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अगर रखते हैं मल्टीपल सेविंग्स बैंक अकाउंट, तो उठाने पड़ सकते हैं 5 नुकसान

मल्‍टीपल सेविंग्‍स अकाउंट के फायदों के साथ-साथ कुछ नुकसान भी हैं.

July 28, 2019 7:48 PM

Multiple savings bank account disadvantages

अक्सर लोगों के 2 या इससे ज्यादा सेविंग्स अकाउंट होते हैं. इसकी वजह बार-बार नौकरी बदलना, रोजगार के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाकर बसना, कारोबारी जरूरतें आदि होते हैं. लेकिन कई बार लोग एक ही अकाउंट में ज्यादा पैसे न रखकर मल्टीपल बैंक अकाउंट में रखना सहूलियत भरा और फायदेमंद समझते हैं. फायदों में ATM से ज्‍यादा ट्रांजेक्‍शन करना, एक बैंक में कम तो दूसरे में ज्‍यादा ब्‍याज रहने का फायदा, मल्‍टीपल चेकबुक, क्रेडिट कार्ड आदि को मुख्‍य माना जाता है.

इसके अलावा बैंक के दिवालिया होने पर केवल 1 लाख रुपये का डिपॉजिट ही सिक्योर होना भी एक प्रमुख वजह है. यानी कोई भी बैंक आपके केवल 1 लाख रुपये तक के डिपॉजिट की ही गारंटी लेता है. ऐसे में लोग मल्टीपल सेविंग्स अकाउंट में छोटी-छोटी जमा रखना बेहतर मानते हैं. हालांकि मल्‍टीपल सेविंग्‍स अकाउंट के फायदों के साथ-साथ कुछ नुकसान भी हैं.

हर अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखना

मल्टीपल अकाउंट्स का सबसे पहला नुकसान यह है कि कस्टमर को हर अकाउंट में मिनिमम मंथली एवरेज बैलेंस रखना होता है. सभी बैंकों के रेगुलर सेविंग्स अकाउंट में यह नियम लागू है. ऐसे में जो अकाउंट आप इस्‍तेमाल नहीं कर रहे हैं, उनमें भी एक निश्चित धनराशि को जमा रखना होगा और इस पर ब्‍याज भी 4 से 6 फीसदी के बीच ही मिलेगा. अगर कम अकांउट होंगे तो जो पैसे आप मिनिमम बैलेंस मेंटेन करने में लगा रहे हैं, उन्‍हें कहीं और जैसे एफडी, शेयर मार्केट, म्‍युचुअल फंड आदि में इन्‍वेस्‍ट करके ज्‍यादा रिटर्न हासिल किया जा सकता है.

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नहीं रख पाए मिनिमम बैलेंस तो पेनल्‍टी

अगर आप सभी सेविंग्‍स अकाउंट में मिनिमम बैलेंस बरकरार नहीं रख पाते हैं तो आपको बैंक के नियमों के मुताबिक तय पेनल्‍टी यानी जुर्माना भरना होता है. वहीं अगर ज्‍यादा वक्‍त तक अमाउंट डिपॉजिट नहीं किया तो पेनल्‍टी बढ़ती जाती है और एक मोटा अमांउट बन जाता है.

 

इनकम टैक्‍स फाइलिंग में परेशानी

मल्‍टीपल बैंक अकाउंट इनकम टैक्‍स फाइलिंग में भी परेशानी का सबब बन जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि आपको रिटर्न फाइलिंग में हर अकाउंट का ब्‍यौरा देना होता है. ऐसे में मल्‍टीपल सेविंग अकाउंट से कागजी कार्रवाई में ज्‍यादा माथापच्‍ची होती है और सभी बैंक अकांउट से जुड़ी जानकारी जैसे बैंक स्‍टेटमेंट जुटाना भी टेंशन पैदा कर देता है. इसके अलावा अगर गलती से किसी अकाउंट की डिटेल देना छूट गया और इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने इसे टैक्‍स की चोरी समझ लिया तो पेनल्‍टी या टैक्‍स नोटिस का सामना भी करना पड़ सकता है.

मेंटिनेंस फीस और सर्विस चार्ज

बैंक कस्टमर से अकाउंट के लिए एक सालाना मेंटीनेंस फीस और सर्विस चार्ज लेते हैं. ऐसे में अगर आपके मल्‍टीपल बैंक अकाउंट हैं तो हर अकाउंट पर चार्ज और फीस देनी होगी. इसके अलावा अगर आपने हर अकाउंट के लिए डेबिट या एटीएम कार्ड ले रखा है तो उसकी फीस देनी होगी, जो खर्च को और बढ़ा देती है. वहीं ज्यादा डेबिट कार्ड के साथ एक और टेंशन रहती है, वह है हर कार्ड का पासवर्ड याद रखना.

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ट्रांजेक्‍शन न होने पर अकाउंट का डारेमेंट हो जाना

भले ही आपने अपने बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखा हो लेकिन अगर उस अकाउंट से एक लंबे वक्‍त से ट्रांजेक्‍शन नहीं हुआ है तो अकाउंट डोरमेंट हो जाता है. फिर जब आप डोरमेंट अकांउट को दोबारा एक्टिव कराते हैं तो उसकी एक पूरी प्रोसेस को फॉलो करना होता है.

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