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सितंबर 2010 के बाद पहली बार रेपो रेट 6% के नीचे, जानिए आप पर क्या होगा असर

RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की है. इस समय रेपो रेट 5.75 फीसदी पर है.

June 6, 2019 4:13 PM
रेपो रेट वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सभी बैंकों को कर्ज देती है.

केंद्रीय बैंक RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की है. इस समय रेपो रेट 5.75 फीसदी पर है. सितंबर 2010 के बाद से यह पहली बार है जब रेपो रेट 6.00 फीसदी के नीचे है. धीमे इंफ्लेशन और कमजोर इकोनॉमिक ग्रोथ के कारण पहले ही अनुमान लगाया जा रहा था कि आरबीआई इस बार रेपो रेट में कटौती कर सकती है. रेपो रेट वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सभी बैंकों को कर्ज देती है. रेपो रेट अधिक होने पर बैंक इसका भार ग्राहकों पर ही डालते हैं, इसलिए यह समझना जरूरी है कि आरबीआई की इस कटौती का आपकी जेब पर क्या फर्क पड़ेगा.

हालांकि, यहां यह भी जान लेना आवश्यक है कि आरबीआई ने बैंकों से रेपो रेट में कटौती का फायदा ग्राहकों को देने को कहा है लेकिन व्यवहार में इसका आंशिक फायदा ही ग्राहकों को मिलता है.

Repo Rate में कटौती का प्रभाव

होम लोन की EMI कम होगी- रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती का फायदा वर्तमान ग्राहकों को तभी मिलेगा जब कॉमर्शियल बैंक मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में भी कटौती करते हैं और आपका लोन रिसेट डेट नजदीक आ रहा है. आपके लोन की ईएमआई वर्तमान ब्याज दर पर निर्भर करती है, इसलिए आपके बैंक ने ब्याज दर में कटौती की है और आपके लोन की रिसेट डेट आने वाली है तो इसकी ईएमआई कम हो जाएगी. नए ग्राहक एमसीएलआर से लिंक्ड होम लोन लेकर इस प्रकार की कटौती का फायदा उठा सकते हैं.

FD रिटर्न में कमी, फिर भी आकर्षक- रेपो रेट में कटौती से बैंक डिपॉजिट की दरें भी कम हो जाती है और फिक्स्ड डिपॉजिट्स के रिटर्न में भी गिरावट आती है. हालांकि बैंक अपने वर्तमान ग्राहकों को बनाए रखने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला कर सकता है. वर्तमान में बैंकों की एफडी पर 7.50-8.25 फीसदी तक का ब्याज मिलता है. आप अपने वित्तीय लक्ष्य के मुताबिक एफडी में निवेश बढ़ा सकते हैं. कम ब्याज दर के बावजूद सुरक्षित विकल्प होने की वजह से एफडी में निवेश आकर्षक है.

Debt Mutual Funds पर निवेश के मुताबिक लें फैसला- डेट म्यूचुअल फंड्स का प्रदर्शन पिछले कुछ समय में बुरा रहा है क्योंकि कुछ कंपनियों ने डिफॉल्ट कर दिया है. डिफॉल्ट के बाद रेटिंग घटाए जाने के बाद म्यूचुअल फंड्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. डेट फंड्स पर लांग टर्म कैपिटल गेन्स के इंडेक्सेशन जैसे फायदे मिलते हैं. अपने डेट फंड पोर्टफोलियो में निवेश की गुणवत्ता की जांच करिए और इसके आधार फैसला करिए कि आपको इसमें बने रहना है या निकासी करना है. अगर आपका लक्ष्य शॉर्ट टर्म के लिए है तो आप आगे वोलैटेलिटी से बचने के लिए निकासी की सोच सकते हैं.

By: Adhil Shetty, CEO, BankBazaar.com 

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