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RD Vs SIP: रेग्युलर बचत के लिए कौन सा विकल्प बेहतर, पहले जानें फिर करें निवेश

RD करें या म्यूचुअल फंड SIP

June 22, 2019 7:08 AM
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रेग्लुयर बचत के लिए बैंकों की रिकरिंग डिपॉजिट स्कीम के अलावा म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP के जरिए निवेश पॉपुलर विकल्प हैं. बहुत से लोग हैं, जिन्हें छोटी बचत पर भरोसा होता है और वे इसके जरिए बड़ा फंड तैयार करने पर भरोसा रखते हैं. RD और SIP दोनों के जरिए आप हर महीने अपनी बचत का कुछ न कुछ हिस्सा निवेश कर सकते हैं. अगर आपके मन में सवाल उठ रहा है कि छोटी बचत के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है तो यह रिपोर्ट आपके काम की हो सकती है.

क्या है RD

रिकरिंग डिपॉजिट (RD) एक तरह का टर्म डिपॉजिट है जो निवेशकों की रेग्युलर सेविंग की आदत को बढ़ावा देता है. इसे डाकघर से लेकर अलग अलग बैंकों में खुलवाया जा सकता है. RD अकाउंट में अलग अलग मेच्योरिटी पीरियड के लिए बैंक या डाकघर तय ब्याज देते हैं. अकाउंट का टेन्योर 6 महीने से 10 साल तक का हो सकता है. मेच्योरिटी के समय निवेशक को ब्याज के साथ रकम जोड़कर मिल जाती है. सेविंग अकाउंट के साथ RD भी खोल सकते हैं.

क्या है SIP

सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान आपको हर महीने एक निश्चित रकम को आपके पसंद की म्यूचुअल फंड्स स्कीम में डालने की सुविधा देता है. आप चाहे तो एसआईपी के जरिए हर हफ्ते भी निवेश कर सकते हैं. निवेश में अनुशासन का बहुत महत्व है. यह नियमित रूप से निवेश जारी रखता है. बाजार में तेजी हो या मंदी आपका पैसा म्यूचुअल फंड्स में जाता रहता है. मसलन, अगर आपने किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में एक निश्चित रकम हर महीने डालने का फैसला किया तो आपको इसके लिए अलग से समय निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

रिटर्न: RD Vs SIP

RD: रिकरिंग डिपॉजिट पर रिटर्न पहले से तय होता है, जो अलग अलग टेन्योर के लिए अलग अलग होता है. मसलन एसबीआई 1 साल से 2 साल तक की अवधि पर सामान्य निवेशकों को 6.8 फीसदी सालाना ब्याज दे रहा है. वहीं 2 से 5 साल तक की अवधि पर पर भी 6.8 फीसदी और 5 साल से 10 साल की अवधि पर 6.85 फीसदी ब्याज है. सीनियर सिटीजंस को समान योजना पर 7.3 फीसदी से 7.35 फीसदी तक ब्याज मिल रहा है.

म्यूचुअल फंड: म्यूचुअल फंड SIP में रिटर्न फिक्स नहीं होता है. ये योजनाएं मार्केट लिंक्ड होती हैं. वैक्से लंबी अवधि की बात करें तो कई इक्विटी म्यूचुअल फंड ने 10 साल में 15 फीसदी सालाना के लिहाज से ब्याज दिए हैं. हालांकि कई योजनाओं में ब्याज कम भी रहा है. इसी तरह से डेट म्यूचुअल फंड का औसत सालाना रिटर्न 8 से 10 फीसदी तक रहा है.

जोखिम: RD Vs SIP

RD में निवेश करने पर कोई जोखिम नहीं होता है. इसमें ब्याज दरें पहले से तय रहती हैं. इसमें किसी तरह का मार्केट रिस्क नहीं होता है.

म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिम के अधीन होते हैं. इसका रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर रहता है.

टैक्स में देनदारी: RD Vs SIP

RD पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है. अगर आपकी ब्याज आय 10 हजार रुपए से ज्यादा है, तो इस पर TDS भी देना होता है. SIP से म्यूचुअल फंड में निवेश भी टैक्सेबल होता है.

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