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RBI के फैसलों से बैंक ग्राहकों पर क्या होगा असर? 4 प्वाइंट में समझें

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया.

Updated: Dec 04, 2020 8:41 PM
RBI monetary policy review decisions impact on bank customers, loan EMI, digital payment, cardless payment limit, 4 key personal finance takeaways from Reserve bank announcementsImage: PTI

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया. यह फैसला भले ही बढ़ती खुदरा महंगाई और रिकवरी मोड में चल रही इकोनॉमी को ध्यान में रखकर किया गया लेकिन इस फैसले से बैंक ग्राहकों के लिए भी कुछ चीजें जस की तस रह गईं. हालांकि, बैठक में डिजिटल पेमेंट के मोर्चे पर लिया गया एक फैसला ग्राहकों के फायदे के लिए किया गया है. आइए जरा गौर करते हैं कि आरबीआई के फैसलों का बैंक ग्राहकों पर कैसे असर पड़ा है…

रेपो रेट होम लोन की नहीं घटी EMI

चूंकि आरबीआई ने रेपो रेट को न ही घटाया और न ही बढ़ाया, इसलिए रेपो रेट से लिंक्ड होम लोन रेट में भी कोई बदलाव नहीं हुआ. लिहाजा इन रेट्स पर होम लोन लिए हुए ग्राहकों की ईएमआई भी जस की तस है. हालांकि इसमें अभी भी कटौती की गुंजाइश है लेकिन वह आपके बैंक पर निर्भर है कि वह अपनी ओर से रिस्क मार्जिन बढ़ाकर दरें कम कर दें.

MCLR लिंक्ड होम लोन रेट पर कोई असर नहीं

MCLR यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट्स को आमतौर पर बैंक हर 12 या 6 माह पर बदलते हैं. MCLR से लिंक्ड होम लोन, रेपो रेट लिंक्ड होम लोन्स से अलग होते हैं. इसलिए MCLR लिंक्ड होम लोन की ईएमआई तभी घटती है, जब बैंक अपनी पॉलिसीज के मुताबिक रीसेट पीरियड में दरें घटाते हैं. यानी रेपो रेट में कटौती या बढ़ोत्तरी से आपके MCLR लिंक्ड लोन की रेट भी घट—बढ़ जाएगी, यह जरूरी नहीं है.

FD रेट बने रहेंगे कम लेकिन और नहीं गिरेंगे

महामारी की वजह से रेपो रेट में मौजूदा अब तक हुई कटौती के चलते एफडी रेट भी कम हो गई हैं. बैंक अगर कम दरों पर ब्याज देते हैं तो वह बैलेंस बनाने के लिए एफडी पर रिटर्न भी कम कर देते हैं. एफडी पर कम ब्याज दर ऐसे ग्राहकों के लिए चिंता का विषय है जो जोखिम उठाने में सक्षम नहीं हैं, जैसे कि सीनियर सिटीजन. चूंकि आरबीआई ने रेपो रेट को अपरिवर्तित रखा है तो एफडी रेट्स में और कटौती होने की संभावना नहीं है लेकिन इनमें बढ़ोत्तरी की भी संभावना नहीं है.

डिजिटल पेमेंट को बूस्ट

लोग कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट की मदद से ज्यादा अमाउंट में और आसानी से ट्रांजेक्शन कर सकें, इसके लिए MPC की बैठक में कॉन्टैक्टलेस कार्ड ट्रांजेक्शन की लिमिट को बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन करने का फैसला किया गया है. अभी यह लिमिट 2000 रुपये है. यह बढ़ी हुई लिमिट 1 जनवरी 2021 से लागू होगी.

 

(लेखक आदिल शेट्टी BankBazaar.com के CEO हैं.)

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