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No EMI Till पजेशन: प्रॉपर्टी खरीदने से पहले जान लें सबवेंशन स्कीम का गणित, नहीं खाएंगे धोखा

सबवेंशन स्कीम खरीदार, बैंक या अन्य लेंडर और बैंक के बीच एक करार होती है.

December 1, 2018 8:11 AM

No emi till possession what is subvention scheme in property buying or home loan

खुद का घर हर इंसान का सपना होता है. इस सपने को पूरा करने के लिए आज के दौर में ज्यादातर लोग लोन का सहारा लेते हैं. कई लोग पूरे बने घर को खरीदते हैं तो कई कंस्ट्रक्शन के टाइम पर ही बुकिंग करा लेते हैं.

अगर कंस्ट्रक्शन के टाइम पर ही लोन के जरिए घर खरीदते हैं तो आपके पास घर का पजेशन यानी मालिकाना हक मिलने के बाद ईएमआई शुरू करने का आॅप्शन रहता है. इसे सबवेंशन स्कीम कहते हैं. आइए बताते हैं क्या है सबवेंशन स्कीम और क्या हैं इसके नफा और नुकसान:

सबवेंशन स्कीम

सबवेंशन स्कीम खरीदार, बैंक या अन्य लेंडर और बिल्डर के बीच एक करार होता है. इसके तहत खरीदार केवल डाउन पेमेंट देकर फ्लैट बुक कर सकता है, जो पूरे अमाउंट का मिनिमम 5 या मैक्सिमम 30 फीसदी हो सकता है. उसके बाद जब तक प्रॉपर्टी अंडर कंस्ट्रक्शन रहती है और खरीदार को उसका पजेशन नहीं मिलता, तब तक खरीदार की ओर से लेंडर को लोन का ब्याज बिल्डर पे करता है. फिर जब खरीदार को पजेशन मिल जाता है, उसके बाद वह ईएमआई भरना शुरू करता है.

यह स्कीम कैसे है मददगार?

  • सबवेंशन स्कीम के चलते खरीदार को घर तैयार होने से पहले ईएमआई देने की जरूरत नहीं होती.
  • डाउन पेमेंट करने के बाद खरीदार को कंस्ट्रक्शन पूरा होने तक ईएमआई का इंतजाम करने का वक्त मिल जाता है.
  • सबवेंशन स्कीम में प्रॉपर्टी का डेवलपमेंट रिस्क पूरी तरह से बिल्डर द्वारा वहन किया जाता है. यानी अगर प्रॉपर्टी का पूरा होना किसी वजह से डिले होता है तो उस वक्त में भी इंट्रेस्ट बिल्डर को ही पे करना होगा.
  • अगर किसी वजह से प्रोजेक्ट रुक जाता है या बंद हो जाता है तो खरीदार का नुकसान केवल डाउन पेमेंट तक की ही सीमित रहेगा.

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सबवेंशन स्कीम के जोखिम

  • सबवेंशन स्कीम तब फायदेमंद है, जब इसमें नो ईएमआई टिल पजेशन पूरी तरह से लागू हो. यानी मालिकाना हक मिलने तक इंट्रेस्ट पूरी तरह से बिल्डर ही चुकाए, फिर भले ही कितना भी वक्त लगे. लेकिन अगर बिल्डर कंस्ट्रक्शन के केवल 2 या 3 साल तक ही इंट्रेस्ट भरने को राजी होता है तो उसके बाद इसकी कॉस्ट और जोखिम की जिम्मेदारी खरीदार की होगी. यानी ऐसे में 2 या 3 साल बाद कंस्ट्रक्शन भले ही खत्म हो या न हो, खरीदार को ईएमआई भरनी पड़ेगी.
  • सबवेंशन स्कीम लेने से पहले यह जरूर पता कर लेना चाहिए कि बिल्डर अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाला हो. अगर बिल्डर इंट्रेस्ट का एक भी पेमेंट डिले करना है या ​डिफॉल्ट करता है तो आपका क्रेडिट स्कोर खराब होगा क्योंकि लोन आपके नाम पर है.
  • सबवेंशन स्कीम में हो सकता है कि फ्लैट आपको महंगा पड़े. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रॉपर्टी की कुल कीमत में बिल्डर द्वारा कंस्ट्रक्शन पूरा होने तक भरे जाने वाले इंट्रेस्ट को जोड़ लिया जाए.

(इसके लेखक आदिल शेट्टी बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ हैं.)

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