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Smart Investing: महंगाई का करना है मजबूती से सामना, तो ऐसे बनाएं पोर्टफोलियो, ताकि कीमतों के साथ आपके रिटर्न में भी हो इजाफा

महंगाई दर में बढ़ोतरी के दौर में निवेशकों को ऐसी रणनीति बनानी चाहिए, जिससे उनके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ती कीमतों से मुकाबला करने में मदद कर सके.

Smart Investing: महंगाई का करना है मजबूती से सामना, तो ऐसे बनाएं पोर्टफोलियो, ताकि कीमतों के साथ आपके रिटर्न में भी हो इजाफा
इक्विटी में निवेश करके निवेशक लंबी अवधि में हासिल होने वाले रिटर्न से महंगाई को मात दे सकते हैं.

How to Make Your Portfolio Inflation Proof : इस साल सितंबर महीने में देश की खुदरा महंगाई दर पिछले 5 महीने के सबसे ऊंचे स्तर 7.41 फीसदी पर पहुंच गई. देश में यह दर लगातार 9 महीने से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 6 फीसदी के घोषित लक्ष्य से भी ऊपर चल रही है. ऐसे में निवेशकों को चाहिए कि वह एक ऐसा पोर्टफोलियो बनाएं जो इसके प्रभाव को आसानी से संभाल सके. एक ऐसा पोर्टफोलियो, जो रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाले सामानों की बढ़ती कीमतें चुकाने के लिए भी आपको तैयार कर सके. महंगाई के कारण आए दिन सेवाएं भी महंगी हो रही हैं. शहरी इलाकों में बसे लोग इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें इन सर्विसेज की ज्यादा जरूरत पड़ती है.

महंगाई में लगातार इजाफा होने से फिक्स्ड इनकम इनवेस्टमेंट सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. ऐसे में इनवेस्टर को सर्विसेज व जरूरी सामानों की बढ़ती कीमतों के असर को कम करने और परचेजिंग पॉवर को बरकरार बनाए रखने के लिए कई तरह की स्कीम में निवेश करना चाहिए. निवेशकों को अपना पोर्टफोलियो डावर्सिफिाइ करने चाहिए. डावर्सिफिाइड पोर्टफोलियो उन्हें विपरीत परिस्थितियों में संभलने में मदद करता है. और सबसे अहम बात ये कि पैसे को समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए. प्लानिंग के तहत खर्च करना चाहिए. दूसरों के सामने खुद को बेहतर साबित करने के लिए बेवजह खर्च नहीं करना चाहिए. यहां बताया गया है कि कैसे एक निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सही ढंग से तैयार करके मंहगाई के प्रभाव से खुद को बचाए रख सकता है.

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इक्विटी मार्केट को नजरअंदाज न करें

इक्विटी में निवेश करके निवेशक लंबी अवधि में हासिल होने वाले रिटर्न से महंगाई को मात दे सकते हैं. विश्वसनीय कंपनी के स्टॉक यानी शेयर में निवेश कर कोई भी निवेशक इक्विटी पोर्टफोलियो बना सकता है. ये एक लंबी अवधि वाली इनवेस्टमेंट स्कीम है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले 20 साल में इक्विटी मार्केट ने निवेशकों को औसतन 12 फीसदी या उससे अधिक रिटर्न दिया है. जबकि बैंकों ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट पर ग्राहकों को औसतन 5 से 7 फीसदी ही रिटर्न दिया है. इक्विटी मार्केट से लाभ ले चुके निवेशकों को एफडी पर बढ़ाई गई ब्याज दरें भी निवेश के लिए अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाती हैं. अगर किसी निवेशक के पास इक्विटी मार्केट में 5 से 7 सालों का अनुभव है तो वह इसमें निवेश कर सकता है. AZUKE पर्सनलफाइनेंस एडवाइजरी की संस्थापक चैताली दत्ता (Chaitali Dutta) बताती हैं कि आपके निवेश पर कंपाउंडिंग इफेक्ट काम करता है. यहां ये मायने नहीं रखता कि आपने निफ्टी (Nifty) के किस स्तर से इक्विटी में निवेश की शुरुआत की है.  वे कहती हैं कि निवेश की शुरुआत इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए पैसे लगाने से करनी चाहिए.

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ज्यादा रिटर्न देने वाली एफडी स्कीम में निवेश करें

निवेशकों को बैंक की बजाय ट्रिपल-ए रेटेड कंपनी की डिपॉजिट स्कीम में निवेश करने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि ये बैंक के मुकाबले 1-1.5 फीसदी यानी 100-150 बेसिस प्वाइंट्स ज्यादा ब्याज देते हैं. एक्सपर्ट का सुझाव यह भी है कि कम समय में मैच्योर होने वाली एफडी में निवेश करना बेहतर होता है, क्योंकि उन पर इंटरेस्ट रेट में ज्यादा वृद्धि होने की संभावना होती है.

लोअर रेटेट डिपॉजिट के मुकाबले ट्रिपल-ए रेटिंग वाले एफडी आपको कुछ कम रिटर्न देते हैं, लेकिन इनमें आपके पैसे ज्यादा सुरक्षित रहते हैं और और इंटरेस्ट के साथ-साथ निवेश की गई रकम भी समय पर वापस मिल जाती है. कंपनी कोई भी हो, उसके एफडी में निवेश करने से पहले उसके बारे में अच्छी तरह से जानकारी जुटा लें. उसके सेक्टर और अपनी रिस्क लेने की क्षमता का आकलन भी कर लें.

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अलग-अलग स्कीम में निवेश कर अपना पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई करें

एक ही जगह पैसा निवेश करने पर मार्केट कमजोर होने की हालत में निवेशक के दिवालिया होने की आशंका अधिक रहती है. लेकिन अपना फंड अलग-अलग स्कीम में निवेश करने पर एक जगह पैसे डूबने की हालत में दूसरी जगह से उसकी भरपाई होने की उम्मीद रहती है. फंड हाउस यानी म्यूचुअल फंड कंपनियां निवेशक से मिले फंड को गोल्ड, डेट, इक्विटी जैसे कई सेगमेंट में बांटती हैं, जिनसे उनका डायवर्सिफिकेशन हो जाता है. 

रियल एस्टेट में निवेश किया जा सकता है.

एक्सपर्ट का मानना है कि महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए रियल एस्टेट में निवेश करना भी बेहतर विकल्प हो सकता है. हालांकि निवेश के लिए ज्यादा रकम की जरूरत और कम लिक्विडिटी के चलते इसमें पैसा लगाना आसान नहीं होता. साथ ही स्टांप ड्यूटी, प्रॉपर्टी टैक्स समेत कई कानूनी बाध्यताओं के कारण इसमें निवेश की लागत भी अधिक होती है. फिर भी अगर आप इसमें निवेश के इच्छुक हैं तो रियल स्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं. 

(Article : Saikat Neogi)

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First published on: 17-10-2022 at 20:57 IST

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