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Financial Plan Guide: लंबी अवधि के लिए बना रहे हैं फाइनेंशियल प्लान, Mutual Fund मजबूत करेगा पोर्टफोलियो

सही तरीके से Financial Plan करें तो बच्चों की पढ़ाई, शादी से लेकर खुद की रिटायरमेंट की बेहतर प्लानिंग कर सकते हैं और लाइफ टेंशन फ्री बना सकते हैं.

November 25, 2018 8:17 AM
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फाइनेंशियल प्लानिंग का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है. अगर सही तरीके से प्लान करें तो बच्चों की पढ़ाई, शादी से लेकर आप खुद की रिटायरमेंट की बेहतर प्लानिंग कर सकते हैं और लाइफ टेंशन फ्री बना सकते हैं. इसके लिए आपको लंबी अवधि के लिए अपने टारगेट रखने होंगे. हालांकि फाइनेंशियल प्लानिंग में हर किसी के लिए एक जैसी गाइडलाइन नहीं हो सकती है. यह अलग अलग शख्स के लिए उसकी इनकम, उम्र या उसके लक्ष्य के आधार पर तय होती है.

फिलहाल फाइनेंशियल प्लानिंग कर रहे हैं तो इसके लिए म्यूचुअल फंड एक बेहतर विकल्प हो सकता है. म्यूचुअल फंड्स प्रोफेशनली मैनेज्ड और डाइवर्सिफाइड इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट होते हैं जो कई तरह के जोखिम से रक्षा भी करते हैं. आमतौर पर इन्हें इक्विटी से सेफ माना जाता है क्योंकि फंड हाउस अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट में पैसे निवेश करते हैं. प्रोफेशनल्स द्वारा मैनेज किए जाने से सुरक्षा और बढ़ जाती है.

निवेश के पहले ध्यान रहे ये बात

तय करें फाइनेंशियल गोल

पहले तो ये तय करें कि आपका लक्ष्य क्या है. आपको 30 साल बाद अपने रिटायरमेंट के लिए निवेश करना है या 15 साल बाद बच्चों की पढ़ाई या उनकी शादी के लिए प्लान करना है या 10 साल बाद घर या कार खरीदने के लिए. आपके लक्ष्य तय हो जाएं, उस आधार पर यह तय करना चाहिए कि किस तरह के फंड आपकी मदद कर सकते हैं.

लक्ष्य तय होने पर आपको यह भी पता चल जाएगा कि आपको कितने समय के लिए निवेश करना है. फिलहाल लंबी अवधि की बात करें तो कम से कम 7 साल का नजरिया जरूर रखना चाहिए. इससे उपर समय कितना भी ज्यादा रख सकते हैं. समय तय होने से म्यूचुअल फंड का चुनाव करना आसान हो जाता है.

कितना ले सकते हैं जोखिम

फाइनेंशियल गोल तय करने के बाद आपको यह देखना चाहिए कि आप कितना जोखिम ले सकते हैं. अगर आपके पास निवेया करने के लिए समय कम है तो ज्यादा जोखिम नहीं लेने की कंडीशन बनती है. वहीं अगर आप 7 साल या इससे ज्यादा का नजरिया रखते हैं तो यहां ज्यादा जोखिम वाले फंड का चुनाव कर सकते हैं. हालांकि यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि आपका लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब आपको रेग्लुलर रिटर्न मिलता रहे. इसलिए सही फंड का चुनाव करना जरूरी है.

कितना कर सकते हैं निवेश

एक और खास बात ध्यान रखना जरूरी है कि आपके निवेश करने की क्षमता क्या है. इसके लिए आपको देखना होगा कि मंथली आप कितना सेविंग्स निवेश कर सकते हें या आने वाले दिनों में निवेश कितना बढ़ा सकते हैं.

किस तरह के फंड में करना चाहिए निवेश

अगर लंबी अवधि के लिए प्लानिंग करनी है तो इसके लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं. इक्विटी म्यूचुअल फंड में भी कई विकल्प है, जैसे मल्टी कैप फंड, लॉर्जकैप फंड, लॉर्ज एंड मिड कैप फंड, मिडकैप फंड, स्मालकैप फंड, सेक्टोरल फंड, इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम, फोकस्ड फंड और डिविडेंड यील्ड फंड.

कौन से फंड चुनें

डाइवर्सिफाई इक्विटी फंड

डाइवर्सिफाई इक्विटी फंड सेकंडरी मार्केट में बिना सेक्टर या कंपनी का साइज देखे अलग अलग कंपनियों में निवेश करते हें. इनमें लॉर्जकै, मिडकैप या स्मालकैप कंपनियां हो सकती हैं. वहीं, हेल्थ, आईटी, आॅटो, आॅयल एंड गैस, पावर, बैंकिग या फाइनेंशियल सेक्टर होते हैं. इसका फायदा है कि अगर एक सेक्टर में गिरासवट है तो दूसरे सेक्टर में ग्रोथ का फायदा मिल सकता है.

ELSS

ELSS एक टैक्स सेविंग्स स्कीम है. यह एक डेडिकेटेड म्यूचुअल फंड स्किम हैं जो इन्वेस्टर्स को टैक्स बचाने में मदद करती है. यह लंबी अवधि में निवेश को बढ़ाने के लिए बेहतर माना जाता है. इक्विटी और इक्विटी से संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स में मिनिमम इन्वेस्टमेंट कुल एसेट्स का 80 फीसदी होना चाहिए. इसमें लॉक इन पीरियड 3 साल का होता है, वहीं पीपीएफ या एनएससी के मुकाबले इनमें बेहतर रिटर्न मिलता है.

सेक्टर फंड

सेक्टर फंड उन कंपनियों के स्टॉक्स में इन्वेस्ट करते हैं जो किसी खास सेक्टर मसलन आईटी, फार्मा, बैंकिंग, एफएमसीजी, आॅटो, रियल्टी, पावर, एनर्जी या फाइनेंशियल से जुड़ें होते हैं. फंड हाउस इस बात की स्टडी करने के बाद ​ही निवेश करते हैं, कि इस सेक्टर में ग्रोथ आएगी या नहीं. हालांकि यह सेग्मेंट दूसरे इक्विटी फंड के विकल्पों से थोड़ा रिस्की है, लेकिन अगर सही स्टडी के बाद निवेश किया जाए तो रिटर्न ज्यादा मिल सकता है.

(Note: लेखक नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी फिनवे के फाउंडर और सीईओ रचित चावला हैं.)

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