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डाकघर जीवन बीमा: लैप्स हो चुकी है पॉलिसी, दोबारा चालू कराने के लिए 31 अगस्त तक है मौका

अगर आपने पोस्ट ऑफिस से जीवन बीमा कराया हुआ है और पिछले 5 साल से प्रीमियम नहीं भरा है तो डाक विभाग एक अच्‍छा अवसर लेकर आया है.

Published: July 7, 2020 1:13 PM
Revive your lapsed policies of Postal Life Insurance (PLI) and Rural Postal Life Insurance (RPLI) by 31 august 2020  in which premium have not been paid during last 5 yearsइसके लिए नजदीकी पोस्ट ऑफिस में संपर्क करना होगा.

अगर आपने पोस्ट ऑफिस से जीवन बीमा (Life Insurance) कराया हुआ है और पिछले 5 साल से प्रीमियम नहीं भरा है तो डाक विभाग एक अच्‍छा अवसर लेकर आया है. डाक विभाग 5 साल से प्रीमियम न भरने के कारण लैप्स हो चुकी पॉलिसी को फिर से रिवाइव कराने का मौका दे रहा है. ऐसा 31 अगस्त 2020 तक कराया जा सकता है.

इंडिया पोस्ट ने ट्वीट कर कहा है कि पिछले 5 साल से प्रीमियम न भरे जाने के कारण पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस (PLI) और रूरल पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस (RPLI) की लैप्स हो चुकी पॉलिसी को 31 अगस्त 2020 तक रिवाइव यानी फिर से चालू कराया जा सकता है. इसके लिए नजदीकी पोस्ट ऑफिस में संपर्क करना होगा.

क्या है पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस?

पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस (PLI) पहले केवल सरकारी और सेमी-गवर्मेंट कर्मचारियों के लिए उपलब्ध था, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), वित्तीय संस्थान और नेशनलाइज्ड बैंक शामिल हैं. हालांकि साल 2017 से PLI के अंदर आने वाली लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, मैनेजमेंट कंसल्टेंट, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट, वकील, बैंकरों व कर्मचारियों आदि के लिए और NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) व BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) की लिस्टेड कंपनियों के कर्मचारियों के लिए उपलब्ध करा दिया गया है. वहीं
RPLI गांव के लोगों के लिए है.

डाकघर के बीमा के फीचर्स

PLI और RPLI स्कीम्स में कई अलग-अलग पॉलिसी हैं, जिनके अलग-अलग फायदे हैं. हालांकि इनके कॉमन फीचर्स इस प्रकार हैं…

  • 10 लाख रुपये तक लाइफ इंश्योरेंस ले सकते हैं. 55 साल तक की उम्र के लोग लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद सकते हैं.
  • अगर छह साल तक पॉलिसी बदलने का ऑप्शन पॉलिसीहोल्डर नहीं चुनता है तो पॉलिसी को पूरी लाइफ के लिए इंश्योरेंस माना जाएगा.
  • इस इंश्योरेंस पॉलिसी पर जरूरत पड़ने पर लोन भी लिया जा सकता है.
  • तीन साल के बाद पॉलिसी को सरेंडर भी किया जा सकता है.
  • हालांकि अगर ग्राहक पॉलिसी के पांच साल पूरे होने से पहले इस पर लोन लेता है या पॉलिसी सरेंडर करता है तो उसे PLI पर बोनस नहीं मिलेगा.
  • पॉलिसी में नॉमिनी बदलने की भी सुविधा है.
  • अगर पॉलिसी लिए 3 साल पूरे नहीं हुए हैं और पॉलिसीहोल्डर ने लगातार छह बार तक प्रीमियम डिफॉल्ट किया है यानी नहीं भरा है तो इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स की कैटेगरी में चली जाती है. इसी तरह अगर पॉलिसी तीन साल से ज्यादा समय से एक्टिव है और उसके बाद 12 बार प्रीमियम नहीं जमा होता है तो उसे लैप्स मान लिया जाता है.
  • पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस पर इनकम टैक्स एक्ट के तहत छूट हासिल कर सकते हैं. पॉलिसी को देश के किसी भी सर्किल में ट्रांसफर किया जा सकता है.
  • भारतीय डाक के इस लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए प्रीमियम का भुगतान सालाना, छमाही या मासिक आधार पर भी किया जा सकता है. प्रीमियम किसी भी वर्किंग डे में कर सकते हैं.

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