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Stock Tips : मिडकैप और स्मॉल कैप शेयरों से बरस रहा है पैसा, लेकिन संभल कर करें निवेश-आगे खतरनाक मोड़ है

अगर कोविड-19 की तीसरी लहर आई तो भारतीय मार्केट में आने वाली ग्लोबल लिक्विडिटी सूख जाएगी. इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए हमें मिडकैप और स्मॉल कैप में संभल कर निवेश करना होगा.

August 13, 2021 11:27 PM

शेयर बाजार में इस वक्त तेजी का दौर है. मोटे तौर पर देखें तो बाजार हाल के दिनों मे आउटफॉर्मर रहा है. अगस्त महीने के अब तक के परफॉरमेंस के साथ ही बीएसई का मिडकैप इंडेक्स ( S&P BSE Midcap Index) में 2.54 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि स्मॉल कैप इंडेक्स 6.30 फीसदी बढ़ चुका है. ईयर टु डेट बेसिस ( YTD basis)पर देखें तो मिड कैप अब तक क्रमश: 29.4 और 48.6 फीसदी का रिटर्न दे चुका है.

आर्थिक रिकवरी शुरू लेकिन बिजनेस लोन की मांग अब भी कम

जून ( जून के पहले सप्ताह में अनॉलॉकिंग शुरू हो गई थी) और जुलाई में कोविड ऑनलाकिंग शुरू होने के साथ ही आर्थिक गतिविधियों में सुधार दिखने लगा था . लेकिन मार्च, 2021 की तुलना में ज्यादातर इंडिकेटर नीचे ही थे. लेकिन आगे मिड-टर्म में रिकवरी की संभावना तेज हो गई है. कंपनियों ने इसे ध्यान में रखते हुए फेस्टिवल सीजन के लिए अपने चैनल इन्वेंट्री को दोबारा खड़ा करना शुरू कर दिया है. क्वांटम म्यूचुअल फंड के इक्विटी फंड मैनेजर सोरव गुप्ता का कहना है अर्थव्यवस्था के मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर अच्छे दिखने लगे हैं लेकिन अभी भी क्रेडिट डिमांड खास कर बिजनेस लोन के बढ़ने की चाल ढुलमुल है. वित्त वर्ष 2020-21 के जुलाई महीने की तुलना में वित्त वर्ष तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के जुलाई महीने में बिजनेस लोन सिर्फ 1 फीसदी बढ़ा है.

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मिड कैप की वैल्यूएशन ज्यादा, संभल कर करें निवेश

इन हालातों के संदर्भ में देखें तो कोविड-19 से जुड़ी अनिश्चिचतताओं की आशंका बनी हुई है. जबकि मिडकैप वैल्यूएशन लगभग अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. साफ है कि बाजार छोटी कंपनियों में निवेश के जोखिम को अनदेखा कर रहा है. निवेशक मिड कैप और स्मॉल कैप में भारी निवेश कर रहे हैं. यही वजह है कि इनका वैल्यूएशन बढ़ा हुआ है. लेकिन अगर कोविड-19 की तीसरी लहर आई तो भारतीय मार्केट में आने वाली ग्लोबल लिक्विडिटी सूख जाएगी. इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए हमें मिडकैप और स्मॉल कैप में संभल कर निवेश करना होगा. रिटेल निवेशकों को अपना सारा निवेश अलग-अलग साइज की कंपनियों के शेयर में लगाना चाहिए. उन्हें फौरी लाभ की तुलना में इक्विटी में लॉन्ग टर्म के हिसाब से निवेश करना होगा. शायद एफपीआई ने इस आशंका को भांप लिया है इसलिए जुलाई महीने में उन्होंने 1.5 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच दिए.

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