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बच्चों के भविष्य के लिए इस तरह करें फाइनेंशियल प्लानिंग, पढ़ाई से लेकर कारोबार तक नहीं होगी कोई दिक्कत

बच्चे के भविष्य के लिए वित्तीय योजना में देरी करना सही नहीं है और इस पर अर्जेंट अटेंशन दिया जाना चाहिए.

Updated: Apr 12, 2021 10:32 AM
Planning for your child future Here are some quick tips

ग्लोबलाइजेशन के इस दौर ने लोगों के सामने अधिक से अधिक विकल्प पेश किए हैं. न सिर्फ आपके लिए बल्कि आपके बच्चों के सामने एक से बढ़कर एक विकल्प सामने आए हैं. बच्चों की इच्छाएं भी बढ़ी हैं और युवा पीढ़ी के बीच विदेशों में पढ़ाई के प्रति क्रेज बढ़ता जा रहा है. हालांकि इसकी लागत बहुत अधिक पड़ती है और यह लगातार बढ़ता जा रहा है. भारत में एजुकेशन इंफ्लेशन सालाना 10-12 फीसदी है लेकिन अगर 6-8 फीसदी भी इंफ्लेशन मानकर चलें तो भी बच्चों के भविष्य में शिक्षा पर बड़ा खर्च आने वाला है. ऐसे में बच्चे के भविष्य के लिए वित्तीय योजना में देरी करना सही नहीं है और इस पर अर्जेंट अटेंशन दिया जाना चाहिए. इसके लिए आपको जल्द से जल्द निवेश की शुरुआत अभी से करनी चाहिए.

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बच्चों के फ्यूचर प्लानिंग के लिए खास टिप्स

  • जल्द से जल्द शुरू करें निवेश: कोई भी लक्ष्य हो लेकिन भविष्य की किसी भी जरूरत के लिए यह हमेशा महत्वपूर्ण होता है कि जल्द से जल्द निवेश शुरू करें. बच्चे के बड़े होने पर अपनी इच्छाएं हो सकती हैं लेकिन एक माता-पिता के रूप में आप पहले से तैयारी शुरू करें. भविष्य में बच्चे की शिक्षा पर आने वाले खर्च का आकलन करें और इस गणना में महंगाई को भी भी ध्यान में रखें. अब इस वित्तीय लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी स्ट्रेटजी अपनाएं. बच्चों की शिक्षा के लिए निवेश और बचत को जल्द से जल्द शुरू करें ताकि कंपाउंडिंग का फायदा ले सकें जो लंबे समय में बहुत फायदा दे सकता है.
  • सुकन्या समृद्धि योजना: अगर आपके पास 10 साल से कम उम्र की कोई गर्ल चाइल्ड है तो सुकन्या समृद्धि योजना इस समय बाजार में उपलब्ध सभी विकल्पों में सबसे बेहतर और अफोर्डेबल योजना है. आप महज 250 रुपये और उसके बाद 50 रुपये के गुणक में सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकते हैं. खाता सक्रिय रखने के लिए हर साल कम से कम 250 रुपये जमा करना अनिवार्य है.
    इस योजना के तहत लॉक इन पीरियड होता है बच्चे के 18 वर्ष की उम्र होने के पहले तक पैसा नहीं निकाल सकते हैं. इसका टेन्योर 21 वर्ष का होता है लेकिन बच्ची के 18 वर्ष का होने के बाद इसमें से कुछ राशि निकाल सकते हैं. हालांकि यह राशि सिर्फ उसकी शिक्षा खर्च के लिए निकाल सकते हैं. इसके अलावा 5 साल के बाद मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में पैसे निकालने की इजाजत है. इस योजना के तहत आमतौर पर पीपीएफ से अधिक दर पर ब्याज मिलता है और इस पर टैक्स नहीं देना होता.
  • खुद को इंश्योर्ड करें: बच्चे के एस्पिरेशंस के लिए सबसे बड़ा खतरा उसके माता-पिता की अनुपस्थिति है. बच्चे वित्तीय तौर पर अपने माता-पिता पर ही निर्भर है तो उनकी मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में बच्चे के भविष्य को लेकर बनाई गई योजना के बिखरने का डर रहता है. ऐसे में यह जरूरी है कि माता-पिता को खुद का टर्म व हेल्थ इंश्योरेंस जरूर रखना चाहिए. जब भी आपके परिवार में कोई नया सदस्य जुड़े या आपकी आय बढ़े तो इसे रिव्यू कर अपने परिवार को अधिक सुरक्षा देने की स्ट्रेटजी अपनानी चाहिए.
  • बच्चों की शिक्षा के लिए योजना: युवा पीढ़ी के बीच घर से दूर विदेशों में पढ़ने का चलन तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में पैरेंट्स को इसके लिए 10-15 साल पहले ही वित्तीय योजना बनाना शुरू कर देना चाहिए. इसके लिए सबसे पहले भविष्य में पढ़ाई पर लगने वाली लागत का आकलन करना चाहिए. आसान शब्दों में कहें तो अगर विदेशों में पढ़ाई पर खर्च आज 20 लाख रुपये आ रहा है तो 6 फीसदी की औसत महंगाई दर से यह आंकड़ा 50 लाख रुपये का हो जाएगा. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रिस्की व सुरक्षित इंस्ट्रूमेंट्स के बीच बेहतर तरीके से अपनी पूंजी को डाइवर्सिफाई कर निवेश करना चाहिए. जैसे कि निफ्टी 50 इंडेक्स फंड्स या गारंटेड इंश्योरेंस प्लान्स लंबे समय में कंपाउंडिंग का बेहतर लाभ दे सकता है और इससे भविष्य में बिना कर्ज लिए अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
  • बच्चों में पैसों को लेकर अच्छी आदतें डालें: एक निश्चित उम्र के बाद बच्चों में अच्छी वित्तीय आदतें विकसित करना बहुत जरूरी है ताकि वे अपने पैसों को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकें. हर महीने पॉकेट मनी तय करना, उन्हें बजट व टैक्स के बारे में जानकारी देना कुछ महत्वपूर्ण सीख हैं जिन्हें बच्चों को जरूर सिखाना चाहिए. ये आदते उस समय बच्चों के लिए बहुत मददगार साबित होंगी जब वे अपने परिवार से दूर कहीं रह रहे हों या कमाई शुरू कर दिया हो.

(Anup Seth, Chief Retail Officer, Edelweiss Tokio Life Insurance)

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