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पोस्ट ऑफिस: स्मॉल सेविंग्स में इस महीने निवेश का है सही मौका, चूके तो हो सकता है नुकसान

अगर निवेशक को घाटे से बचना है तो उन्हें अभी से फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश कर इन ब्याज दरों को लॉक कर देना चाहिए.

September 19, 2019 11:31 AM
post office fixed deposit interest rates to lock fixed income this monthस्मॉल सेविंग्स स्कीम पर अभी भी बैंक की एफडी से ज्यादा ब्याज मिलता है.

High FD Rates: फरवरी से अब तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया 110 बेसिस प्वॉइंट रेपो रेट घटा चुका है. इसका असर बैंक की एफडी की ब्याज दरों पर भी पड़ रहा है. बैंक भी लगातार अपनी एफडी पर ब्याज दरें घटा रहा है. 10 सितंबर को देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)  ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट पर 20-25 बेसिस प्वॉइंट ब्याज दरें घटाई थी. अब अगले 15 दिनों में इन ब्याज दरों में फिर से बदलाव किया जाएगा. अगर निवेशक को घाटे से बचना है तो उन्हें अभी से फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश कर इन ब्याज दरों को लॉक कर देना चाहिए ताकि घटती ब्याज दरों का असर निवेशक के पोर्टफोलियो पर न पड़े.

स्मॉल सेविंग्स में ज्यादा ब्याज दर

इंडिया पोस्ट की स्मॉल सेविंग्स में अभी भी बैंक डिपॉजिट के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिलता है. केंद्र सरकार द्वारा हर तिमाही स्मॉल सेविंग रेट्स रिवाइज किए जाते हैं. सरकार अक्टूबर से दिसंबर के लिए दोबारा ब्याज दरों को रिवाइज कर सकती है. 1 साल के डिपॉजिट पर SBI 6.5 फीसदी का ब्याज देते हैं. लेकिन पोस्ट ऑफिस के 1 साल के डिपॉजिट पर 6.9 फीसदी का ब्याज मिलेगा. अवधि बढ़ने पर ब्याज दरों में अंतर भी बढ़ जाता है. 5 साल के SBI FD पर 6.25 फीसदी का ब्याज मिलता है जबकि पोस्ट ऑफिस FD में निवेश करने पर 7.7 फीसदी का ब्याज मिलता है.

पोस्ट ऑफिस की और भी कई स्कीम हैं जिनपर बैंक डिपॉजिट से ज्यादा पैसा मिल रहा है. पोस्ट ऑफिस के 5 साल के NSC पर 7.9 फीसदी, 5 साल की मंथली इनकम स्कीम पर 7.6 फीसदी, किसान विकास पत्र पर 7.6 फीसदी का ब्याज मिलता है. यहां 9 साल 5 महीने में आपका पैसा डबल हो जाएगा.

एक्सपर्ट्स का मानना के मौजूदा हालात को देखते हुए 5 साल की स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश करना एक बेहतर विक्ल्प होगा. 5 साल के पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट पर बैंक की तरह की इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक के जमा का डिडक्शन मिलेगा. हालांकि इन डिपॉजिट से कमाए ब्याज पर आपको टैक्स जमा करना होगा. प्रोविडेंट फंड या सुकन्या समृद्धि की तरह की पोस्ट ऑफिस FD में निवेश करने की कोई ऊपरी लिमिट नहीं है. PPF और सुकन्या समृ्द्धि में 1 साल में सिर्फ 1.5 लाख रुपये ही निवेश किया जा सकता है.

डेट म्यूचुअल फंड्स

निवेशक चाहे तो डेट म्यूचुअल फंड्स में भी निवेश कर सकते हैं. इसमें टैक्स कटने के बाद बेहतर रिटर्न मिलती है. हालांकि डेट म्यूचुअल फंड्स में क्रेडिट रिस्क जुड़ा हुआ है. निवेशकों को सिर्फ उन्हीं फंड्स में निवेश करना चाहिए जहां इन्वेस्टमेंट AAA-Rated paper में हो.

निवेशक को ऐसे फंड्स तलाशने चाहिए जहां फंड मैनेजर को फोकस सिर्फ ज्यादा रिस्क लेकर ज्यादा रिटर्न कमाना न हो. निवेशक को यह देखते हुए कि वह कितना जोखिम उठा सकता है और कितने समय के लिए निवेश करना चाहता है यह सभी देखते हुए इन्वेस्टमेंट करनी चाहिए. सभी डेट में क्रेडिट रिस्क, इंटरेस्ट रेट रिस्क और लिक्विडिटी रिस्क जुड़े होते हैं. इसलिए निवेश करने से पहले निवेशक को सभी चीजें अच्छी तरह से जांच लेनी चाहिए.

एनालिस्ट्स का कहना है कि टैक्स के मामले में फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले डेट म्यूचुअल फंड बेहतर है. FD पर कमाए गए ब्याज को व्यक्ति की आय में जोड़ा जाता है और उसके पर्सनल स्लैब के हिसाब से उस रकम पर टैक्स लगता है. जबकि म्यूचुअल फंड्स पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के हिसाब से टैक्स देना होता है. शॉर्ट टर्म यानी 3 साल तक के लिए डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने पर फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह ही टैक्स लगाया जाएगा. लेकिन लॉन्ग टर्म यानी 3 साल से ज्यादा समय के लिए निवेश करने पर 20 फीसदी के हिसाब से टैक्स कटेगा.

Story By: Saikat Neogi

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