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SBI RLLR Vs MCLR: होम लोन के लिए अप्लाई करने से पहले ये 4 बातें जान लें

एमसीएलआर से जुड़े होम लोन में जब होम लोन की अवधि पूरी नहीं हो जाती है तब तक EMI की रकम स्थिर रहेगी.

August 25, 2019 7:59 AM
SBI RLLR Vs MCLR difference 4 things to know before you apply for home loan1 साल का एसलीएलआर 8 से 9 फीसदी के बीच है.

कर्ज लेने वालों के लिए होम लोन में लगातार बदलाव हो रहे हैं. SBI का रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) ने होम लोन इंडस्ट्री का पेटर्न ही चेंज कर दिया है. इस बीच कर्ज लेने वालों के दिमाग में कई सवाल हैं. क्या MCLR होम लोन SBI RLLR होम लोन से बेहतर होगा? MCLR होम लोन और SBI RLLR लोन में से कैसे चुनें? MCLR और RLLR बस दो अलग-अलग शब्द हैं या होम लोन लेते वक्त वाकई कुछ महत्व है. जल्द ही, कई और बैंक RLLR होम लोन देना शुरू कर देंगे. हालांकि यह देखना होगा कि क्या आरबीआई RLLR होम लोन को अनिवार्य कर देगा. MCLR, जो कि अप्रैल 2019 में शुरू हुआ था, क्या वह बंद हो जाएगा. लेकिन, फिलहाल होम लोन लेने वाले को RLLR और MCLR होम लोन की ब्याज दर के बीच फैसला करना होता है.

बेंचमार्क और उसका असर

MCLR: बैंकों के एमसीएलआर में उसकी फंड की लागत दी होती है, जिसे बैंक हर महीने घोषित करते हैं. अच्छा करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट डिपॉजिट होने की वजह से छोटे बैंकों के मुकाबले बड़े बैंकों का कम एमसीएलआर होता है. एमसीएलआर को इंटरनल बेंचमार्क माना जाता है क्योंकि कम लागत वाले फंड जुटाने के लिए बैंक की अपनी क्षमता एमसीएलआर में एक महत्वपूर्ण फैक्टर है.

कोई भी बैंक एमसीएलआर पर उधार देता है लेकिन इससे कम पर बैंक उधार नहीं दे सकता है. होम लोन की ब्याज दरें या तो एमसीएलआर के बराबर होंगी या उससे ज्यादा होंगी. फिलहाल 1 साल का एसलीएलआर 8 से 9 फीसदी के बीच है. बैंकों के एमसीएलआर बढ़ने का मतलब है कि कर्ज लेने वाले को ज्यादा ईएमआई और ब्याज देना होगा.

RLLR: एमसीएलआर RLLR से विपरीत है. एमसीएलआर एक इंटरनल बेंचमार्क है जबकि RLLR एक एक्सटर्नल बेंचमार्क है. RLLR होम लोन में बैंकों के फंड जमा करने की अपनी लागत डायरेक्ट नहीं होती है. बैंकों के RLLR से RLLR होम लोन में दिया होम लोन का इंटरेस्ट रेट जोड़ा जाता है. RBI के रेपो रेट पर RLLR निर्भर होता है. RBI द्वारा रेपो रेट में किसी भी तरह के बदलाव का असर RLLR पर पड़ता है. रेपो रेट में कटौती होने से RLLR भी कम हो जाता है.

ईएमआई पर असर

MCLR: एमसीएलआर से जुड़े होम लोन में जब होम लोन की अवधि पूरी नहीं हो जाती है तब तक EMI की रकम स्थिर रहेगी. ऐसे लोन्स में प्रिंसिपल रिपेमेंट के मुकाबले शुरुआती वर्षों में इंटरेस्ट का हिस्सा ज्यादा होता है.

RLLR: RLLR लोन में मूलधन की रकम एक समान रहती है लेकिन ब्याज दरें बदलती रहती है. SBI के RLLR loan में कर्ज के मूलधन की रकम का 3 फीसदी हर महीने की EMI में चुकाना पड़ता है. प्रिंसिपल रिपेमेंच लोन की अवधि और रकम पर निर्भर करता है.

रीसेट पीरियड पर असर

MCLR: एमसीएलआर होम लोन में रीसेट पीरियड 12 महीने का होता है जबकि कई बैंक 6 महीने का रीसेट पीरियड भी उपलब्ध कराते हैं. जब लोन की अवधि 6 महीने या 1 साल पूरी करती है बैंक के एमसीएलआर के हिसाब से EMI में बदलाव किए हैं. आमतौर पर RBI हर 6 महीने में रेपो रेट पर निर्णय लेता है. इसलिए रेपो रेट में किसी भी तरह के बदलाव तुरंत असर होम लोन पर नहीं पड़ता है. टाइम लैग के कारण इन्हें 1 साल के लिए फिक्स लोन कहा जा सकता है.

RLLR: RLLR होम लोन में रेपो रेट में किसी भी तरह के बदलाव का असर तुरंत नजर आता है. रेपो रेट कम होने से इंटरेस्ट रेट कम होगा और रेपो रेट बढ़ने से इंटरेस्ट रेट बढ़ जाएगा.

मार्क अप कैसे अलग है?

MCLR: MCLR लोन में, बैंक एक मार्क-अप, स्प्रेड या मार्जिन चार्ज कर सकते हैं. मान लिजिए बैंक का MCLR 8.5 फीसदी है, तो वह मार्क-अप के 50 बेसिस प्वॉइंट के फैक्टरिंग के बाद 9 फीसदी पर उधार दे सकता है. लोन की रकम, लोन-टू-वैल्यू, कर्ज का अवधि, रिस्क या लोन लेने वाले का जेंडर आधार पर यह स्प्रेड मार्जिन अलग हो सकता है.

RLLR: SBI RLLR में अभी तक, स्प्रेड कर्ज की रकम और कर्ज लेने वाले के रिस्क ग्रुप के अनुसार है. 1 सितंबर से लागू, एसबीआई का आरएलएलआर 7.65 फीसदी है और स्प्रेड 40 बेसिस प्वॉइंट और 110 बेसिस प्वॉइंट के बीच है. यह स्प्रेड कर्ज की राशि और रिस्क ग्रुप पर निर्भर करता है.

Story By: Sunil Dhawan

 

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