रेपो रेट(repo rate) में किसी भी तरह की कमी कर्जदारों को खुश कर देगी क्योंकि आरबीआई के बताए गए रेट में कटौती से उनके लोन जैसे होम लोन(home loan), कार लोन(car loan) और पर्सनल लोन(persoanl loan) सस्ते हो जाएंगे. महिलाएं विशेष रूप से इस दर में कटौती का स्वागत करेंगी.
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RBI का रेट कट महिलाओं के लिए बेहतर, जानिए उन्हें कैसे मिलेगा ज्यादा फायदा

रेपो रेट(repo rate) में किसी भी तरह की कमी कर्जदारों को खुश कर देगी क्योंकि आरबीआई के बताए गए रेट में कटौती से उनके लोन जैसे होम लोन(home loan), कार लोन(car loan) और पर्सनल लोन(persoanl loan) सस्ते हो जाएंगे. महिलाएं विशेष रूप से इस दर में कटौती का स्वागत करेंगी.

February 8, 2019 2:11 PM
latest cut in rbi repo rate may welcome by womenRBI : औसतन, महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा कर्ज लेती हैं.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट (Repo Rate) को 0.25 फीसदी घटाकर 6.25 फीसदी कर दिया. रेपो रेट वो रेट है जिस पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों को लोन देता है. केंद्रीय बैंक देश में मनी सप्लाई की जांच करता है और रेपो रेट कम होने से मनी सप्लाई बढ़ती है. रेपो रेट की मदद से आरबीआई देश में महंगाई के स्तर को रेगुलेट करता है.

रेपो रेट में किसी भी तरह की कमी कर्जदारों के लिए बेहतर है क्योंकि आरबीआई के बताए गए रेट में कटौती से उनके लोन जैसे होम लोन (Home loan), कार लोन (Car loan) और पर्सनल लोन (Personal loan) सस्ते हो जाएंगे. ब्याज दरों में कटौती खासकर महिलाओं के हित में रहेगा.

पुरुषों के मुकाबले ज्यादा कर्ज लेती हैं महिलाएं

2018 में, ऐसे होम लोन में जिनमें महिलाएं प्राइमरी बारोअर यानी कर्जदार (primary borrowers) थीं, उसका औसत टिकट साइज यानी लोन की रकम 27.57 लाख रुपये थी. उसी दौर में ये ऐसे लोन जहां पुरुष प्राइमरी बोरोअर थे, उनमें औसत लोन रकम 22.97 लाख रुपये थी. सदियों से घर का मालिकाना हक पुरुषों के पास ही होता था. लेकिन नए इंडिया में ऐसा नहीं है. महिलाओं को ऐसी आर्थिक आजादी चाहिए जहां उनका घर उनके नाम पर हो.

इसी तरह का रुख प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM Mudra Yojana) में भी देखा गया था, जहां 10 लाख तक का लोन गैर कृषि से जुड़े लोगों और छोटे कारोबारियों को दिया गया था. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने खुद अपने अंतरिम बजट भाषण में घोषणा की थी, कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के लाभार्थियों में से 70% महिलाएं थीं.

महिलाओं के लिए ब्याज दरें कम

उदाहरण के लिए, एसबीआई (SBI) महिलाओं को 30 लाख रुपये तक का होम लोन 8.75% की ब्याज दर से देता है. इसमें लोन टू वैल्यू रेश्यो यानी मकान की कीमत के मुकाबले लोन की रकम, 80 फीसदी है. वहीं, दूसरे कर्जदारों के लिए समान रकम के लोन के लिए ब्याज दर 8.80 फीसदी है. महिलाओं के लिए SBI का ऑटो लोन भी पुरुषों की तुलना में 0.05 फीसदी कम है. इस वजह से, महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक उधार ले सकती हैं.

छोटे शहरों में रेट कट का स्वागत होगा

हमने यह भी देखा है कि औसत रूप से, कर्ज लेने वाले गैर-महानगरों में महानगरों की तुलना में बड़े कर्ज ले रहे हैं. 2018 में महानगरों में औसतन 2.55 लाख का पर्सनल लोन लिया गया जबकि गैर-महानगरों यह में लगभग 10% अधिक यानी 2.80 लाख रुपये था. कम ब्याज दरें उधार लेने को प्रोत्साहित करती हैं.

एक्सटर्नल बेंचमार्किंग से लोन मार्केट में आएगी हलचल

अब तक, बैंकों को लोन के लिए MCLR जैसे इंटर्नल बेंचमार्क रेट निर्धारित करने की अनुमति है. यह वह न्यूनतम ब्याज दर होता है, जिस बैंक उधार देते हैं. उदाहरण के लिए, SBI का एक साल का MCLR 8.55 फीसदी है. आने वाले अप्रैल में, बैंक आरबीआई द्वारा अनिवार्य रूप से एक एक्सटर्नल बेंचमार्क पर शिफ्ट हो जाएंगे. ये एक्सटर्नल बेंचमार्क रेपो रेट या 91-दिन या 182-दिन का सरकारी ट्रेजरी बिलों की यील्ड हो सकते हैं. यह कदम ये सुनिश्चित करने के लिए है कि RBI की ओर से ब्याज दरों में कटौती का फायदा तुरंत बैंकों के कस्टमर्स को मिले.

घर खरीदने का अच्छा समय

ब्याज दरों में कमी, एक्सटर्नल बेंचमार्किंग की पहल, PMAY के फायदों का एक साल के लिए और बढ़ना और अंतरिम बजट में घर मालिकों के लिए sops के एलान का मतलब है कि यह प्रॉपर्टी खरीदने का अच्छा समय है. यह न केवल महिलाओं और पहली बार खरीदने वालों के लिए, बल्कि दूसरा घर देख रहे लोगों के लिए भी फायदेमंद है. इस तरह देखा जाए तो 2019 फाइनेंशियल मार्केट के लिए एक रोमांचक साल साबित हो रहा है.

(इसके लेखक बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी हैं.)

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