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Power of Compounding: सिर्फ 1% रेट ऑफ रिटर्न के अंतर से लाखों का नुकसान, 5 लाख के निवेश पर समझिए कंपाउंडिंग की ताकत

पावर ऑफ कंपाउंडिंग के जरिए आप अपने बचत के छोटे छोटे अमाउंट से भी लंबी अवधि में एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं और अपनी तमाम जरूरतें पूरी कर सकते हैं.

अगर कंपाउंडिंग का फॉर्मूला सही से समझ लें तो आपको अपने पैसे पर कई गुना रिटर्न ​हासिल हो सकता है. (reuters)

Power of Compounding: निवेश बचत का एक अच्छा रूल पावर ऑफ कंपाउंडिंग है. निवेश में अगर कंपाउंडिंग का फॉर्मूला सही से समझ लें तो आपको अपने पैसे पर कई गुना रिटर्न ​हासिल हो सकता है. के जरिए आप अपने बचत के छोटे छोटे अमाउंट से भी लंबी अवधि में एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं और अपनी तमाम जरूरतें पूरी कर सकते हैं. इसके लिए ध्यान देना होगा कि आप फाइनेंशियल प्लानिंग जितनी जल्दी हो सके, शुरू कर दें. वहीं आपके निवेश का लक्ष्य लंबी अवधि का होना चाहिए. निवेश के पहल उन विकल्पों पर विचार जरूर करना चाहिए कि कहां रेट ऑफ रिटर्न ज्यादा मिलने की गुंजाइश है. क्योंकि लंबी अवधि में रिटर्न में 1 फीसदी के अंतर से भी आपको लाखों का नुकसान हो सकता है. फिलहाल इसका सही लाभ लेने के लिए म्यूचुअल फंड में एकमुश्त निवेश या म्यूचुअल फंड एसआईपी का विकल्प चुन सकते हैं.

क्या है पावर ऑफ कंपाउंडिंग?

इसे ऐसे समझ सकते हैं कि कहीं निवेश करने पर आपकी जो कमाई होती है, उसे भी फिर से निवेश करना कंपाउंडिंग होता है. इसमें आपको मूलधन के साथ उसके ब्याज पर भी ब्याज मिलता है. कंपाउंडिंग आपके निवेश को बढ़ाने में जहां बड़ा जरिया है. मसलन अगर आप 1 लाख रुपये निवेश करते हैं और उस पर 10 फीसदी सालाना के हिसाब से रिटर्न मिलता है तो यह एक साल बाद 110000 रुपये होगा. अगले साल इसी 110000 रुपये पर 10 फीसदी ब्याज मिलेगा. और मेच्येारिटी अवधि तक इसी तरह आपको ब्याज पर ब्याज मिलता रहेगा.

रिटर्न में 1 फीसदी के अंतर से बड़ा नुकसान

केस-1

मूलधन: 5 लाख रुपये
ब्याज दर: 7 फीसदी
अवधि: 20 साल
मेच्योरिटी पर अमाउंट: 1934842 रुपये

केस-2

मूलधन: 5 लाख रुपये
ब्याज दर: 8 फीसदी
अवधि: 20 साल
मेच्योरिटी पर अमाउंट: 2330438 रुपये

केस-3

मूलधन: 5 लाख रुपये
ब्याज दर: 9 फीसदी
अवधि: 20 साल
मेच्योरिटी पर अमाउंट: 2802205 रुपये

केस-4

मूलधन: 5 लाख रुपये
ब्याज दर: 10 फीसदी
अवधि: 20 साल
मेच्योरिटी पर अमाउंट: 3363750 रुपये

नोट: यहां साफ है कि अगर रिटर्न रेट में 1 फीसदी का अंतर रहता है तो आपके मेच्येारिटी अमाउंट पर बड़ा फर्क आ सकता है.

लंबी अवधि में फायदा ज्यादा

पावर ऑफ कंपाउंडिंग का फायदा तब ज्यादा मिलेगा, जब आपका निवेश लंबी अवधि तक का होगा. इसलिए बेहतर है कि जितनी जल्दी हो सके, निवेश और बचत पर ध्यान दिया जाए. जितनी जल्दी निवेश शुरू कर देंगे, आपको कंपाउंडिंग का उतना ही फायदा मिलेगा. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर आपने 5000 रुपये मंथली एसआईपी का प्लान 10 साल के लिए किया है. अगर आपको 10 फीसदी सालाना रिटर्न मिले तो 10 साल बाद आपको 10.5 लाख रुपये फंड मिलेगा. लेकिन अगर यह निवेश 20 साल के लिए होगा तो समान मंथली निवेश और रेट आफ रिटर्न पर मेच्योरिटी अमाउंट 38.3 लाख रुपये होगा.

(नोट: बीपीएन फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम से बातचीत पर आधारित)

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