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SIP Tips: निवेशकों को कब रोकनी चाहिए एसआईपी, कब निकालें पैसे? सीखें जरूरी टिप्स

Mutual Funds SIP Tips: SIP म्यूचुअल फंड में निवेश करने और लंबी अवधि में फंड जुटाने का सबसे आरामदायक और सुविधाजनक तरीका है.

Updated: Dec 02, 2020 11:36 AM
Mutual Fund SIP TipsMutual Fund Tips: SIP म्यूचुअल फंड में निवेश करने और लंबी अवधि में फंड जुटाने का सबसे आरामदायक और सुविधाजनक तरीका है.

Mutual Funds SIP Tips: सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) म्यूचुअल फंड में निवेश करने और लंबी अवधि में फंड जुटाने का सबसे आरामदायक और सुविधाजनक तरीका है. यह निवेशकों में अनुशासित निवेश करने की की आदत को बढ़ावा देता है और रूपी कास्ट एवरेजिंग का लाभ सुनिश्चित करता है. हालांकि, कई बार बाजार के उतार चढ़ाव या किसी संबंधित जोखिम की वजह से एसआईपी में निवेशकों को घाटा भी हो जाता है. एक निवेशक को तब क्या करना चाहिए? क्या उसे नुकसान उठाने वाले SIP को रोकना या वापस लेना चाहिए या SIP चालू रखना चाहिए? ये ऐसे सवाल हैं जो निवेशकों को परेशान करते र​हते हैं. आइए हम उसी का जवाब खोजने की कोशिया करते हैं.

एसेट अलोकेशन

यह एसआईपी निवेश का एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है. इक्विटी लिंक्ड म्यूचुअल फंड से मिलने वाला रिटर्न शेयर बाजार का एक फंक्शन है. अगर बाजार खुद ही ज्यादा आकर्षक रिटर्न नहीं दे रहा है, तो आपके द्वारा निवेश किया गया इक्विटी फंड भी उसी को फॉलो कर सकता है. एक और बात का ध्यान यह रखना चाहिए कि पूर्व प्रदर्शन को देखते हुए निवेश करना अच्छा आइडिया नहीं है. मसलन अगर पिछले साल मिडकैप और स्मालकैप ने अच्छा रिटर्न दिया है तो अपना ज्यादातर पैसा इन्हीं फंडों में लगाना गलत आइडिया होगा.

बेहतर है कि अपने एसेट को डाइवर्सिफाई तरीके से निवेश करें. यह लांग टर्म, मिड टर्म और र्शार्ट टर्म फंड का मिश्रण होना चाहिए. यह विकल्प हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है. क्योंकि सबके निवेश का लक्ष्य या जोखिम लेने की क्षमता एक जैसी नहीं होती है. अपने निवेश को केवल एक प्रकार के फंड तक सीमित करना निश्चित रूप से बहुत अच्छा विचार नहीं है. निवेश करते समय अपनी जोखिम लेने की क्षमता का ध्यान रखें.

कब निकालें पैसा

यह निवेशकों द्वारा सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है. इस प्रश्न का उत्तर यह है कि उेसा करने के पहले अपने फंड का प्रदर्शन जरूर देख लें. आपके द्वारा निवेश किए गए फंड के प्रदर्शन को ट्रैक करें. अगर फंड का एक साल से कम समय के लिए प्रदर्शन लो है तो इससे बाजार में उतार-चढ़ाव हो सकता है. लेकिन अगर प्रदर्शन 18 महीने से अधिक के लिए कमजोर है तो दूसरे बेहतर फंड की तलाश करना चाहिए.

हालांकि, फंड के प्रदर्शन की मैपिंग करते समय यह एकमात्र पैरामीटर नहीं है. आपको उन कंपनियों की संरचना और उनके प्रदर्शन की भी जांच करनी चाहिए जिनमें फंड ने निवेश किया है. इस बिंदु पर एक और अच्छी रणनीति यह है कि अपने म्यूचुअल फंड की तुलना उसी के समान म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन के आधार पर करें. जब आप अपने एसआईपी को भुनाने और वैकल्पिक फंडों की पहचान करने के बारे में निर्णय लेते हैं तो पहले अच्छे से एक्सरसाइज कर लें.

निवेश की अवधि

SIP में जितना अधिक समय तक निवेश किया जाता है, उतना ही बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना होती है. आम तौर पर, एसआईपी में कम से कम 5 साल या उससे ज्यादा के निवेश पर विचार करें. जाहिर तौर पर नुकसान और बाजार के जोखिमों को कम करने के लिए कम से कम 5 साल लगते हैं. कंपाउंडिंग का फायदा भी कम से कम 5 साल पर देखना चाहिए. एक बाजार सुधार चरण का मतलब उन फंइस दौरान जब बाजार में करेक्शन हो तो अपने निवेश को भुनाने की बजाए इसे कम कीमत पर अधिक फंड खरीदने के अवसर के रूप में लें.

हो सकता है कि कभी किसी को म्यूचुअल फंड में नुकसान हो जाए, लेकिन इस पर तुरंत रिएक्ट नहीं करना चाहिए. अपने पोर्टफोलियो को लाल रंग में देखकर गलत निर्णय ना लें. इस तरह के रिजल्ट की वजह चुनाव, जियो पॉलिटिकल टेंशन, स्लोडाउन, कोरोना वायरस जैसी कोई महामारी या अन्य ऐसे फैक्टर हो सकते हैं. अर्थव्यवस्था ने यह सब देखा है और फिर भी आगे बए़ती रही है. कह सकते हैं कि निवेश एक लांग टर्म गेम है और इसी का अनुसार निवेशकों को स्ट्रैटेजी बनानी चाहिए.

(लेखक: P Saravanan, प्रोफेसर आफ फाइनेंस एंड अकाउंटिंग, IIM तिरूचिरापल्ली)

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