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Smart investing: लंबी अवधि के फाइनेंशियल गोल्स के लिए क्या हो निवेश का सही तरीका, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

ऐसे निवेशक जो लंबी अवधि यानी तीन से पांच साल के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए इक्विटी या इक्विटी म्यूचुअल फंड के माध्यम से निवेश करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है.

October 20, 2021 12:04 PM
Smart investing: Align your investments with your financial goalsनिवेशकों को अपना पैसा लगाते समय अपने फाइनेंशियल गोल्स जैसे बच्चों की शिक्षा, घर खरीदना और रिटायरमेंट आदि का ध्यान रखना चाहिए.

Smart investing: शेयर बाजार इंडिकेटर सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) में जबरदस्त तेजी दिख रही है. शेयर बाजार की यह तेजी निवेशकों को अपने सरप्लस फंड को इक्विटी या इक्विटी-बेस्ड म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए लुभा रही है. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को अपना पैसा लगाते समय अपने फाइनेंशियल गोल्स जैसे बच्चों की शिक्षा, घर खरीदना और रिटायरमेंट आदि का ध्यान रखना चाहिए. आपके पोर्टफोलियो में डेट, गोल्ड आदि जैसे एसेट वर्गों में निवेश का विवेकपूर्ण मिश्रण होना जरूरी है. यहां हम आपको कुछ ऐसे ही एसेट क्लास के बारे में बताने जा रहे हैं.

इनवेस्टमेंट गोल और एसेट क्लास

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे निवेशक जो लंबी अवधि यानी तीन से पांच साल के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए इक्विटी या इक्विटी म्यूचुअल फंड के माध्यम से निवेश करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं, शॉर्ट से मीडियम टर्म यानी एक से तीन साल के लिए निवेश के मामले में डेट या डेट ओरिएंटेड फंड का विकल्प चुनना अच्छा होता है. ऐसे निवेशक जो निवेश के ज़रिए अपना टैक्स बचाना चाहते हैं और इसके साथ ही स्थिर रिटर्न भी चाहते हैं वे पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और गोल्ड में निवेश पर विचार कर सकते हैं.

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पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)

लॉन्ग टर्म गोल्स यानी रिटायरमेंट के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड में निवेश कर अच्छा-खासा फंड जमा किया जा सकता है. इसमें निवेश पर न सिर्फ टैक्स बेनेफिट्स मिलता है बल्कि निवेश पर मिलने वाले ब्याज की रकम व मेच्योरिटी अमाउंट पर भी कोई टैक्स नहीं चुकाना होता है. वर्तमान में, पीपीएफ की ब्याज दरें 7.1 फीसदी निर्धारित की गई है.

नेशनल पेंशन स्कीम (NPS)

NPS को भी रिटायरमेंट प्लानिंग यानी लंबी अवधि के निवेश के लिए बेहतर माना जाता है. NPS में निवेशक जो पैसा लगाते हैं उसे इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, लिक्विड फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट, सरकारी बॉन्ड आदि में निवेश किया जाता है. एक निवेशक के रूप में कोई भी यह तय कर सकता है कि एनपीएस के माध्यम से इक्विटी में कितना पैसा लगाना है. एनपीएस में निवेश करने का फायदा यह है कि मैच्योरिटी के बाद खाते में जमा हुई रकम का 60 फीसदी तक निकाल सकते हैं. जबकि बाकी 40 फीसदी का इस्तेमाल एन्यूटी प्लान खरीदने के लिए किया जाता है.  इतना ही नहीं, इसमें निवेश करने पर इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत छूट भी मिलती है. इसके ज़रिए आप एक साल में 1,50,000 रुपये तक टैक्स बचा सकते हैं.

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इक्विटी म्यूचुअल फंड

इक्विटी शेयरों में एक्सपोजर पाने के लिए इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश करना सबसे आसान विकल्प है. इक्विटी फंड आपके लॉन्ग टर्म गोल्स को हासिल करने के लिए निवेश का सबसे अच्छा माध्यम है. आप इक्विटी म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए निवेश करने पर विचार कर सकते हैं. एसआईपी के ज़रिए निवेश में आपको नियमित तौर पर तय रकम निवेश करना होगा. इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड में निवेश करते समय, लार्ज कैप फंड के साथ-साथ मिड-कैप योजनाओं में भी निवेश करना चाहिए. सेक्टोरल-बेस्ड फंडों में बार-बार समीक्षा की जरूरत होती है और निवेशकों को इसे लगातार मैनेज करना पड़ता है, इसलिए इसे शौकिया निवेशकों के उपयुक्त नहीं माना जाता.

सॉवरेन गोल्ड बांड (SGB)

भारत सरकार ने उन निवेशकों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) स्कीम्स की एक सीरीज शुरू की जो गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं. SGB में न सिर्फ आपको ब्याज मिलता है बल्कि इसके ज़रिए आप सोना भी खरीद सकते हैं. बांड का टेन्योर आठ साल का होता है और पांचवें साल से इसमें एक्जिट का विकल्प भी मिल जाता है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के निवेशकों को हर साल एक तय ब्याज मिलता है. ब्याज की दर 2.5 फीसदी सालाना है. यह ब्याज छमाही आधार (Half yearly basis) पर मिलता है. एक निवेश के रूप में, SGB को फिजिकल गोल्ड खरीदने की तुलना में बेहतर माना जाता है.

निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इनमें से किसी में भी निवेश करने से पहले उनके पास फाइनेंशियल इमरजेंसी के लिए पर्याप्त पैसे उपलब्ध हो. इसके बाद ही निवेशकों को इस तरह के निवेश के लिए विचार करना चाहिए ताकि किसी भी तरह की फाइनेंशियल इमरजेंसी के समय आपको अपने दोस्तों या रिश्तेदारों से पैसे उधार ना लेने पड़े.

(Article: P Saravanan) इस आर्टिकल को आईआईएम तिरुचिरापल्ली के फाइनेंस एंड अकाउंटिंग के प्रोफेसर ने लिखा है.

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