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Large Cap vs Small Cap Mutual Funds: इन तीन तरीकों से चुनें अपना निवेश विकल्प, नहीं होगा कभी नुकसान

Large Cap vs Small Cap Mutual Funds: अगर कैलकुलेशन सही नहीं किया गया है तो शॉर्ट टर्म इंवेस्टर्स अपनी पूरी जमा-पूंजी गंवा सकते हैं और लांग टर्म इंवेस्टर्स को अधिक रिटर्न नहीं मिल पाता.

December 5, 2020 2:28 PM
Large Vs Small-Cap Mutual Funds How to decide which works best for you know hereOverall, mutual funds saw net inflows of Rs 27,194 crore in November against inflows of Rs 98,575 crore in the previous month.

Large Cap vs Small Cap Mutual Funds: निफ्टी और सेंसेक्स में जबरदस्त तेजी ने निवेशकों को स्टॉक के प्रति आकर्षित किया है. हालांकि स्टॉक में उतार-चढ़ाव के कारण कई निवेशक म्यूचुअल फंड के जरिए बाजार में प्रवेश करते हैं. हालांकि म्यूचुअल फंड्स के जरिए भी निवेश में कैलकुलेशन करना जरूरी होता है. अगर आपने कैलकुलेशन सही नहीं किया है तो अपनी जमा-पूंजी गंवा भी सकते हैं. शॉर्ट टर्म इंवेस्टर्स अपनी पूरी जमा-पूंजी गंवा सकते हैं और लांग टर्म इंवेस्टर्स को अधिक रिटर्न नहीं मिल पाता. इसलिए शुरुआत से ही अपनी स्ट्रेटजी सही दिशा में बनाए जाने की जरूरत है. लॉर्ज कैप फंड्स और स्माल कैप फंड्स में कौन सा आपके लिए बेहतर है, यह समझकर ही निवेश करना चाहिए. आइए जानते हैं कि इन दोनों विकल्पों में कोई चयन करते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए.

बाजार में गिरावट की खास बात यह है कि उससे उबरने के बाद यह और तेजी से आगे बढ़ता है. इस समय निवेश के लिए सकारात्मक माहौल बना हुआ है कि क्योंकि वैक्सीन आने के बाद बाजार के आगे बढ़ने की पूरी संभावना है.

रिस्क उठाने की क्षमता

लॉर्ज कैप फंड्स लगभग स्थिर होते हैं और उनमें रिस्क बहुत कम होता है. इस फंड में ब्लू-चिप स्टॉक्स होते हैं जो बेहतर प्रदर्शन करते हैं और भविष्य में और भी बढ़ोतरी की संभावना होती है. हालांकि यह भी है कि ब्लू-चिप स्टॉक्स में पर्सेंटेंज के तौर पर देखें तो बढ़ोतरी कम होती है. इसके विपरीत स्माल-कैप फंड्स में पर्सेंटेंज के तौर पर अधिक बढ़ोतरी होती है. हालांकि पर्सेंटेंज में अधिक बढ़ोंतरी वाला यह फंड वोलेटाइल होता है और मार्केट भी किसी भी गतिविधियों के प्रति बहुत संवेदनशाली होता है. इसके अलावा लार्ज कैप कंपनियों की तुलना में स्माल-कैप कंपनियों के पास फाइनेंसियल बफर कम होता है जिसके कारण उनमें निवेश पर रिस्क अधिक होता है. इसलिए इन दोनों विकल्पों का चयन करते समय अपने रिस्क लेने की क्षमता का आकलन जरूर कर लें.

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निवेश लक्ष्य

रिस्क के अलावा एक और फैक्टर जो महत्वपूर्ण है, वह यह कि आप कितने समय तक निवेश करना चाहते हैं. स्माल कैप को लेकर आदर्श स्थितियों की बात करें तो कम से कम 5 साल तक निवेश जरूर रहना चाहिए. इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि जब बाजार में किसी एक या दो साल गिरावट का माहौल रहे तो उसे रिकवर किया जा सके. यह रिकवरी बाजार बढ़ने या म्यूचुअल फंड हाउस द्वारा फंड को रिलोकेट (कहीं और इंवेस्ट करने) के दरिए सुनिश्चित की जाती है. हालांकि अगर आप इससे कम समय में कांसिस्टेंट रिटर्न पाना चाहते हैं तो लार्ज कैप में इंवेस्ट करने का फैसला बेहतर रहेगा.

राइट मिक्स

एक और बेहतर विकल्प आपके पास हमेशा मौजूद रहता है कि दोनों विकल्पों में किसी एक को चुनने के बजाय दोनों में ही निवेश किया जाए. दोनों में निवेश करने से न सिर्फ कम अवधि के लिए आर्थिक जरूरतों को पूरा किया जा सकता है बल्कि लंबी अवधि के लक्ष्यों को भी पूरा किया जा सकता है. हर एसेट क्लास और म्यूचुअल फंड कैटेगरी के कुछ फायदे और नुकसान हैं, इसलिए अपने वित्तीय लक्ष्यों का आकलन करने के बाद दोनों विकल्पों में उसी आधार पर निवेश का फैसला लिया जाना चाहिए. अगर आपको कम समय में ही अपना कोई वित्तीय लक्ष्य पूरा करना है तो लांग कैप में निवेश अधिक करें और अधिक समय में वित्तीय लक्ष्य पूरा करना है तो स्माल कैप में निवेश करें. इस प्रकार आपका निवेश संतुलित रहता है.
(Article: Pranjal Kamra, CEO, Finology)

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