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ITR Filing: म्यूचुअल फंड से लेकर FD तक, जानें किस निवेश पर कितना लगता है टैक्स

ITR Filing: अगर आप SIP मोड से फंड्स में निवेश कर रहे हैं तो हर इंस्टॉलमेंट को नया निवेश माना जाएगा

June 19, 2019 8:14 AM
ITR Filing news mutual funds gold investment fd stock process of taxation and charging ltcg and stcg taxमार्केट में ऐसी कई टैक्स सेविंग एफडी हैं जो 5 साल के लॉक-इन पीरियड के साथ आती

ITR Filing: FY2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने से पहले, अपनी सभी इनकम और टैक्स सेविंग स्टेप्स को ध्यान में रखकर अपनी टैक्स देनदारी को कैलकुलेट करना जरूरी है. निवेश से कमाई इनकम अक्सर उस वित्त वर्ष के दौरान आपकी टोटल इनकम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है. हालांकि, हर निवेश पर एक समान टैक्स नहीं लगता है. तो, आपको अपने द्वारा किए गए अलग-अलग तरह के निवेश की क्लास, अवधि और अन्य बातों के आधार पर किस तरह से टैक्स लगता है इस बारे में पता होना चाहिए.

यहां हमने कुछ पॉपुलर प्रोडक्ट्स को शामिल किया है जिनमें अक्सर लोग निवेश करते हैं. आइये जानते हैं कि इन सभी प्रोडक्ट्स पर कैसे टैक्स लगता है जिससे आप आसानी से इनकम टैक्स रिटर्न भर पाएं.

शेयर्स में निवेश

शेयर्स में 1 साल से ज्यादा से समय के लिए निवेश करने के बाद जो मुनाफा मिलता है उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) कहते हैं. वहीं 1 साल से कम समय में स्टॉक बेचने पर कमाए गए मुनाफे को शॉर्ट कैपिटल गेन्स टैक्स (STCG) कहा जाता है. हालांकि अगर 1 साल में 1 लाख से कम मुनाफा कमाया गया है तो उस कमाई पर LTCG का भुगतान नहीं करना होता है. अगर किसी व्यक्ति ने 1 साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा मुनाफा कमाया है तो उसे अपनी कमाई पर 10 फीसदी का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स का रेट 15 फीसदी है.
अगर इन्वेस्टर ने स्टॉक्स में निवेश करके 1 साल में 10 लाख रुपये तक का डिविडेंड कमाया है तो उससे किसी भी तरह का टैक्स नहीं वसूला जाएगा.

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म्यूचुअल फंड में निवेश

टैक्स के लिहाज से म्यूचुअल फंड निवेश को 2 भाग में विभाजित किया गया है – इक्विटी म्यूचुअल फंड्स और डेट म्यूचुअल फंड्स. स्टॉक इन्वेस्टमेंट (STCG & LTCG) की तरह ही इक्विटी म्यूचुअल फंड पर भी टैक्स वसूला जाता है.

हालांकि डेट फंड्स में 3 साल से ज्यादा समय के लिए निवेश करने पर उसे LTCG माना जाता है. इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ डेट फंड्स से मिले LTCG पर 20 फीसदी का टैक्स लगता है. वहीं 3 साल से कम समय के लिए रखे गए डेट म्यूचुअल फंड्स पर उस व्यक्ति की इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब के टैक्स वसूला जाता है.

ध्यान रखें कि अगर आप SIP मोड से फंड्स में निवेश कर रहे हैं तो हर इंस्टॉलमेंट को नया निवेश माना जाएगा और उस इंस्टॉलमेंट के होल्डिंग पीरियड के हिसाब से टैक्स लगेगा.

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) में 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है और उसपर सेक्शन 80C के तहत डिडक्शन मिलती है. 3 साल के लॉकइन पीरियड की वजह से यह LTCG में ही काउंट होता है.

फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश

फिक्स्ड डिपॉजिट पर कमाए गए ब्याज पर निवेशक की इनकम टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है. हालांकि सीनियर सिटीजन द्वारा कमाई गई 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम टैक्स फ्री है.

मार्केट में ऐसी कई टैक्स सेविंग एफडी हैं जो 5 साल के लॉक-इन पीरियड के साथ आती है और जिनका 80C में डिडक्शन मिलता है.

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गोल्ड में निवेश

गोल्ड में निवेश पर डेट फंड्स की तरह ही टैक्स लगता है. 3 साल से ज्यादा होल्डिंग पीरियड के गेन्स को LTCG और 3 साल से कम के होल्डिंग पीरियड वाले गेन्स को STCG माना जाता है.
इंडेक्शन बेनिफिट के साथ गोल्ड में निवेश से मिले LTCG पर 20 फीसदी का टैक्स लगता है. वहीं STCG पर निवेशक की इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. वहीं सरकारी गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने पर मैच्योरिटी के वक्त पूरे कैपिटल गैन पर टैक्स में एग्जेम्पशन मिल जाती है.

By: Adhil Shetty, CEO, Bankbazaar.com

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