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Retirement Planning: पीएफ और ग्रेच्यूटी के पैसों का ऐसे करें इस्तेमाल, सटीक रणनीति से बुढ़ापे में पैसों की किल्लत होगी खत्म

Retirement Planning: इन पांच तरीकों से आप अपने रिटायरमेंट को बेहतर बना सकते हैं. पीएफ खाते में अधिक पैसे सुनिश्चित कर मासिक पेंशन को बढ़ा सकते हैं.

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अगर जीवन भर की पूंजी एंप्लाईज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ग्रेच्यूटी को सटीक रणनीति से मैनेज किया जाए तो अपनी रिटायर होने के बाद अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया जा सकता है.

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद अपनी रोज की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिकतर लोग हर महीने मिलने वाली पेंशन पर निर्भर रहते हैं. हालांकि अगर जीवन भर की पूंजी एंप्लाईज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ग्रेच्यूटी को सटीक रणनीति से मैनेज किया जाए तो अपनी रिटायर होने के बाद अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया जा सकता है. अपने रिटायरमेंट के लिए योजना बनाते समय अपनी जीवन भर की बचत पर ध्यान देना चाहिए. आप इन पांच तरीकों से अपने रिटायरमेंट को बेहतर बना सकते हैं और पीएफ खाते में अधिक पैसे सुनिश्चित कर मासिक पेंशन को बढ़ा सकते हैं.

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ईपीएफ खाते में पैसे बढ़ने दें

मौजूदा दौर में डेट फंडों में सबसे अधिक ब्याज ईपीएफ पर मिल रहा है. इस पर अभी ब्याज दर 8.5 फीसदी है. आखिरी कामकाजी दिन के बाद आपके ईपीएफ में जमा पैसे पर 36 महीने क ब्याज मिलता है यानी कि अगर आपने 31 मार्च 2022 तक काम किया तो ईपीएफ खाते में जमा पैसे पर इस खाते के बंद होने से पहले तीन वित्त वर्षों- वित्त वर्ष 2022, वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2024 के लिए ब्याज मिलेगा. ईपीएफ खाते में जमा पैसे पर चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है यानी कि आपको न सिर्फ मूल जमा पैसे पर ब्याज मिलता है बल्कि ब्याज पर भी ब्याज मिलता है. ऐसे में अगर आपको पैसे की बहुत जरूरत न हो तो ईपीएफ फंड से पैसे निकालने की गलती न करें. तीन साल के बाद आप ईपीएफ खाते से पूरा पैसा निकाल सकते हैं या थोड़ा-थोड़ा कर पैसे निकाल सकते हैं ताकि बचे पैसों पर ब्याज मिलता रहे.

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अपनी वित्तीय देनदारियों का निपटारा करें

अपनी सभी वित्तीय देनदारियों का जल्द से जल्द निपटारा करें जैसे कि होम लोन, कार लोन या अन्य किसी कर्ज की किश्त बची है तो इसे जल्द से जल्द चुकता करें. इसे एकमुश्त चुकाने के लिए अपने पीएफ और ग्रेच्यूटी की रकम का इस्तेमाल कर सकते हैं या रेगुलर प्री-पेमेंट्स का विकल्प चुन सकते हैं.

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हाई रिस्क वाले विकल्पों में निवेश से बचें

अपने रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से विभिन्न एसेट क्लासेज में अपने पैसे लगाएं. इसका मतलब हुआ कि अगर आप अधिक रिस्क नहीं उठा सकते हैं तो अधिक रिटर्न के चलते में हाई रिस्क वाले विकल्प में पैसे लगाने से बचना चाहिए. इसके लिए कम से मॉडेरेट रिस्क वाले डेट ओरिएंटेड प्रोडक्ट्स को चुन सकते हैं. इसके लिए आप पीपीएफ, म्चूयुअचल फंड्स की बैलेंस्ड एडवांटेड स्कीम्स, डेट ओरिएंटेड हाइब्रिड म्यूचुअल फंड स्कीम्स और पोस्ट ऑफिस सेविंग्स में एकमुश्त निवेश जैसे विकल्पों पर गौर कर सकते हैं.

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रेगुलर कैश फ्लो सुनिश्चित करें

मासिक पेंशन के अलावा नियमित तौर पर ब्याज या डिविडेंड पेमेंट के जरिए रेगुलर कैश फ्लो जरूर सुनिश्चित करें. अपनी जरूरतों के मुताबिक पोस्ट ऑफिस सेविंग्स में मासिक या तिमाही ब्याज भुगतान के विकल्प पर गौर कर सकते हैं. जैसे कि सीनियर सिटीजंस सेविंगस स्कीम (SCSS) में 5 साल के लिए 10 लाख रुपये का निवेश करते हैं तो मौजूदा 7.4 फीसदी की ब्याज दर के हिसाब से आपको हर तिमाही 18500 रुपये मिलेंगे. इस प्रकार पांच साल में आपको 3.70 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में मिल जाएंगे और 5 लाख की आपकी पूंजी भी आपको मिल जाएगी. इसी प्रकार आप या तो डिविडेंड ऑप्शन चुन सकते हैं या म्यूचुअल फंड निवेश में सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) के विकल्प को जोड़ सकते हैं.

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इमरजेंसी फंड बनाएं और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदें

किसी भी आकस्मिक खर्चे के लिए इमरजेंसी फंड को तैयार करना बहुत जरूरी है. रिटायरमेंट के बाद कम से कम 5 लाख रुपये आपके पास नगदी के रूप में तुरंत उपलब्ध हो सके, इसका इंतजाम जरूर होना चाहिए. इस पैसे का इस्तेमाल किसी मेडिकल इमरजेंसी या अन्य किसी विशेष जरूरतों के लिए किया जा सकता है. इस पैसे को रेगुलर बैंक डिपॉजिट या लिक्विड म्यूचुअल फंड स्कीम में रखा जा सकता है. मेडिकल खर्चों को लेकर एक और तैयारी बहुत जरूरी है, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदना. आपके पास बेहतर कवरेज वाली हेल्थ पॉलिसी जरूर होनी चाहिए ताकि मेडिकल से जुड़े खर्च अधिक वित्तीय भार न डाल सके.

(आर्टिकल: आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंकबाजारडॉटकॉम)

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