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SIP, STP, SWP: आपकी पूंजी को बाजार के थपेड़ों से बचाने के आसान उपाय, क्या हैं पैसे लगाने और निकालने के बेहतर तरीके

अपनी मेहनत की कमाई को अगर आप सिस्टमैटिक यानी व्यवस्थित तरीके से लगाएंगे तो जोखिम कम होगा और रिटर्न भी अच्छा मिलेगा

April 9, 2021 7:38 AM
SIP, STP और SWP के जरिए आप कम जोखिम में अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न हासिल कर सकते हैं

Systematic Way Of Profitable Investment:  बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव आम तौर पर निवेशकों को बेहद परेशान करते हैं. मार्केट ऊपर गया तो निवेशक खुश, नीचे आया तो निवेशक के माथे पर उभर आईं चिंता की लकीरें. आम तौर पर कुछ ऐसा ही देखने को मिलता है. खास तौर पर शेयर बाजार में सीधे निवेश करने वाले या इक्विटी फंड में पैसे लगाने वाले निवेशक बाजार की उथल-पुथल से काफी चिंतित रहते हैं. लेकिन उन्हें इस चिंता से बचाने और बाजार के हिचकोलों को मुनाफे में बदलने के बेहद आसान उपाय भी मौजूद हैं. बरसों के आजमाए हुए ये उपाय हैं निवेश और निकासी के सिस्टमैटिक प्लान. निवेश की इस सिस्टमैटिक यानी व्यवस्थित रणनीति को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है. 

  1. सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान यानी SIP
  2. सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान यानी STP और
  3. सिस्टमैटिक विदड्रावल प्लान यानी SWP

सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान यानी SIP

जैसा कि SIP के नाम से ही झलकता है, यह बाजार में पैसे लगाने का एक सिस्टमैटिक यानी व्यवस्थित प्लान है. इसमें आप अपने सारे पैसे बाजार में एक ही बार में लगाने की बजाय उसे कई हिस्सों में बांटकर अलग-अलग समय पर निवेश करते हैं. वैसे आप चाहें तो अपने डीमैट एकाउंट के जरिए अपने पसंदीदा शेयर में निवेश करने के लिए भी SIP जैसी रणनीति अपना सकते हैं, लेकिन आमतौर पर SIP का जिक्र म्यूचुअल फंड्स के संदर्भ में ही होता है. इस रणनीति के तहत हर महीने, हर हफ्ते या हर दिन एक निश्चित रकम आपके पसंदीदा म्यूचुअल फंड में लगाई जाती है. SIP का एक और फायदा यह भी है कि इसमें निवेश के लिए एकमुश्त पूंजी जुटाने की चिंता भी नहीं करनी पड़ती. आप अपनी आमदनी के हिसाब से हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम निवेश कर सकते हैं और आगे चलकर आय बढ़ने पर रकम मनमुताबिक बढ़ा भी सकते हैं. इस रणनीति का सबसे ज्यादा लाभ इक्विटी फंड में पैसे लगाने वालों को मिलता है. क्यों यह हम आगे समझेंगे. 

क्यों फायदेमंद है SIP के जरिए निवेश

SIP में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप इसमें बाज़ार में सही समय पर पैसे लगाने की फिक्र और उलझन से बच जाते हैं. इसमें आपको ये नहीं सोचना पड़ता कि कहीं आप गलत वक्त पर तो पैसे नहीं लगा रहे? न ही यह फिक्र होती है कि कहीं आप ओवर-वैल्यूड यानी जरूरत से ज्यादा ऊंचाई पर जा पहुंचे बाजार में पैसे लगाकर अपनी पूंजी डुबाने तो नहीं जा रहे? SIP के जरिए निवेश करने पर आपको इन सवालों से जूझने की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि जब आप एक बार में निवेश करने की बजाय टुकड़ों-टुकड़ों में, अलग-अलग वक्त पर पूंजी लगाते हैं तो आपका निवेश कभी ऊपर के स्तर पर होता है और कभी नीचे के लेवल पर. 

जब आप महीने-दर-महीने या हफ्ते-दर-हफ्ते लंबे समय तक ऐसा करते रहते हैं, तो आपकी निवेश की लागत यानी कॉस्ट की एवरेजिंग हो जाती है. निवेश के वक्त अगर बाजार नीचा है तो आपको उतने ही पैसों में ज्यादा यूनिट्स या शेयर मिल जाते हैं. वहीं, बाजार जब ऊंचा होता है कि तो आप कम यूनिट्स या शेयर खरीदते हैं, जिससे आपका जोखिम भी सीमित ही रहता है. 

तमाम आंकड़े बताते हैं कि SIP के जरिए अनुशासित ढंग से लंबे समय तक निवेश करने पर जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा होने की पूरी संभावना रहती है. इस रणनीति का ज्यादा महत्व इक्विटी फंड के निवेश में इसलिए है, क्योंकि उसी में उथल-पुथल ज्यादा होती है और औसत रिटर्न भी वहीं ज्यादा मिलता है. डेट फंड में तो वैसे भी उतार-चढ़ाव कम ही होते हैं, इसलिए उनमें निवेश के लिए SIP बहुत जरूरी नहीं है. 

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान यानी STP

SIP की तरह ही सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान भी निवेश की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है. इसका इस्तेमाल तब किया जा सकता है, जब आपके पास निवेश के लिए एकमुश्त फंड उपलब्ध है, लेकिन आप एवरेजिंग का फायदा लेने के लिए उसे SIP के जरिए निवेश करना चाहते हैं. ऐसे में आप पूरी रकम को न के बराबर ब्याज और महंगाई एडजस्ट करने के बाद आम तौर पर निगेटिव रिटर्न देने वाले सेविंग एकाउंट की बजाय किसी सुरक्षित डेट फंड में रख सकते हैं. इसके बाद आप इस डेट फंड से अपने पसंदीदा इक्विटी फंड में हर महीने एक निश्चित रकम ट्रांसफर करने का इंस्ट्रक्शन दे सकते हैं. इससे आपको SIP का लाभ तो मिलेगा ही, साथ ही पूरी रकम सिस्टमैटिक तरीके से ट्रांसफर होने के दरम्यान उस पर डेट फंड में बेहतर रिटर्न भी हासिल होता रहेगा. 

सिस्टमैटिक विदड्रावल प्लान यानी SWP

SIP आपको बाजार में पैसे लगाने का एक बेहतर और अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला रास्ता मुहैया कराते हैं. लेकिन जोखिम सिर्फ बाजार में पैसे लगाते समय ही नहीं होता. कई बार बाजार से अपनी पूंजी निकालते समय भी टाइमिंग गलत होने की फिक्र सताती है. 

अगर आपको अचानक इमरजेंसी में पैसों की जरूरत पड़े तब तो आप कुछ भी सोचे बिना अपने पैसे निकाल लेंगे. लेकिन अगर आप पहले से तय योजना के तहत शादी-ब्याह, शिक्षा या रिटायरमेंट जैसे किसी निश्चित मकसद के लिए पैसे निकालना चाहते हैं, तो आप जरूर चाहेंगे कि आप पैसे उस वक्त निकालें जब आपके फंड की वैल्यू सबसे अच्छी मिले. यह उलझन होना स्वाभाविक है कि कहीं ऐसा न हो कि जब बाजार ऊंचाई पर था, तब इंतज़ार करते रह गए और जब पैसे निकालने की बारी आई तो बाजार नीचे आ गया. 

लेकिन पैसे निकालने का सही वक्त क्या है, यह तय करना लगभग असंभव है. पक्के तौर पर कोई भी नहीं जानता कि बाजार कब ऊपर चला जाएगा और कब नीचे आ जाएगा. ऐसे में पैसे निकालने का सही समय चुनने की उलझन से बचने के लिए आप सिस्टमैटिक विदड्रावल प्लान यानी SWP की मदद ले सकते हैं. जैसे SIP में हर महीने या हफ्ते पैसे निवेश किए जाते हैं, वैसे ही SWP के जरिए आप पूरी रकम को कई किश्तों में बांटकर महीने-दर-महीने बाहर निकाल सकते हैं. इसमें भी आपको SIP की तरह ही एवरेजिंग का लाभ मिलेगा और आप पूरी रकम बाजार के बेहद निचले स्तर पर निकालने के जोखिम से बच जाएंगे. 

SWP के साथ-साथ ले सकते हैं STP का भी लाभ

हां, एक और बात, इस दौरान आप चाहें तो STP का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. लेकिन पहले जो उदाहरण दिया था, उसके उलटे क्रम में. यानि इक्विटी फंड से पैसे पहले कम उतार-चढ़ाव और बेहतर सुरक्षा वाले डेट फंड में ट्रांसफर किए जाएं और फिर वहां से SWP के जरिए निकाल लिए जाएं. आपके लिए कौन सी रणनीति सही रहेगी यह आप अपनी जरूरतों और लक्ष्य के हिसाब से तय कर सकते हैं. 

तो इस तरह SIP, STP और SWP के इस्तेमाल से आप बाजार में मिलने वाले बेहतर रिटर्न का पूरा फायदा उठा सकते हैं, वो भी कम से से जोखिम का सामना करके. हां, इतना जरूर याद रखें कि यह तमाम लाभ तभी मिलेंगे जब आप निवेश के लिए सही फंड्स का चुनाव करेंगे. 

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