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SBI लाना चाहता है फिक्स्ड-फ्लोटिंग रेट होम लोन, RBI से मांगेगा स्पष्टता: SBI चेयरमैन

रिजर्व बैंक ने बैंकों को सभी रिटेल लोन फ्लोटिंग रेट्स पर शिफ्ट करने का आदेश दिया है.

September 15, 2019 7:14 PM
SBI to move RBI to offer fixed-floating rate home-loans: rajneesh kumarImage: Reuters

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) एक ऐसा लॉन्ग टर्म होम लोन प्रॉडक्ट लाना चाहता है, जो शुरुआत में फिक्स्ड इंट्रेस्ट रेट वाला हो और बाद में फ्लोटिंग इंट्रेस्ट रेट्स में कन्वर्ट हो जाए. बैंक ऐसा करने के लिए RBI से स्पष्टता की मांग करेगा. यह बात SBI के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कही है. रिजर्व बैंक ने बैंकों को सभी रिटेल लोन फ्लोटिंग रेट्स पर शिफ्ट करने का आदेश दिया है. फ्लोटिंग रेट्स एक्सटर्नल बेंचमार्क्स जैसे रेपो रेट के जरिए तय होंगे.

कुमार ने कहा कि इस बारे में स्पष्टता की कमी है कि बैंक फिक्स्ड रेट वाले लोन प्रॉडक्ट को फ्लोटिंग रेट्स पर कैसे शिफ्ट कर सकते हैं. रेपो रेट के उतार-चढ़ाव के बारे में संकेत देते हुए SBI चेयरमैन ने कहा कि कुछ घर खरीदार अपने लोन रेट्स फिक्स्ड रखा जाना चाह सकते हैं. ऐसे खरीदारों के लिए बैंक फिक्स्ड-फ्लोटिंग प्रॉडक्ट की पेशकश कर सकता है, जहां ब्याज दर शुरुआती 5 या 10 सालों के लिए फिक्स्ड रहे और उसके बाद फ्लोटिंग हो जाए.

लंबी अवधि के लिए निश्चित ब्याज दर प्रॉडक्ट मुश्किल

बता दें कि रेपो रेट वह रेट है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. इस वक्त रेपो रेट 9 साल के निचले स्तर 5.40 फीसदी पर आ गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आम तौर पर अब बैंक अधिकतम 30 साल अवधि वाले होम लोन की पेशकश कर रहे हैं. हालांकि कुछ प्राइवेट बैंक कर्जदार की उम्र के आधार पर 35 साल के लिए होम लोन की पेशकश कर रहे हैं. संपत्ति प्रबंधन नजरिए से देखें तो 30 साल जैसी लंबी अवधि के लिए निश्चित ब्याज दर पर प्रॉडक्ट की पेशकश करना कठिन है.

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SBI में नहीं है फिक्स्ड रेट होम लोन

SBI में फ्लोटिंग रेट होम लोन प्रॉडक्ट मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट्स (MCLR) से लिंक्ड है. इसके अलावा बैंक ने हाल ही में रेपो रेट से लिंक्ड होम लोन प्रॉडक्ट की भी पेशकश की है. बैंक में कोई भी फिक्स्ड रेट होम लोन प्रॉडक्ट नहीं है.

फिक्स्ड रेट लोन 9-12 माह में होते हैं रीसेट

अभी MCLR के तहत फ्लोटिंग रेट्स लोन, ब्याज दर के उतार-चढ़ाव के हिसाब से रीसेट होते हैं. लेकिन ​फिक्स्ड रेट लोन 9-12 माह में रीसेट होते हैं. लोन के रेपो रेट से लिंक्ड होने पर उनकी ब्याज दरें, रेपो रेट में RBI द्वारा की गई कटौती-बढ़ोत्तरी के आधार पर तेजी से बदलेंगी. चीजें गिरवीं रख लोन लेने वाले कई कर्जदार आमतौर पर फिक्स्ड रेट चुनते हैं. इसकी वजह है कि EMI को लेकर निश्चितता उन्हें अपने फाइनेंसेज को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करती है.

शिफ्टिंग में SBI को नहीं हैं बड़ी दिक्कतें

एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक्ड लेंडिंग रेट्स पर रिटेल लोन शिफ्ट करने के RBI के निर्देश के बारे में कुमार ने कहा कि SBI का इस मामले में कोई ज्यादा मसला नहीं है. सबसे पहले हमने मई से रेपो रेट से जुड़े कर्ज और जमा की पेशकश शुरू की. उसके बाद अब कई प्रॉडक्ट एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े हैं.

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