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कीमती चीजों के लिए खुलवाना है बैंक लॉकर; जान लें RBI के नियम, नहीं खाएंगे धोखा

लॉकर खुलवाने से लेकर उसे आॅपरेट करने के क्या नियम-कानून हैं, इसके बारे में ज्यादातर लोग अनजान होते हैं.

October 6, 2018 7:56 AM
RBI rules and guidelines for safe deposit lockers how to open and bank lockersनियमों की जानकारी के अभाव में कस्टमर बैंकों की हर बात को चुपचाप मान लेते हैं. (Representational Image)

कई लोग ज्वैलरी, प्रॉपर्टी डॉक्युमेंट्स, वसीयत आदि जैसी चीजों की सुरक्षा के लिए उन्हें बैंक के सेफ डिपॉजिट लॉकर में रखते हैं. लेकिन लॉकर खुलवाने से लेकर उसे आॅपरेट करने के क्या नियम-कानून हैं, इसके बारे में ज्यादातर लोग अनजान होते हैं. ऐसे में कुछ बैंक नियमों का हवाला देकर कस्टमर के सामने विभिन्न डिमांड रखते हैं. नियमों की जानकारी के अभाव में कस्टमर बैंकों की हर बात को चुपचाप मान लेते हैं.

जरूरी है कि बैंक लॉकर खुलवाने से पहले रिजर्व बैंक यानी RBI द्वारा लॉकर के लिए तय नियमों को जान लिया जाए. आइए आपको बताते हैं RBI के नोटिफिकेशन के मुताबिक लॉकर्स को लेकर क्‍या नियम तय किए गए हैं और बैंकों को क्‍या निर्देश हैं-

कस्टमर कैसे ले सकता है लॉकर?

सरकारी और निजी दोनों तरह के बैंक ग्राहकों को लॉकर की सुविधा देते हैं. RBI नियमों के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति किसी भी बैंक में लॉकर खोल सकता है. इसके लिए उस बैंक में खाता होना जरूरी नहीं है. लेकिन लॉकर के किराए और चार्जेस के लिए सिक्‍योरिटी डिपॉजिट का हवाला देते हुए बैंक बिना खाता लॉकर खोलने में आना-कानी करते हैं. यहीं नहीं कुछ बैंक आप पर बड़ी रकम के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करवाने के लिए भी दबाव बनाते हैं. इसलिए अच्छा होगा कि आप उसी बैंक में लॉकर लें, जहां आपका सेविंग्‍स अकाउंट है.

क्यों कहते हैं FD करवाने को?

कई बार लॉकर खुलवाने वाला न ही लॉकर का किराया बैंक को देता है, न ही लॉकर को ऑपरेट करता है. ऐसे में बैंक मुश्किल में आ जाते हैं. लॉकर लेने वाला लॉकर के किराया का समय से भुगतान करता रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए बैंक कस्‍टमर को लॉकर देते वक्‍त उन्‍हें FD खुलवाने को कहते हैं. RBI के नियमों के मुताबिक, बैंक कस्टमर को लॉकर के 3 साल के किराए और किसी कारणवश लॉकर तुड़वाने पर चार्ज वहन करने के अमाउंट जितनी FD खुलवाने के लिए कह सकते हैं. हालांकि बैंक किसी भी मौजूदा लॉकर धारक को FD खुलवाने के लिए नहीं कह सकते हैं.

सालाना किराया और चार्ज

बैंकों में लॉकर के लिए सालाना किराया तय है. यह अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग है. अगर किसी कारण से इमरजेंसी में लॉकर तोड़ना पड़े तो कस्‍टमर को उसका चार्ज भी वहन करना होता है. साथ ही लॉकर की चाबी खोने पर भी चार्ज देना होता है.

वेटिंग लिस्‍ट

लॉकर की संख्या सीमित होने के चलते बैंक आसानी से लॉकर नहीं देते हैं. कई बैंकों में तो काफी लंबा वेटिंग पीरियड होता है. RBI नियमों में वेटिंग लिस्‍ट बनाने का और लॉकर देते वक्त पार‍दर्शिता रखने का प्रावधान है. बैंकों को यह भी निर्देश है कि वह लॉकर देते वक्‍त कस्‍टमर को लॉकर के ऑपरेशन्‍स यानी उसे आॅपरेट करने को लेकर हुए एग्रीमेंट (करार) की कॉपी मुहैया कराएं.

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कैसे करते हैं ऑपरेट?

हर बैंक लॉकर की दो चाबी होती हैं. एक चाबी कस्‍टमर और दूसरी बैंक के पास होती है. दोनों चाबियां लगने के बाद ही लॉकर खुलता है. इसके अलावा कस्टमर साल में कितनी बार लॉकर आपरेट कर सकता है, इसकी भी सीमा तय है. लॉकर ​आॅपरेट करने की संख्या अलग-अगल बैंकों में अलग-अलग है. तय सीमा के बाद लॉकर ऑपरेट करने के लिए कस्टमर को चार्ज देना होता है.

अगर लॉकर नहीं है ऑपरेशनल तो बंद कर सकते हैं बैंक

RBI नियमों के मुताबिक, बैंकों को यह अधिकार है कि वे लॉकर धारकों को मीडियम रिस्‍क और हायर रिस्‍क कैटेगरी में बांट सकें. ऐसे में अगर मीडियम रिस्‍क कैटेगरी वाले कस्‍टमर ने तीन साल से ज्‍यादा वक्‍त से और हायर रिस्‍क कैटेगरी वाले ने 1 साल से ज्‍यादा वक्‍त से लॉकर ऑपरेट नहीं किया है तो बैंक उन्‍हें लॉकर ऑपरेट करने या इसे सरेंडर करने वापस बैंक को सौंपने के लिए कह सकते हैं. अगर कस्‍टमर टाइम पर लॉकर का किराया दे रहा है तो भी बैंक यह कदम उठाने के लिए मुक्‍त हैं. इसके अलावा वह लॉकर ऑपरेट न करने का कारण कस्‍टमर से लिखित में भी मांग सकते हैं. अगर कस्‍टमर इसका जवाब नहीं देता है और न ही लॉकर ऑपरेट करता है तो बैंक लॉकर कैंसिल करने का भी अधिकार रखते हैं. ऐसे में वे लॉकर तोड़ कर देखने का भी अधिकार रखते हैं.

नॉमिनी के पास है लॉकर एक्‍सेस का अधिकार

अगर लॉकर धारक अपने लॉकर के लिए नॉमिनी नियुक्‍त करता है तो बैंक को लॉकर धारक की मौत के बाद उस नॉमिनी को लॉकर एक्‍सेस करने और उसका सामान निकालने का अधिकार देना होगा. अगर लॉकर ज्‍वॉइंट में खोला गया है और खुलवाने वाले में से किसी एक ने या दोनों ने नॉमिनी नियुक्‍त किया है तो लॉकर धारकों में से किसी एक की मौत होने पर नॉमिनी दूसरे लॉकर धारक के साथ लॉकर एक्‍सेस करने का हक रखता है. हालांकि बैंक अपनी तरफ से पूरी छानबीन करने के लिए मुक्‍त हैं.

अगर लॉकर धारक या धारकों ने कोई नॉमिनी नहीं बनाया है तो बैंकों को निर्देश है कि वे लॉकर धारकों के कानूनी सलाहकार के साथ सलाह-मशविरा कर लॉकर की एक्‍सेस लॉकर धारकों के कानूनन उत्‍तराधिकारी या प्रतिनिधि को दें. अगर नॉमिनी या कानूनन उत्‍तराधिकारी लॉकर को आगे जारी रखना चाहता है तो इसके लिए नया कॉन्‍ट्रैक्‍ट बनेगा. बैंकों को यह भी निर्देश है कि वे लॉकर को नॉमिनी को देते वक्‍त उसकी चीजें खोलकर नहीं देख सकते.

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लॉकर के सामान के लिए बैंक जिम्‍मेदार नहीं

2017 में RBI ने एक RTI के जवाब में कहा था कि बैंक लॉकर्स में रखे सामान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं. हालांकि, उन्हें लॉकर्स की सुरक्षा के लिए इंतजाम करने होते हैं. साथ ही इनमें रखे कीमती सामान का इंश्योरेंस भी नहीं होता. भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा, आतंकी हमला या चोरी आदि होने पर मुआवजा मिलेगा, इसकी गांरटी नहीं होती. हालांकि अगर बैंक की लापरवाही के चलते कस्‍टमर का नुकसान हुआ है तो बैंकों को मुआवजा देना होगा. इसके लिए कस्‍टमर को बैंक का दोषी होना साबित करना होगा.

(सोर्स: https://www.rbi.org.in/scripts/NotificationUser.aspx?Id=3422&Mode=0)

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