मुख्य समाचार:

इक्विटी में कब कितना करें निवेश? याद रखें यह पॉपुलर फार्मूला, आसान हो जाएगा रिटर्न-जोखिम का आकलन

निवेशकों और सलाहकारों के सामने सबसे बड़ा चैलेंज उनके निवेश के लिए एसेट एलोकेशन को लेकर रहता है.

December 10, 2019 12:05 PM
know about Thumb Rules That Help You Make equity and debt asset Allocation Decisions simpleनिवेशकों और सलाहकारों के सामने सबसे बड़ा चैलेंज उनके निवेश के लिए एसेट एलोकेशन को लेकर रहता है.

अनुभव एक ऐसा टूल है जिसके आधार पर बिना किसी वैज्ञानिक नाप-तौल के किसी भी पेशे जैसे कि चिकित्सा, खेल, होटल, निवेश आदि में सटीक फैसले किए जा सकते हैं. इस टूल की खासियत यह है कि इसका नतीजा वैज्ञानिक नापतौल जितना ही सटीक होता है. दरअसल, अनुभव के आधार पर आकलन के मामले में एक ऐसा प्रचलित नियम (Thumb Rules) काम करता है, जो वर्षों से चला आ रहा है. आज के दौर में निवेश शुरू करने वालों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि किस एसेट में कितना निवेश करना चाहिए. खासकर इक्विटी एसेट एलोकेशन के मामले में यह सवाल सबसे अधिक उठता है.

बीते सालों के कुछ खास पहलुओं पर गौर करें तो पाएंगे कि पहले हम सभी के एक फैमिली डॉक्टर होते थे, जिनके पास इस बात का आकलन करने की गजब की क्षमता होती थी कि बुखार कितनी देर तक रहेगा और वह यह जानकारी बिना किसी मेडिकल टेस्ट बता दिया करते थे. इसी तरह, एक अनुभवी बावर्ची किसी कार्यक्रम विशेष के लिए आवश्यक सामानों की जानकारी बता देता है. यहां तक कि गूगल मैप के वजूद से पहले सड़क पर एक अनुभवी टैक्सी ड्राइवर यह बता सकता था कि मंजिल तक पहुुंचने में कितना समय लगेगा. इसी तरह एक अच्छा फिल्डर बिना पहले से मैदान का आकलन किए, क्रिकेट गेंद की दिशा और गति की जानकारी के दौड़ते हुए कैच लपक लेता है. कभी आपने यह सोचा है कि वे ऐसा कैसे करते हैं?

ये सभी कौशल दरअसल अनुभव के आधार पर हैं. सालों की मेहनत के बाद इन पेशेवर लोगों ने अपने अंदर ऐसी पेशगत दक्षता विकसित की. जिसमें वैज्ञानिक नापतौल की जरूरत नहीं रह जाती है. अनुभव के आधार पर इन पेशेवरों का आकलन एकदम सटीक होता है. अन्य दूसरे पेशवरों की तरह निवेश की दुनिया का भी लंबे समय चला आ रहा प्रचलित नियम है. यह नियम आपके निवेश और पोर्टफोलियो के प्रबंधन में मदद करता है.

SCSS, PMVVY से लेकर LIC जीवन शांति: घर के बुजुर्गों का पैसा कहां रहेगा ज्यादा सेफ, रिटर्न भी शानदार

एसेट एलोकेशन एक बड़ा चैलेंज

निवेशकों और परामर्शदाताओं के सामने सबसे बड़ा चैलेंज उनके निवेश के लिए एसेट एलोकेशन को लेकर रहता है. अधिकांश अध्ययन यह बताते हैं सही तरीके से एसेट एलोकेशन के फैसले से 90 फीसदी से ज्यादा रिटर्न हासिल किया जा सकता है. एसेट एलोकेशन कई वजह से चुनौतीपूर्ण रहता है. जैसे कि निवेश की उम्र, जोखिम लेने की क्षमता, जीवन की अवस्था, नौकरी की प्रकृति, मार्केट साइकिल इत्यादि. एसेट एलोकेशन का निहित सिद्धांत जोखिम का प्रबंधन है. अधिकांश निवेशकों के मामले में यह देखा गया है कि उनकी कमाई का शुरुआती चरण होता है, जहां उनके पास बचत और रिटायरमेंट कॉपर्स बनाने का पर्याप्‍त अवसर होता है.

रिटायरमेंट के बाद बचत के जरिए तैयार किया गया कॉर्पस उनके लिए आमदनी का इंतजाम करता है. इसलिए जीवन की शुरुआती चरण में जहां तक संभव हो रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने को प्राथमिकता होनी चाहिए. इसका सीधा मतलब है कि अधिक से अधिक एलोकेशन उन एसेट में होना चाहिए जहां रिटर्न अधिक मिल सके. हालांकि, इसमें इक्विटी जैसे अधिक उतार-चढ़ाव वाले एसेट भी शामिल हैं. जब रिटायरमेंट नजदीक आती है, तब फोकस कॉपर्स को सुरक्षित करने के लिए अधिक उतार-चढ़ाव वाले एसेट से कम जोखिम वाले डेट फंड की ओर होना चाहिए.

पोर्टफोलियो में कितना हो इक्विटी निवेश?

यहां तार्किक सवाल यह है कि उम्र के अलग-अलग पढ़ाव पर इ​क्विटी एलोकेशन कितना होना चाहिए. यहां भी एक प्रचलित नियम (Thumb Rules) है. जानकारों का कहना है कि निवेशक का (100 – उम्र) फीसदी एलोकेशन इक्विटी में होना चाहिए. जैसे, एक निवेशक की उम्र 30 साल है. ऐसे में उसके पोर्टफोलियो में इक्विटी एलोकेशन 100-30 = 70 फीसदी होना चाहिए. इसी तरह, यदि किसी निवेशक की उम्र 50 साल है तो उसके पोर्टफोलियो में इविक्टी एलोकेशन 100-50 = 50 फीसदी होना चाहिए.

इस तरह, हम समझ सकते हैं कि अलग-अलग समय में एसेट एलोकेशन का बुनियादी सिद्धांत किस तरह काम करता है. वहीं, एक निश्चित योजना के तहत निवेश के बारे में एक एक्विटी नियम यह भी है कि पैसे को एक एसेट क्लास से दूसरे में स्विच भी किया जा सकता है.

ELSS: टैक्स सेवर म्यूचुअल फंड ने 10 हजार के बनाए 17 लाख, 24 साल में 170 गुना तक मिला रिटर्न

30 से ज्यादा की उम्र के निवेशक ध्यान दें

मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखें तो चढ़ते हुए शेयर बाजार में इक्विटी से डेट में निवेश को शिफ्ट करना मुश्किल है. इसी तरह गिरते हुए शेयर बाजार में पैसे को डेट से इक्विटी में ट्रांसफर करना भी कठिन फैसला है. ऐसे में निवेशकों और सलाहकारों के लिए आसान है कि वह ‘100-age’ नियम का विकल्प उपाएं. यह चुनिंदा इक्विटी फंड और डेट फंड के बीच निवेश की उम्र के आधार पर एसेट एलोकेशन का प्रबंधन करता है. निवेशक कोई भी इक्विटी स्कीम और डेट फंड उपलब्ध विकल्पों में से चुन सकते हैं.

यह सुविधा निवेशक की उम्र के आधार पर निवेश को रीबैलेंस करेगी. 30 साल की उम्र से अधिक के निवेशक प्रत्येक 1/3/5/7 साल पर यह विकल्प अपना सकते हैं. जिन निवेशकों की उम्र 30 साल से कम है, उनका इक्विटी एलोकेशन 100 फीसदी होना चाहिए. ऐसा एसेट एलोकेशन प्रचलित नियम के आधार पर किया जा सकता है. निवेशकों को उम्र आधारित एसेट एलोकेशन सुविधा का चयन करने से पहले अपने सलाहकार से जरूर संपर्क करना चाहिए.

By: अजित मेनन, सीईओ, PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड

 

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

  1. बिज़नस न्यूज़
  2. निवेश-बचत
  3. इक्विटी में कब कितना करें निवेश? याद रखें यह पॉपुलर फार्मूला, आसान हो जाएगा रिटर्न-जोखिम का आकलन

Go to Top