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ITR-1 सहज: FY20 के लिए फॉर्म में क्या हुए बदलाव; क्या नई जानकारी होगी देनी

नए ITR 1 सहज फॉर्म में क्या है और इसमें करदाताओं से क्या अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है.

June 2, 2020 8:06 PM
ITR 1 sahaj form for FY20 what changes this year what new information additional details to be given नए ITR 1 सहज फॉर्म में क्या है और इसमें करदाताओं से क्या अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है.

इनकम टैक्स विभाग (I-T Department) ने वित्त वर्ष 2019-20 (आकलन वर्ष 2020-21) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म ITR 1 सहज, 2, 3, 4 सुगम, 5, 6, 7 और ITR-V नोटिफाई कर दिए हैं. विभाग ने अपनी ई-फाइलिंग वेबसाइट पर भी वित्त-वर्ष 2019-20 के लिए ITR- 1 सहज ई-फॉर्म जारी कर दिया है. ITR-1 फॉर्म वेबसाइट पर Excel और Java फॉर्मेट में उपलब्ध है.

आमतौर पर आयकर विभाग ITR फॉर्म्स को संबंधित आकलन वर्ष के अप्रैल माह के पहले सप्ताह में नोटिफाई करता है. लेकिन इस साल असाधारण परिस्थितियों के चलते विभाग ने सभी ITR फॉर्म्स को मई के आखिरी सप्ताह में नोटिफाई किया है. आइए जानते हैं कि आकलन वर्ष 2020-21 के लिए नए ITR 1 सहज फॉर्म में क्या है और इसमें करदाताओं से क्या अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है.

आय की डिटेल्स

  • सैलरी/पेंशन से आय (आम नागरिकों के लिए)
  • वन हाउस प्रॉपर्टी से आय या नुकसान
  • परिवार की पेशन (आम नागरिकों के लिए)
  • दूसरे स्रोतों से आय (उस आय से अलग जिन पर स्पेशल रेट पर टैक्स लगता है जिसमें लौटरी से जीत और रेस होर्स या इनके अंदर नुकसान हैं)

बढ़ी हुई अवधि में किए गए निवेशों के लिए ‘शेड्यूल DI’

वित्त वर्ष 2019-20 के लिए डिडक्शन क्लेम करने के लिए निवेश, जमा, भुगतान आदि करने के लिए समयसीमा को बढ़ाकर 30 जून 2020 कर दिया गया है. यह चैप्टर VI-A, सेक्शन 10AA और सेक्शन 54 से 54GB के तहत क्लेम करने के लिए है. कोरोना महामारी की वजह से पहली बार अप्रत्याशित स्थिति आई है. मौजूदा ITR फॉर्म में ऐसा कोई विकल्प नहीं था जिसमें टैक्सपेयर्स द्वारा अगर वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद निवेश किया जाता है, तो डिडक्शन लिया जा सके. इसलिए एक नया शेड्यूल DI ITR-1 फॉर्म में डाला गया है जिससे टैक्सपेयर्स बढ़ी हुई अवधि के दौरान किए गए निवेश या जमा पर डिडक्शन का फायदा ले सकते हैं.

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सेक्शन 139(1) के 7वें नियम के तहत रिटर्न फाइल करने पर डिटेल्स

यह सुनिश्चित करने के लिए कि जो व्यक्ति ज्यादा मूल्य वाले ट्रांजैक्शन कर रहे हैं, वे इनकम टैक्स रिटर्न दें, इसके लिए फाइनेंस (नंबर 2) एक्ट, 2019 द्वारा सेक्शन 139 में सातवां नियम जोड़ा गया. इस नियम के तहत हर व्यक्ति जिसे इस वजह से रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं होती और उसकी आय अधिकतम छूट की सीमा को पार नहीं करती, उसे आय का रिटर्न फाइल करना होगा, अगर उसने पिछले साल में :

  • बैंक या को-ऑपरेटिव बैंक में रखे एक या ज्यादा करंट अकाउंट में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए हैं.
  • विदेश यात्रा की वजह से अपने या किसी दूसरे व्यक्ति के लिए 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा खर्च किए हैं.
  • बिजली बिल के भुगतान के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं.

अगर व्यक्ति को सेक्शन 139(1) के सातवें नियम के तहत स्थितियों के लिए इनकम रिटर्न फाइल करना है, तो उसे आईटीआर फॉर्म में उपयुक्त डिटेल्स को भरना होगा. इनमें करंट अकाउंट में जमा की गई राशि, विदेश यात्रा पर खर्च हुई राशि या बिजली के बिल के लिए दी गई राशि शामिल है.

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