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घर खरीदने से पहले इन 10 बातों को समझ लें, आसानी से मिल जाएगा पजेशन

अंतिम निवेश करने से पहले हमें लोकेशन, सुविधाएं, इन्फ्रास्ट्रक्चर, माहौल, कमर्शियल सेंटर, परिवहन सुविधाएं और सबसे जरुरी बजट पर ध्यान रखना चाहिए.

September 7, 2018 12:21 PM
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हममें से कई खुद का घर बनाने या खरीदने का सपना देखते हैं. चूंकि यह बहुत बड़ा निवेश है इसलिए घर खरीदारों को लागत, सरकारी नीतियों, लोन प्लान पर टैक्स आदि का पूरी सावधानी से आकलन करना चाहिए. इसलिए, घर लेने की पूरी प्रक्रिया को कम स्ट्रेसफुल बनाने के लिए हम आपको कुछ प्रमुख चीजें बता रहें हैं जिस पर ध्यान देना जरूरी है. आइये जानते हैं:

रिसर्च

बेहतर रिसर्च से आप अपने सपनों के घर तक जल्दी पहुंच सकते हैं. दिन बीत गए जब घर खरीदने का फैसला काफी हद तक रियल एस्टेट एजेंटों से प्रभावित हुआ करता था. मौजूदा वक्त में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खरीद के निर्णय को डिफाइन करते हैं, जिससे उन्हें एक बेहतर खरीदारी अनुभव मिलता है. अब कोई व्यक्ति हरेक क्राइटेरिया और जरूरतों के आधार पर एवुलेएट और कंपेयर कर सकता है. मौजूदा वक्त में, खरीदारों का निवेश निर्णय मुख्य रूप से आधुनिक सुविधाओं पर आधारित रहता है. ऑनलाइन भी आप संपत्ति की कीमत, संपत्ति प्राप्त करने की पप्रोसेस, लेनदेन के दौरान जरूरी डाक्यूमेंट्स के बारे में जानकारी जमा कर सकते हैं.

यह सलाह दी जाती है कि पाइपलाइन, कंस्ट्रक्शन और सेफ इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं की जांच करें. संपत्ति खरीदने से पहले संपत्ति के फायदे और नुकसान पर जरुर गौर करें.

जगह

कई बार हम जल्दीबाजी में घर के लोकेशन पर ध्यान नहीं देते हैं लेकिन घर चुनने से पहले लोकेशन का ध्यान जरुर रखें. प्राइम लोकेशन जहां से इकॉनोमिक पार्क, एजुकेशनल इंस्टिट्यूट, हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, हॉस्पिटल की दूरी कम से कम हो. घर लेने से पहले लोकेशन फैक्टर को तवज्जो देनी चाहिए.

लाइफस्टाइल की जरूरतें

आज, घर में निवेश करने का निर्णय अधिकतर लाइफस्टाइल की जरूरतों से प्रभावित है. इसलिए, अंतिम निवेश करने से पहले हमें लोकेशन, सुविधाएं, इन्फ्रास्ट्रक्चर, माहौल, कमर्शियल और मनोरंजक केंद्र, परिवहन सुविधाएं, और सबसे जरुरी बजट पर ध्यान रखना चाहिए.

फाइनेंशियल एसेसमेंट और पूंजी

ऊपर दिए गए तीन प्रमुख फैक्टर पर विचार करने के बाद, किसी को सावधानीपूर्वक बजट का विश्लेषण करना चाहिए, वैल्यू फॉर मनी और खरीद के दौरान फाइनेंशियल कमिटमेंट, कंस्ट्रक्शन और पोस्ट ऑक्यूपेशन का ध्यान रखना चाहिए.

यह याद रखना जरुरी है कि सिर्फ अग्रीमेंट वैल्यू, अंतिम वैल्यू नहीं होती है. GST, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्जेज, मेंटेनेंस चार्जेज के अलावे पार्किंग, कॉर्पस, लीगल चार्जेज आदि जैसी कई और चार्जेज भी देने होते है और इनका भी ध्यान रखना चाहिए.

फाइनेंशियल एसेसमेंट और पूंजी की उपलब्धता

ऊपर दिए गए तीन प्रमुख फैक्टर पर विचार करने के बाद, किसी को सावधानीपूर्वक बजट का विश्लेषण करना चाहिए, वैल्यू फॉर मनी और खरीद के दौरान फाइनेंशियल कमिटमेंट, कंस्ट्रक्शन और पोस्ट ऑक्यूपेशन का ध्यान रखना चाहिए.

यह याद रखना जरूरी है कि सिर्फ अग्रीमेंट वैल्यू, अंतिम वैल्यू नहीं होती है. GST, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्जेज, मेंटेनेंस चार्जेज के अलावा पार्किंग, कॉर्पस, लीगल चार्जेज आदि जैसी कई और चार्जेज भी देने होते है और इनका भी ध्यान रखना चाहिए.

इसके अलावा आज, पैसों की कमी के कारण निवेश का निर्णय कोई रुकावट नहीं है. कई बैंक और NBFCs हैं जो डेवलपर के साथ साझेदारी में होम लोन ऋण और कई तरह के स्कीम देते हैं. निवेशक योजना और नीति के अनुसार इंश्योरेंस भी चुन सकते हैं जो किसी अप्रत्याशित घटनाओं के मामले में बीमा द्वारा संरक्षित होती है.

निवेश का इरादा

घर खरीदना एक बेहतर निवेश है. शुरुआत करने के लिए, निवेश के प्रयोजन को समझना जरुरी है. व्यक्तिगत उपयोग के लिए घर में निवेश करने का निर्णय यूटिलिटी और सेंतिमेंट्स से प्रेरित होता है. लेकिन, जब एक घर सिर्फ निवेश के नजरिए से खरीदा जाता है तो यह चीजें जरुरी नहीं रह जाती हैं. अंतिम निवेश निर्णय लेने से पहले स्कोप ऑफ एसेट, लीगल स्टेटस और मार्केटिंग डायनामिक्स पर ध्यान देना चाहिए.

एक्स्ट्रा खर्च

खरीदार को संपत्ति अधिग्रहण संपत्ति के क्रूक्स को समझने के बाद, उसके पोस्ट ऑक्यूपेशन लागत पर भी सोचने की जरुरत है. बाद के लागतों के लिए एक प्रावधान होना जरुरी है जो कई खर्चे जैसे कि, फिट आउट कॉस्ट, इंटीरियर कॉस्ट, मेंटेनेंस कॉस्ट, इंश्योरेंस और ऋण के मामले में बंधक भुगतान आदि पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए.

डॉक्यूमेंटेशन

एक बार जब पैसों का इंतजाम हो जाए तो घर खरीददारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्होंने सभी जरुरी डाक्यूमेंट्स जमा कर लिए हैं. आपको अपने अधिकारों का पता होना चाहिए.

घर खरीदने से पहले डिटेल्ड कॉस्ट का अनुमान, कंस्ट्रक्शन के लिए एप्रूव्ड प्लान, बिल्डर द्वारा अलॉटमेंट लेटर, बिल्डिंग के लिए प्लान, कंस्ट्रक्शन के लिए लाइसेंस, सभी अथॉरिटी से NOC और वैल्यूशन रिपोर्ट और इसके साथ बाकी के सभी जरुरी डाक्यूमेंट्स की जांच-पड़ताल कर लें.

RERA को समझिए

RERA के आने के बाद, प्रॉपर्टी डेवलपर्स को अथॉरिटी के साथ रजिस्टर करने और प्रोजेक्ट के हर डिटेल को अपलोड करना होता है. इसमें टाइटल, अप्रूवल, अग्रीमेंट, डिलीवरी डेट्स, पेमेंट शेड्यूल आदि शामिल हैं. यह ग्राहक को खरीदने से पहले प्रोजेक्ट को बेहतर से समझने का मौका देता है. RERA पोर्टल पर आपको यह जानकारियां मिल जाएंगी:

  • एप्रूव्ड लेआउट प्लान
  • बिल्डिंग प्लान जो स्टेट अथॉरिटी द्वारा मंजूरी दी गई हो
  • टाइटल डाक्यूमेंट्स और टाइटल रिपोर्ट
  • कंस्ट्रक्शन के लिए अप्रूवल
  • कमेंसमेंट सर्टिफिकेट
  • डिटेल्ड कॉस्ट का अनुमान / चार्टर्ड इंजीनियर से वैल्यूशन रिपोर्ट / आर्किटेक्ट (यदि लागू हो)
  • बिल्डिंग लेआउट, कॉन्फिगरेशन और हरेक यूनिट बेचे जाने के डिटेल्स
  • कॉमन एरिया, और सुविधाएं जो मिलनी है
  • प्रोजेक्ट कंसल्टेंट्स के डिटेल्स और रजिस्टर्ड चैनल पार्टनर्स/रेलेवेंट एसोसिएशन
  • मुकदमें (यदि कोई हों तो)

ग्राहकों की सुरक्षा

RERA के आने के बाद रियल एस्टेट इंडस्ट्री बहुत पारदर्शी बना है और यह ग्राहक के हक को सुनिश्चित करता है. इससे ग्राहक को आसानी हुई है. भारत सरकार कई कदम उठा रही है जो रियल एस्टेट इंडस्ट्री को विकास और भारी निवेश को बढ़ावा देगी.

पोस्ट पोजेशन जानिए कैसे?

घर खरीदने के बाद प्रोसेस समाप्त नहीं होती है, पोस्ट पोजेशन के बॉस सभी को सावधानी बरतनी चाहिए. यह जानना जरूरी है कि आपके सभी डाक्यूमेंट्स फोटोकॉपी के साथ ढंग से संभाल कर रखे जाएं. यह भी ध्यान रखें कि सभी जरूरी पेपर वर्क/आधिकारिक डाक्यूमेंट्स नए डिटेल्स के साथ अपडेट किए गए हों.

घर खरीददारों को सावधानीपूर्वक अपने फैसलों की योजना बनानी चाहिए.

(इसकी लेखक रेशमी पनिक्कर, पीरामल रियल्टी की बिजनेस डेवलपमेंट और कस्टमर रिलेशन मैनेजमेंट की प्रेसिडेंट हैं.)

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