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Tax Talk: ITR फाइल करते समय रहें सावधान, सभी टैक्सपेयर्स को नहीं मिलती यह सुविधा

Tax Talk: आईटीआर फाइल करने से पहले पुराने या टैक्स विकल्प का चयन सावधानी से करना चाहिए क्योंकि सभी टैक्सपेयर्स को हर साल इसे बदलने की सुविधा नहीं मिलती है.

Updated: Oct 11, 2021 2:10 PM
Salaried or earning from business and profession Not everyone can change Income Tax regimes every yearटैक्सपेयर्स को ITR File करने से पहले अब दो विकल्पों में किसी एक का चयन करना होता है. फाइलिंग के लिए वे चाहें तो पुराने टैक्स सिस्टम को चुनें या नया टैक्स सिस्टम, यह उनके ऊपर निर्भर करता है.

New vs old Income Tax regime Change Rules: टैक्सपेयर्स को ITR File करने से पहले अब दो विकल्पों में किसी एक का चयन करना होता है. फाइलिंग के लिए वे चाहें तो पुराने टैक्स सिस्टम को चुनें या नया टैक्स सिस्टम, यह उनके ऊपर निर्भर करता है. हालांकि आयकर नियमों के तहत जिन्हें वेतन से आय होती है और उन्हें किसी भी कारोबार या पेशे से आय नहीं होती है, वे हर साल आईटीआर फाइल करने से पहले अपने लिए पुराने और नए टैक्स सिस्टम में किसी एक का चयन कर सकते हैं. सालाना वेतन, आय और डिडक्शंस को ध्यान में रखते हुए अपने लिए सही टैक्स विकल्प का चयन करना चाहिए. इसके विपरीत जिन्हें कारोबार या पेशे से आय होती है, उन्हें सावधानी पूर्वक पुराने व नए टैक्स सिस्टम में किसी एक को चुनना चाहिए क्योंकि उन्हें इसे विदड्रॉ करने का मौका सिर्फ एक बार मिलता है.

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आईटीआर से पहले फॉर्म 10 आईई से विकल्प चुनने का मौका

डीवीएस एडवाइजर्स एलएलपी के पार्टनर सुंदर राजन टीके ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि आईटीआर फाइल करने से पहले एक फॉर्म 10 आईई भरकर पुराने या नए टैक्स सिस्टम में किसी एक विकल्प को चुना जा सकता है. आरएसएम इंडिया के फाउंडर डॉ सुरेश सुराना के मुताबिक आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक साल आईटीआर फाइल करने के लिए चुने गए पुराने या टैक्स सिस्टम में अगले वर्षों में बदलाव की सुविधा कारोबार व पेशे से कमाने वालों को सिर्फ एक बार मिलेगी जबकि जिन्हें वेतन से आय होती है, वे हर साल इसमें अपने मुताबिक विकल्पों का चयन कर सकेंगे.

कौन-सा टैक्स सिस्टम है बेहतर

पुराने या नए टैक्स सिस्टम में कौन सा विकल्प आपके लिए बेहतर है, इसका फैसला डिडक्शंस पर निर्भर करता है जिसका क्लेम किया जाना है. राजन के मुताबिक नए टैक्स सिस्टम में कम दरों पर टैक्स चुकाना होता है लेकिन फिर 50 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन, प्रोफेशनल टैक्स, एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस), लीव ट्रैवल कंसेशन, होम लोन पर ब्याज, एलआईसी प्रीमियम, पीएफ खाते में जमा पैसे, बचत खाते की जमा राशि पर मिले ब्याज इत्यादि पर एग्जेंप्शंस व डिडक्शंस का फायदा नहीं मिलता है.
उदाहरण के लिए मान लें कि आपकी सालाना आय 10 लाख रुपये है और आप 50 हजार रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शंस के अलावा 1.5 लाख रुपये तक के डिडक्शंस (एलआईसी प्रीमियम, पीएफ खाते में जमा पैसे, बचत खाते की जमा राशि पर मिले ब्याज पर) का दावा करते हैं तो पुरान टैक्स सिस्टम से सेस समेत कुल टैक्स देनदारी 75400 रुपये की बनेगी जबकि नए टैक्स सिस्टम में सेस समेत 78 हजार रुपये का टैक्स चुकाना होगा. अगर 50 हजार रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन समेत 187500 रुपये से कम का डिडक्शन है तो नया टैक्स सिस्टम बेहतर है.
(आर्टिकल: राजीव कुमार)

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