Mutual Fund Investment: SIP के ज़रिए निवेश हमेशा नहीं होता फायदे का सौदा, जानें कब आपको इसमें पैसा लगाने से बचना चाहिए

अगर आपके पास निवेश के लिए एक बड़ा अमाउंट है तो ऐसी स्थिति में इसे हर महीने एसआईपी के ज़रिए निवेश करना सही तरीका नहीं है. इससे आप अपने अमाउंट के एक बड़े हिस्से पर रिटर्न प्राप्त करने से चूक जाएंगे.

Mutual Fund Investment: When you should not invest through SIPs
म्यूचुअल फंड में निवेश करना हो तो आमतौर पर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.

Mutual Fund Investment: म्यूचुअल फंड में निवेश करना हो तो आमतौर पर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. यह माना जाता है कि एसआईपी म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एकमात्र सुरक्षित तरीका है. लेकिन, यह हमेशा सच नहीं होता. म्यूचुअल फंड कई तरह के निवेश विकल्पों की अनुमति देते हैं, जिनमें अलग-अलग तरह के एसेट क्लास, टैक्स बेनिफिट, रिटर्न और जोखिम में अंतर आदि जुड़े होते हैं. इसमें आप एक बार में बड़ा अमाउंट निवेश कर सकते हैं और इसके साथ ही SIP के ज़रिए छोटा अमाउंट भी नियमित अंतराल में निवेश किया जा सकता है. जो निवेशक लंबी अवधि में धीरे-धीरे फंड जनरेट करना चाहते हैं, वे एकमुश्त निवेश के बजाए एसआईपी पसंद करते हैं. हालांकि एसआईपी के ज़रिए निवेश हर बार सही नहीं होता है. अगर आप एसआईपी के ज़रिए निवेश की योजना बना रहे हैं तो कुछ स्थितियों में आपको इससे बचना चाहिए. यहां हमने इन्हीं के बारे में बताया है.

जब आप अपने फाइनेंशियल गोल्स तक पहुंचने वाले हों

SIP के ज़रिए निवेश का एक मुख्य उद्देश्य छोटी अवधि में होने वाले बाजार के उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करना है. एसआईपी लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए होते हैं, ताकि शॉर्ट-टर्म मार्केट में उतार-चढ़ाव को कम किया जा सके. जब आप लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के ज़रिए अपने फाइनेंशियल गोल्स को प्राप्त करने वाले हों, तो ऐसी स्थिति में जोखिम को कम करने और नुकसान से बचने के लिए अपने फंड को कम रिस्क वाली जगहों पर निवेश करना जरूरी हो जाता है. इस स्थिति में एसआईपी के ज़रिए निवेश जारी रखना सही नहीं है. अगर बाजार में तेजी है, तो भी लालच में न आकर अपने फंड को कम जोखिम वाली जगहों में निवेश किया जाना चाहिए. फाइनेंशियल गोल्स के करीब पहुंचने पर आपको फोकस फंड की सुरक्षित रखना होना चाहिए.

जब आपके पास निवेश के लिए एक बड़ा अमाउंट हो

अगर आपके पास निवेश के लिए एक बड़ा अमाउंट है तो ऐसी स्थिति में इसे हर महीने एसआईपी के ज़रिए निवेश करना सही तरीका नहीं है. मान लीजिए, आपके पास 10 लाख रुपये हैं और आप एसआईपी के माध्यम से हर महीने 5000 रुपये इक्विटी फंड में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो आप अपने अमाउंट के एक बड़े हिस्से पर रिटर्न प्राप्त करने से चूक जाएंगे. इसके बजाय, अगर आप पूरे फंड को व्यवस्थित तरीके से निवेश करने की योजना बनाते हैं, यानी 20 महीने के लिए 50,000 रुपये प्रति माह, तो यह बेहतर तरीका होगा.

अगर आपकी म्यूचुअल फंड स्कीम अच्छा रिटर्न नहीं दे रही हो

जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो अपने पोर्टफोलियो के प्रदर्शन को ट्रैक करना अहम होता है. कभी-कभी, आपके पोर्टफोलियो में कुछ स्कीम अच्छा प्रदर्शन नहीं करती हैं. अगर आप घाटे में चल रहे म्यूचुअल फंड में निवेश करना जारी रखते हैं, तो इससे आपको बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. आगे के नुकसान से बचने और अपने पोर्टफोलियो को अपडेट करने का सबसे अच्छा तरीका है कि घाटे में चल रहे एसआईपी को तुरंत रोक दिया जाए. समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो को अपडेट करना जरूरी होता है.

हमेशा ध्यान रखें, एसआईपी आपको जोखिम कम करने में मदद कर सकता है, बशर्ते आपने सही फंड चुना हो. SIP की कुछ सीमाएं होती हैं जिन्हें आपको उनमें निवेश करने से पहले ध्यान में रखना चाहिए. ये लॉन्ग टर्म के लिए होते हैं और हो सकता है कि ये आपको शॉर्ट टर्म में अच्छा रिटर्न न दें. थोड़ी सी मेहनत से आपका एसआईपी निवेश का एक बेहतरीन ज़रिया साबित हो सकते हैं.

(लेखक BankBazaar.com के सीईओ हैं)

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