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PM Kisan: इन 10 कंडीशन में नहीं मिलता लाभ, 6000 रु सालाना के लिए ऐसे तय होता है नाम

कुछ कंडीशन ऐसी हैं, जिनमें पीएम किसान के तहत किसानों को 6000 रुपये सालाना मदद के लिए हकदार नहीं माना जाता है.

Published: June 2, 2020 11:32 AM
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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan) छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई योजना है. इस योजना के तहत 1 साल के दौरान 3 किस्तों में किसानों को सरकार 6000 रुपये की मदद देती है. हर 4 महीने पर उनके खाते में सरकार 2000 रुपये डालती है. अबतक किसानों को 5 किस्त के पैसे भेजे जा चुके हैं. यह योजना लॉकडाउन में किसानों के बेहद काम आ रही है, जब 24 मार्च से अब तक 19,350.84 करोड़ रुपये की मदद किसानों को मिली है. इसके तहत 9.67 करोड़ किसानों को लाभ मिला है. लेकिन ऐसा नहीं है कि सरकार की इस मदद के पात्र देश के सभी किसान हैं. कुछ कंडीशन ऐसी हैं, जिनमें किसानों को 6000 रुपये सालाना मदद नहीं मिलती है.

इन कंडीशन में नहीं मिलता है लाभ

  • अगर कोई किसान खेती करता है लेकिन वह खेत उसके नाम न होकर उसके पिता या दादा के नाम हो तो उसे 6000 रुपये सालाना का लाभ नहीं मिलेगा. वह जमीन किसान के नाम होनी चाहिए.
  • अगर कोई किसान किसी दूसरे किसान से जमीन लेकर किराए पर खेती करता है, तो भी उसे भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा. पीएम किसान में लैंड की ओनरशिप जरूरी है.
  • सभी संस्थागत भूमि धारक भी इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे.
  • अगर कोई किसान या परिवार में कोई संवैधानिक पद पर है तो उसे लाभ नहीं मिलेगा.
  • राज्य/केंद्र सरकार के साथ-साथ पीएसयू और सरकारी स्वायत्त निकायों के सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी होने पर भी योजना के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे.
  • डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, आर्किटेक्ट्स और वकील जैसे प्रोफेशनल्स को भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा, भले ही वह किसानी भी करते हों.
  • 10,000 रुपये से अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा.
  • अंतिम मूल्यांकन वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले पेशेवरों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है.
  • किसान परिवार में कोई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशंस, जिला पंचायत में हो तो भी इसके दायरे से बाहर होगा.
  • जान बूझकर गलत जानकारी देने पर

कैसे होती है लाभ पाने वालों की पहचान

केंद्र ने राज्य/UT सरकारों को “मौजूदा भूमि स्वामित्व प्रणाली” का उपयोग करने के लिए कहा है ताकि लाभार्थियों की पहचान की जा सके और पीएम-किसान पोर्टल पर परिवार के विवरण अपलोड होने के बाद उनके खाते में पैसे भेजें जा सकें. इसमें कहा गया है कि पात्र लाभार्थी किसानों की पहचान करने और पीएम-किसान पोर्टल पर उनका विवरण अपलोड करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्य सरकारों की है. एक बार आवेदन करने के बाद राज्य/UT सरकारों को उस बारे में जांच करने का अधिकार है. सब कुछ सही पाए जाने पर ही इस योजना के तहत लाभ का हकदार माना जाता है.

आवेदन में गलती पर भी रुक जाती है किस्त

कई बार किसानों द्वारा दी गई सूचना में कुछ गलती हो जाती है. यह गलती आधार नंबर, बैंक खाता संख्या से लेकर नाम और पता कुछ भी हो सकता है. ऐसी स्थिति में भी 4 महीने की किस्त रुक जाती है. सरकार इन गलतियों में सुधार करने का मौका देती है, जिसके बाद से वह किसान पेंशन का हकदार हो जाता है. पीएम किसान की वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाकर आप गलती सुधार सकते हैं. जो किस्त रुकती है, आगे उसकी भी भरपाई हो जाती है.

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