ITR Filing: तिमाही आधार पर देनी होगी डिविडेंड इनकम की जानकारी, गलत आईटीआर फाइलिंग से बचने के लिए नए नियमों को समझना जरूरी

ITR Filing: वित्त वर्ष 2021 में डिविडेंड से हुई आय से जुड़े आईटीआर नियमों में बदलाव हुए हैं, जिनके बारे में जानना बहुत जरूरी है ताकि फाइलिंग में कोई गलती न हो.

Clarification on the tax treatment for the Hybrid Annuity Model of construction contracts has also been sought. (Representative image)
Clarification on the tax treatment for the Hybrid Annuity Model of construction contracts has also been sought. (Representative image)

ITR Filing: एसेसमेंट इयर 2022 (वित्त वर्ष 2021) के इनकम टैक्स रिटर्न की फाइलिंग के नियमों में कई बदलाव हुए हैं और इसी बदलावों में एक अहम बदलाव डिविडेंड इनकम की जानकारी देना है. आईटीआर फाइलिंग में डिविडेंड इनकम के खुलासे से जुड़े नियमों में बदलाव हुआ है. अगर पिछले वित्त वर्ष 2021 में टैक्सपेयर को लाभांश आय हुई है तो इन बदलावों पर नजर रखना जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आईटीआर में कोई गलती न हो.

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पहले डिविडेंड पर नहीं चुकाना होता था टैक्स

वित्त वर्ष 2021 से पहले किसी वर्ष 10 लाख रुपये तक की डिविडेंड आय पर टैक्सपेयर्स को कोई टैक्स नहीं चुकाना होता था क्योंकि ऑर्गेनाइजेशंस को डिविडेंड का भुगतान करने से पहले डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स (डीडीटी) चुकाना होता था. 10 लाख रुपये से अधिक की डिविडेंड आय पर टैक्सपेयर्स को 10 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना होता था. अब वित्त वर्ष 2021 से इन नियमों में बदलाव हुआ है और ऑर्गेनाइजेशन द्वारा बांटे गए डिविडेंड को टैक्स के दायरे में लाया गया. इसके अलावा नए नियमों के तहत अगर किसी वित्त वर्ष में 5 हजार रुपये से अधिक किसी रेजिडेंट शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड मिलता है तो इस पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटने की जिम्मेदारी डोमेस्टिक फर्म की होगी.

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‘अन्य स्रोत से आय’ के रूप में दिखाना होगा डिविडेंड को

वित्त वर्ष 2021 से पहले डिविडेंड इनकम का खुलासा ‘एग्जेम्प्टेड इनकम’ के तहत किया जाता था लेकिन अब नए नियमों के तहत इसकी जानकारी सेक्शन 56(2) (i) के तहत ‘अन्य स्रोत से हुई आय’ के तहत देनी होगी.

डिविडेंड आय की जानकारी देनी होगी तिमाही आधार पर

टैक्सपेयर्स को उसी तिमाही में एडवांस टैक्स का भुगतान करना होगा, जिसमें डिविडेंड मिला है. एडवांस टैक्स लायबिलिटी के भुगतान में डिफॉल्ट होने पर ब्याज के कैलकुलेशन के लिए पूरे वित्त वर्ष में मिले डिविडेंड की जानकारी तिमाही आधार पर देनी होगी. इसका मतलब हुआ कि 1 अप्रैल 2020 से 15 जून 2020 के बीच मिले डिविडेंड, 16 जून से 15 सितंबर 2020 तक मिले डिविडेंड, 16 सितंबर से 15 दिसंबर 2020 तक मिले डिविडेंड, 16 दिसंबर 2020 से 15 मार्च 2021 तक मिले डिविडेंड और 16 मार्च 2021 से 31 मार्च 2021 तक मिले डिविडेंड की जानकारी अलग-अलग देनी होगी.

इससे पहले डिविडेंड इनकम का खुलासा एडवांस में करना संभव नहीं था तो इस पर एडवांस टैक्स के भुगतान नहीं करने पर पेनाल्टी नहीं लगती थी. हालांकि अब इस साल से आयकर विभाग ने सभी ऑर्गेनाइजेशन को चुकाए गए डिविडेंड की जानकारी को विभाग को देना अनिवार्य कर दिया है और यह जानकारी टैक्सपेयर्स को प्री-फिल्ड मिलती है. ऐसे में जब आपको आईटीआर में प्री-फिल्ड डेटा मिले तो उसमें दी गई सभी जानकारी को सावधानी से देखें.
(Article: Amit Gupta, Co-Founder and MD, SAG Infotech)

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