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3 महीने लोन की EMI रोकना आपकी जेब पर कितना डालेगा असर, नफा नुकसान देखकर लें फैसला

RBI Loan Moratorium: क्या आपको 3 महीने बढ़े लोन मोरेटोरियम की सुविधा लेनी चाहिए. पहले इसके असर को देख लें.

May 22, 2020 11:58 AM
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रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने लॉकडाउन को देखते हुए लोन मोरेटोरियम की अवधि को 3 महीने और बढ़ा दिया है. यानी इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपने होम लोन या आटो लोन लिया है तो आपको अपनी ईएमआई रोकने के लिए 3 महीने की और मोहलत मिल गई है. पहले भी मार्च से मइ्र तक यानी 3 महीने की मोहत मिली थी. पहली बात तो सह कि इसका मतलब यह नहीं है कि ये 6 किस्तें आपसे ली नहीं जाएंगी. दूसरा यह कि इस दौरान जो भी ब्याज होगा, उस पर आपको बाद में ब्याज देना होगा. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी अपने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह साफ किया है. फिलहाल लोन मोरेटोरियम पीरियड का लाभ लेने से पहले ग्राहकों को अपना नफा नुकसान जरूर देखना चाहिए.

क्या कहा है आरबीआई गवर्नर ने

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने साफ कहा कि लोन मोरेटोरियम का मतलब EMI वेबर नहीं है. वहीं उन्होंने कहा कि ईएमआई टालने पर 6 महीने के संचित ब्याज को अब टर्म लोन में बदला जा सकता है. यानी इस ब्याज पर ग्राहकों को ब्याज देना होगा. इसकस मतलब है कि 6 महीने बाद जो ईएमआई शुरू होगी, उसकी रकम बढ़ी होगी. या कुल ईएमआई की संख्या बढ़ जाएगी. जो भी विकल्प ग्राहक लेना चाहें.

6 महीने बाद बैंक वसूलेंगे ब्याज

ज्यादातर बैंकों ने पहले ​ही कह दिया था कि इस बारे में घोषित योजना के अनुसार वे मोरेटोरियम पीरियड के बाद इन 6 महीनों का ब्याज बाद में वसूलेंगे. इसका मतलब हुआ कि लोन लने वालों के सामने दोहरी समस्या है. बहुत से लोग ऐसे हें, जिनकी लॉकडाउन की वजह से आय प्रभावित हुई है. वहीं दूसरी ओर अगर वे RBI के लोन मोरेटोरियम की सुविधा लेते हैं तो उनकी ईएमआई की रकम बढ़ेगी या ईएमआई की संख्या पहले के मुकाबले बढ़ जाएगी.

IBA ने भी चेताया था

पहले लोन मोरेटोरियम के एलान के बाद भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) जारी करते हुए कहा था कि जिन कर्जदारों की आय पर फर्क नहीं पड़ा है, उन्हें अपनी ईएमआई समय पर भुगतान करनी चाहिए. आईबीए ने कहा था कि अगर आपकी आय प्रभावित हुई है तो आप आरबीआई के राहत उपाय का लाभ उठा सकते हैं. हालांकि, आपको ध्यान रखना चाहिए कि आप जो ईएमआई टालेंगे, उस पर मोहलत अवधि के दौरान आपको कुछ नहीं देना होगा. लेकिन उस खाते पर ब्याज लगेगा और बाद में आपको चुकाना होगा. यानी आपके कर्ज की लागत बढ़ेगी.

इसे ऐसे समझ सकते हैं

पहले मोटोटोरियम के बाद HDFC Ltd के 4 विकल्प

1. पहले विकल्प में कहा गया है कि मोरेटोरियम पीरियड में किस्त नहीं देने पर जो ब्याज बनता है, जून में उसका एक मुश्त भुगतान किया जाए.

2. दूसरे विकल्प में कहा गया है कि इस दौरान जो भी ब्याज बने, उसे लोन की बाकी रकम में जोड़ दिया जाए. और उसे बची हुई ईएमआई में बराबर से बांट दिया जाए.

Example: इसे ऐसे समझ सकते हैं कि मान लें कि आपने करीब 29 लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए लिया है. इस पर मंथली बनने वाली ईएमआई 25225 रुपये के करीब होती है. अबतक आप 12 किस्त चुका चुके हैं और 228 किस्तें बाकी हैं. अब अगर आप मोरेटोरियम का विकल्प चुनकर 3 माह ईएमआई टालते हैं तो 3 महीने बाद आपकी ईएमआई 25225 की जगह 25650 रुपये के करीब हो जाएगी. यहां आपकी ईएमआई की बची अवधि 228 ही रहेगी.

3. तीसरा विकल्प यह है कि ईएमआई को न बदला जाए लेकिन लोन की अवधि बढ़ा दी जाए.

Example: उपर जो उदाहरण दिया गया है, उसी कंडीशन में अगर ईएमआई बढ़ाने का विकल्प लेते हैं तो उनमें बची ईएमआई की अवधि 228 की जगह 238 हो जाएगी. यानी आप पर 7 ईएमआई का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा. या ऐसे समझ लें कि आपकी ईएमआई की अवधि 10 महीने बढ़ा दी जाएगी.

4. चौथा विकल्प यह है कि आप पहले की तरह सामान्य तौर पर ईएमआई कटने दें.

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