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SBI Savings account: इस तरह अब से स्टेट बैंक सेविंग्स अकाउंट में 1 लाख रुपये से ज्यादा के अमाउंट पर 0.25-0.75 फीसदी तक कम ब्याज मिलेगा.

Updated: May 01, 2019 8:09 AM
sbi to reduce interest rate on saving account above 1 lakh deposit from 1st mayRBI द्वारा पॉलिसी रेट घटाते या बढ़ाते ही कस्टमर्स के लिए लोन भी तुंरत सस्ते या महंगे हो जाएंगे.

SBI Savings Account New Rules: अगर आपने SBI में सेविंग्स अकाउंट खुलवा रखा है और इसमें डिपॉजिट 1 लाख रुपये से ज्यादा है तो अलर्ट हो जाएं. SBI में 1 मई से 1 लाख रुपये से ज्यादा के ​सेविंग्स डिपॉजिट पर ब्याज दर घट गई हैं. इसकी वजह RBI द्वारा अप्रैल में रेपो रेट में की गई कटौती है. दरअसल, SBI ने एक्सटर्नल बेंचमार्किंग नियम को अपनाते हुए सेविंग्स डिपॉजिट और अल्पकालिक कर्ज दरों को RBI रेपो रेट से जोड़ दिया है. इसके चलते RBI द्वारा रेपो रेट में की गई 0.25 फीसदी कटौती का लाभ SBI के कस्टमर्स को तुरंत मिलेगा.

बैंक अलग-अलग अवधि वाले कर्ज के लिए MCLR में 0.05 फीसदी की कटौती कर चुका है, जो 10 अप्रैल 2019 से लागू हो गई थी. साथ ही 30 लाख रुपये तक के होम लोन पर ब्याज दर में 0.1 फीसदी की कटौती की है. अब 30 लाख रुपये तक के लोन के लिए ब्याज दर 8.60 फीसदी से 8.90 फीसदी सालाना तक होगी. ‘जब दूसरे डर रहे हों तो आप लालची बन जाएं’, शेयर बाजार से कमाई के 20 गोल्डेन टिप्स

1 लाख से ज्यादा के सेविंग्स डिपॉजिट पर ब्याज?

अब रेपो रेट में कटौती के अनुरूप SBI में यानी 1 मई 2019 से सेविंग्स अकाउंट के लिए दरें रिवाइज किया है. इसके तहत 1 लाख रुपये से ज्यादा के डिपॉजिट वाले सेविंग्स अकाउंट के लिए ब्याज दर रेपो रेट से 2.75 फीसदी कम होगी. कटौती के बाद मौजूदा रेपो रेट 6 फीसदी है. इस लिहाज से SBI सेविंग्स अकाउंट की नई दरें इस तरह होंगी:-

  • 1 लाख रुपये तक की जमा पर 3.50 फीसदी सालाना
  • 1 लाख रुपये से ज्यादा की जमा पर रेपो रेट से 2.75 फीसदी कम, यानी 3.25 फीसदी सालाना

SBI सेविंग्स अकाउंट पर मौजूदा ब्याज दर

इस तरह अब से स्टेट बैंक सेविंग्स अकाउंट में 1 लाख रुपये से ज्यादा के अमाउंट पर 0.25-0.75 फीसदी तक कम ब्याज मिलेगा.

क्या है एक्सटर्नल बेंचमार्किंग?

एक्सटर्नल बेंचमार्किंग नियम के तहत लोन में ‘फ्लोटिंग’ (परिवर्तनीय) ब्याज दरें रेपो रेट या गवर्मेंट सिक्योरिटी में निवेश पर यील्ड जैसे बाहरी मानकों से संबद्ध की जाएंगी. इसका फायदा यह होगा कि RBI द्वारा पॉलिसी रेट घटाते या बढ़ाते ही कस्टमर्स के लिए लोन भी तुंरत सस्ते या महंगे हो जाएंगे. फिलहाल बैंक अपने कर्ज पर दरों को प्रिंसिपल लेंडिंग रेट (PLR), बेंचमार्क प्रिन्सिपल लेंडिंग रेट (BPLR), बेस रेट और मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) जैसे आंतरिक मानकों के आधार पर तय करते हैं.

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