राकृतिक आपदा जैसे हालात में हो सकती है. ऐसे में यदि आपके पास बचत न हो तो आपको बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. इमरजेंसी के हालात में आपके पास आय का अतिरिक्त साधन बिल जमा करने, ईएमआई भरने, दैनिक खर्चों के लिए होनी चाहिए. आपके पास 6 महीने से लेकर साल भर के लिए इमरजेंसी फंड होनी चाहिए. इमरजेंसी फंड को बनाने के लिए आपको हर महीने के आय का कुछ फीसदी हिस्सा अलग निवेश करना चाहिए जहां एग्जिट लोड का कोई दबाब न हो. स्वास्थ्य संबंधी इमरजेंसी के लिए आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस होनी चाहिए. एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी आपको अस्पताल में भर्ती होने से पहले और उसके बाद के उपचार के लिए फाइनेंस करेगी.

(इसके लेखक आदिल शेट्टी, बैंक बाज़ार के सीईओ हैं.)

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